‘मी टू’ अभियान के तहत लगाए जा रहे यौन शोषण व उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए केंद्र सरकार एक समिति का गठन करेगी. एनडीटीवी के मुताबिक शुक्रवार को इस बारे में केंद्रीय ​महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने कहा है, ‘इस समिति में सेवानिवृत्त जजों और कानूनी मामलों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा. यह समिति ‘मी टू’ के तहत लगाए गए आरोपों की जांच करेगी और फिर वह इन पर सुनवाई भी करेगी.’

मेनका गांधी ने यह भी कहा है, ‘शोषण का दर्द बयान करने वाली महिलाओं के सदमे को मैं अच्छी तरह समझ सकती हूं. यौन शोषण के मामलों में हमें जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की जरूरत है.’ इससे पहले बीते सोमवार को मेनका गांधी ने कहा था, ‘यौन शोषण की पीड़ित महिलाओं के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है कि वे 10-15 साल पुराने मामलों की शिकायतें भी दर्ज करवा सकती हैं.’ इसके साथ केंद्रीय मंत्री का यह भी कहना था कि उन्हें इस बात की खुशी है कि ‘मी टू’ अभियान की वजह से महिलाओं को यौन शोषण व उत्पीड़न जैसे अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने की ताकत मिली है.

भारत में ‘मी टू’ अभियान की शुरुआत बीते दिनों फिल्म अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर व निर्देशक विवेक अग्निहोत्री पर लगाए गए शोषण के आरोप से हुई थी. इस अभियान के शुरू होने के कुछ ही दिनों के भीतर फिल्म व टेलीविजन जगत के अलावा अनेक महिलाओं द्वारा मीडिया, लेखन, खेल जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों पर भी यौन शोषण और उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं.