उत्तर प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट जारी किए जाने की ख़बर सामने आई है. इलाहाबाद की एक विशेष अदालत ने यह वारंट जारी करते हुए रीता बहुगुणा जोशी को 31 अक्टूबर को पेश होने का आदेश दिया है.

एनडीटीवी के मुताबिक जिस मामले में रीता बहुगुणा जोशी के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया गया है वह 2010 का है. उस समय रीता उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्ष हुआ करती थीं. तब उन्होंने धारा-144 का उल्लंघन करते हुए राजधानी लखनऊ में एक जनसभा आयोजित की थी. इसके बाद विधानसभा तक पैदल मार्च भी निकाला था, जिससे पुलिस के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं का संघर्ष हो गया था. बताया जाता है कि इस मामले में अदालत ने रीता को कई बार समन भेजे. लेकिन वे अदालत में पेश नहीं हुईं. इसी वज़ह से ग़ैरज़मानती वारंट जारी किया गया.

ग़ौरतलब है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित 11 राज्यों में विशेष अदालतें बनाई हैं. ये अदालतें सांसदों-विधायकों से संबंधित आपराधिक मामलों की ही विशेष रूप से सुनवाई कर रही हैं. इलाहाबाद की विशेष अदालत भी उन्हीं में से एक है. याद रखने की बात यह भी है कि रीता बहुगुणा जोशी अब कांग्रेस छोड़ चुकी हैं. वे राज्य विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गई थीं.