गंगा नदी की साफ-सफाई के मुद्दे पर बीती 22 जून से अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल का गुरुवार को निधन हो गया है. वे 86 साल के थे. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. बताया जाता है कि जीडी अग्रवाल ने हरिद्वार में अनशन शुरू किया था. इसके चलते स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें बीते बुधवार को ऋषिकेश के एम्स में भर्ती कराया गया था. वे गंगा के स्वाभाविक प्रवाह को बनाए रखने, उसमें प्रदूषण रोकने, नदी किनारे अतिक्रमण हटाने और इन सब कामों के लिए एक विशेष कानून बनाने की मांग को लेकर अनशन कर रहे थे.

वहीं, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि गंगा की सफाई से संबंधित जीडी अग्रवाल की करीब-करीब सभी मांगों को स्वीकार कर लिया गया था. उनकी एक प्रमुख मांग गंगा की रक्षा के लिए कानून बनाने की थी. वह अब तक पूरी नहीं की जा सकी है. हालांकि प्रस्तावित कानून को मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा गया है. इसके बाद इसे संसद से पारित कराया जाएगा.

गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की सरकार की नीयत पर सवाल

साल 2002 के गुजरात दंगों को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की मंशा पर एक बार फिर सवाल खड़ा किया गया है. अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक उस वक्त भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा ‘द सरकारी मुसलमान’ में इस बारे में काफी-कुछ लिखा है. उन्होंने इस किताब में बताया है, ‘तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध करने के बावजूद गुजरात दंगों के दौरान वाहनों की प्रतीक्षा करते हुए सेना ने एक महत्वपूर्ण दिन गवां दिया. सेना एयर फील्ड पर वाहनों और जरूरी सामानों के लिए इंतजार करती रही. इस दौरान गुजरात जलता रहा. अगर ऐसा न होता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी.’ ज़मीरुद्दीन शाह की किताब गुजरात दंगों के दौरान सैन्य अभियान पर केंद्रित है.

सीएजी को अपनी सोच बदलने की जरूरत है : अरुण जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) पर अहम टिप्पणी की है. हिंदुस्तान में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने कहा है, ‘सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए उनके बही-खातों की ऑडिट करते वक्त नियंत्रक और महालेखा परीक्षक को अपनी सोच बदलने की जरूरत है. सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) से निजी क्षेत्र की कंपनियों की तरह तुरंत फैसले लेने की उम्मीद की जाती है. पीएसयू जिस माहौल में काम करते हैं, उसमें 1991 (उदारीकरण की शुरुआत) के बाद काफी बदलाव आया है.’

सीपीएम के दैनिक मुखपत्र देशारकथा का प्रकाशन हाई कोर्ट के आदेश के बाद फिर शुरू

त्रिपुरा में सीपीएम (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) का दैनिक मुखपत्र ‘देशारकथा’ 10 दिनों बाद गुरुवार से फिर छपने लगा है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक त्रिपुरा हाई कोर्ट ने इस बारे में बीते बुधवार को आदेश जारी किया था. इससे पहले बीती एक अक्टूबर को त्रिपुरा की भाजपा सरकार ने इस मुखपत्र के प्रकाशन पर रोक लगा दी थी. इस पर प्रेस और रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया था. वहीं, सीपीएम की पोलित ब्यूरो का कहना था कि पहले पश्चिमी त्रिपुरा के जिलाधिकारी ने मनगढ़ंत आधार पर अखबार की मान्यता रद्द कर दी. इसके बाद इस आधार पर रजिस्ट्रार ने भी इसके रजिस्ट्रेशन का प्रमाणपत्र वापस ले लिया.

इलाहाबाद कुंभ के लिए रेलवे द्वारा पहले की तुलना में चार गुना अधिक सरचार्ज वसूलने की तैयारी

अगले साल उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में आयोजित होने वाले कुंभ मेले के लिए रेलवे श्रद्धालुओं से टिकट किराए के साथ मेला सरचार्ज वसूलने की तैयारी में है. यह सरचार्ज 2013 के महाकुंभ की तुलना में चार गुना अधिक बताया जा रहा है. राजस्थान पत्रिका ने रेलवे से मिली जानकारी के हवाले से कहा है कि इसे अगले साल 14 जनवरी से चार मार्च तक मेला टिकट पर वसूला जाएगा. इस ख़बर के सामने आते ही रेलवे के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है. समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद नागेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह भाजपा सरकार के लिए जनविरोधी योजना साबित होगा. अगर इसे जल्द वापस नहीं लिया गया तो सड़क से लेकर संसद तक उनकी पार्टी संघर्ष करेगी.