फ्रांस के साथ रफाल लड़ाकू विमानों का सौदा कैसे हुआ, उस पूरी प्रक्रिया की जानकारी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगी है. इस खबर को आज के कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. शीर्ष अदालत ने इस मामले से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र को इसके लिए 29 अक्टूबर तक का वक्त दिया है. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी साफ किया है कि वह रफाल विमानों की तकनीकी जानकारी और कीमतों के बारे में सूचना नहीं चाहती है. पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर तय की है.

तेज विकास दर के बाद भी रोजगार पैदा नहीं हो रहे हैं : रिपोर्ट

विकास दर (जीडीपी) के लिहाज से दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल भारत पर्याप्त रोजगार पैदा करने में विफल हो रहा है. राजस्थान पत्रिका ने अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक शोध रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी दी है. रिपोर्ट की मानें तो साल 2015 में देश में बेरोजगारी दर पांच फीसदी हो गई थी. यह आंकड़ा बीते 20 वर्षों के दौरान सबसे अधिक रहा. यानी करीब सात फीसदी की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) दर के बाद भी रोजगार की स्थिति में केवल एक फीसद सुधार हुआ है. इससे पहले 1970 और 1980 के दशक में तीन से चार फीसदी विकास दर के साथ रोजगार पैदा करने की स्थिति में दो फीसदी सुधार हुआ था. इन बातों के साथ इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिक्षित युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर सबसे अधिक है.

दाखिले के वक्त मूल सर्टिफिकेट और फीस वापसी को लेकर छात्रों को राहत

अब सभी (निजी व सार्वजनिक) उच्च शैक्षणिक संस्थान दाखिले के दौरान छात्रों के मूल प्रमाण पत्र अपने पास नहीं रख सकेंगे. संस्थान को इन प्रमाण पत्रों की जांच के बाद इन्हें संबंधित छात्र-छात्रा को वापस देना होगा. हालांकि, बच्चों के लिए भी यह अनिवार्य किया जा रहा है कि वे अपने दस्तावेज की स्वयं सत्यापित प्रति संस्थान को सौंपें. अमर उजाला की खबर के मुताबिक बच्चों को इसी तरह की राहत फीस वापसी के मामले में भी दी गई है. इसके तहत दाखिला खिड़की बंद होने से 16 दिन या इससे पहले सीट छोड़ने पर सौ फीसदी फीस छात्रों को वापस मिलेगी. वहीं, एक महीने बाद सीट छोड़ने पर आधी फीस वापस की जाएगी. संस्थान ऐसा करने से इंकार करते हैं तो उन पर जुर्माना लगाने के साथ उनकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है. केंद्र सरकार ने इन इंतज़ामों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कानून में बदलाव किया है.

एलपीजी सिलिंडर और केरोसिन सब्सिडी को कंपनियों के कंधों पर डालने की तैयारी

केंद्र सरकार केरोसिन और एलपीजी सिलिंडर की सब्सिडी को ओएनजीसी और इंडियन ऑयल कंपनी के कंधों पर डाल सकती है. नवभारत टाइम्स में सूत्रों के हवाले से छपी खबर के मुताबिक इस बारे में पेट्रोलियम मंत्रालय और इन कंपनियों के बीच बातचीत शुरू भी हो गई है. इस मुद्दे पर इन कंपनियों का कहना है कि अगर उन्हें सब्सिडी का पूरा पैसा नहीं मिला तो वे किस तरह इसका बोझ उठा सकते हैं. इससे पहले सरकार ने तेल की कीमतों में एक रुपए प्रति लीटर का बोझ भी तेल कंपनियों पर डाल रखा है. फिलहाल, केरोसिन पर प्रति लीटर 16 रुपए और एलपीजी सिलिंडर पर 373 रुपए की सब्सिडी दी जा रही है.

योजनाओं को लागू करने के लिए केंद्र के पास एक तंत्र होना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को अच्छी पहल बताने के साथ ही इसकी खामियों की ओर भी इशारा किया है. दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने कहा है कि वृद्धावस्था पेंशन सहित अन्य योजनाओं को लागू करने में बड़ा अंतर है, जिसे ख़त्म करने की जरूरत है. इससे संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने टिप्पणी की, ‘योजनाओं को लागू करने के लिए केंद्र के पास एक तंत्र होना चाहिए. इससे मालूम हो सकेगा कि कौन अधिकारी अपना काम सही तरीके से कर रहे हैं और कौन नहीं.’ वहीं, वृद्धावस्था पेंशन को लेकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह इसमें 200 रुपए प्रतिमाह से अधिक का योगदान नहीं कर सकती है.