किसी भी दुकान से जाकर त्वचा का रंग उजला करने का दावा करने वाली क्रीम (फेयरनेस) ख़रीदना लोगों के लिए अब मुश्किल हो सकता है. सूत्रों के हवाले से डीएनए ने जो ख़बर दी है उसके मुताबिक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अब इस तरह क्रीमों को ख़रीदने-बेचने के लिए सख़्त नियम बनाने जा रही है.

अख़बार को मुताबिक सांवली त्वचा को गोरा बनाने का दावा करने वाली क्रीमों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को लगातार विपरीत रिपोर्टें मिल रही हैं. बताया जा रहा है कि इन क्रीमों के लिए वज़ह से लोगों को कई तरह के साइड इफेक्ट्स हो रहे हैं. जानकारों और विशेषज्ञों की मानें तो इन क्रीमों की वज़ह से त्वचा में सूजन आ सकती है. जलन, खिंचाव, लाल चकत्ते पड़ जाना, चेहरे की नसें दिखने लगना, त्वचा का रंग पहले से ज़्यादा सांवला या बहुत ज़्यादा उजला हो जाना, आदि तमाम साइड इफेक्ट्स भी देखे जा सकते हैं.

विशेषज्ञ संगठनों से मिली जानकारी के अनुसार इन क्रीमों में कई तरह के हानिकारक रसायन मिले होते हैं. साथ ही उत्तेजना बढ़ाने वाली दवा (स्टेरॉयड्स) भी. इसी कारण तमाम तरह के साइड इफेक्ट्स भी दिखते हैं. यही वज़ह है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अब इन क्रीमों की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है. सूत्र बताते हैं कि इस बाबत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स-1945 में बदलाव करने की प्रक्रिया शुरू की है. इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है@

बताया जाता है कि नियमों में बदलाव के बाद फेयरनेस क्रीमें या इसी तरह के अन्य उत्पाद सिर्फ चिकित्सकों के परामर्श के बाद ही ख़रीदे जा सकेंगे. ठीक वैसे ही जैसे दवाईयां आदि. हालांकि क्षेत्र के विशेषज्ञ यह भी जोड़ते हैं कि महज़ नियमों को सख़्त बनाने से ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि जब दवाई जैसी चीजें भी चिकित्सक के बिना परामर्श के ख़रीदी-बेची जा रही हैं तो फेयरनेस क्रीमों और ऐसे अन्य उत्पादों की तो बात ही क्या है. इसलिए नियमों का सख़्ती से पालन हो, यह सुनिश्चित करना होगा.