रफाल लड़ाकू विमानों के सौदे को लेकर भारत में चल रहे आरोप-प्रत्यारोप की आंच फ्रांसीसी कंपनी- दसॉ एविएशन भी महसूस कर रही है. रफाल विमान मूल रूप से यही कंपनी बनाती है, जिसने भारत में इन विमानों के निर्माण के लिए उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी- रिलायंस डिफेंस को अपना साझीदार बनाया है. इसी को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. और संभवत: यही वज़ह है कि दसॉ भी अपनी तरफ से बार-बार स्थिति स्पष्ट कर रही है. जैसे कि अभी हाल में ही इस कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एरिक ट्रेपियर ने कहा है कि रफाल विमानों के मामले में रिलायंस डिफेंस के साथ हिस्सेदारी महज़ 10 फ़ीसदी की ही है.

ख़बरों के मुताबिक समाचार एजेंसी एएफपी को दिए साक्षात्कार के दौरान ट्रैपियर ने कहा, ‘भारतीय कानून के मुताबिक हमें ऑफसेट (सौदे के बड़े हिस्से का निवेश भारत में ही करने संबंधी) समझौते पर दस्तख़त करने थे. हमने वह समझौता किया भी. उसे पूरा करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं. लेकिन इस समझौते में हम किस साझीदार को अपने साथ जोड़ते हैं, यह पसंद हमारी है. हमने रिलायंस डिफेंस के साथ डीआरएएल (दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड) का गठन किया है. इसका संयुक्त उपक्रम का संयंत्र नागपुर में स्थापित किया है.’

उन्होंने आगे यह भी बताया, ‘रिलायंस डिफेंस के साथ हमारी साझेदारी अभी उस निवेश का 10 फीसदी हिस्सा ही है जाे हमें भारत में करना है. बाकी निवेश के लिए हम भारत की लगभग 100 कंपनियों से बात कर रहे हैं. इनमें से 30 के साथ अपनी साझेदारी को अंतिम रूप दे भी चुके हैं.’ ग़ौरतलब है कि रफाल विवाद के बीच ही इस वक़्त रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी फ्रांस में हैं. ख़बरों के मुताबिक उन्होंने वहां फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फ़्लोरेंस पार्ली के साथ विभिन्न मसलों पर विचार-विमर्श किया है.