चक्रवाती तूफान ‘तितली’ ओडिशा और आंध्र प्रदेश पहुंच गया है. दोनों राज्यों के तटीय इलाकों में तूफान के कारण भारी बारिश और भूस्खलन की ख़बरें आ रही हैं. तूफान के कारण कच्चे घर, पेड़ और बिजली के खंभे आदि गिरने से कई जगहों में सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया है. रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं. ओडिशा सरकार अब तक पांच तटीय जिलों से करीब तीन लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा चुकी है. इन इलाकों में स्कूल, कॉलेज बंद रखने के निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए थे. इससे पहले बीते महीने भी ओडिशा को चक्रवाती तूफान ‘डे’ की मार का सामना करना पड़ा था. 2013 में आए ‘फैलिन’ तूफान ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी तबाही मचाई थी.

सवाल उठता है कि तबाही मचाने के लिए कुख्यात इन तूफानों का नाम कैसे रखा जाता है. बीबीसी के मुताबिक 1953 से अमेरिका के मायामी स्थित नेशनल हरीकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) की अगुवाई वाला एक पैनल तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता रहा है. डब्लूएमओ संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है.

लेकिन पहले उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखा जाता था. जानकारों के मुताबिक इसकी वजह यह थी कि सांस्कृतिक विविधता वाले इस क्षेत्र में ऐसा करते हुए बेहद सावधानी की जरूरत थी ताकि लोगों की भावनाएं आहत होने से कोई विवाद खड़ा न हो.

2004 में डब्लूएमओ की अगुवाई वाला अंतरराष्ट्रीय पैनल भंग कर दिया गया. इसके बाद संबंधित देशों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम ख़ुद रखने को कहा गया. इसी साल हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने भारत की पहल पर चक्रवातीय तूफानों को नाम देने की व्यवस्था शुरू की. भारत के अलावा इनमें बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाईलैंड शामिल हैं.

इन देशों ने 64 नामों की सूची बनाई. हर देश की तरफ से आठ नाम थे. अब चक्रवात विशेषज्ञों का पैनल हर साल मिलता है और जरूरत पड़ने पर यह सूची फिर से भरी जाती है. सदस्य देशों के लोग भी नाम सुझा सकते हैं. जैसे भारत सरकार इस शर्त पर लोगों की सलाह मांगती है कि नाम छोटे, समझ में आने लायक, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और भड़काऊ न हों.

इतनी सावधानी के बावजूद विवाद भी हो ही जाते हैं. जैसे साल 2013 में ‘महासेन’ तूफान को लेकर आपत्ति जताई गई थी. श्रीलंका द्वारा रखे गए इस नाम पर इसी देश के कुछ वर्गों और अधिकारियों को ऐतराज था. उनके मुताबिक राजा महासेन श्रीलंका में शांति और समृद्धि लाए थे, इसलिए आपदा का नाम उनके नाम पर रखना गलत है. इसके बाद इस तूफान का नाम बदलकर ‘वियारु’ कर दिया गया.