उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती द्वारा खाली किया गया बंगला नए-नए बने समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के मुखिया शिवपाल यादव को दे दिया है. लखनऊ के लाल बहादुर शास्त्री मार्ग पर मुख्यमंत्री कार्यालय से थोड़े ही फासले पर बना यह बंगला बसपा सुप्रीमो मायावती को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खाली करना पड़ा था.

बीती सात मई को सु्प्रीम कोर्ट ने वह प्रावधान रद्द कर दिया था जो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला अपने कब्जे में रखे रहने का अधिकार देता था. इसके बाद अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव, मायावती, राजनाथ सिंह, नारायण दत्त तिवारी और कल्याण सिंह को अपने बंगले खाली करने पड़े थे.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक मायावती द्वारा खाली किए गए बंगले का अब शिवपाल को आवंटन उनकी और सत्ताधारी भाजपा की बढ़ती नजदीकियों के तौर पर देखा जा रहा है. कुछ समय पहले राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने कहा था कि अगर शिवपाल चाहें तो अपने मोर्चे का भाजपा में विलय कर सकते हैं.

अपने राजनीतिक मोर्चे के पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग के पास आवेदन किए हुए शिवपाल यादव को महीना भर ही हुआ है. इसलिए स्वाभाविक ही है कि सरकार के इस फैसले का विरोध हो रहा है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रमेश दीक्षित का कहना है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों को तो कार्यालय खाली करने के नोटिस दिए जा रहे हैं और दूसरी तरफ, एक पार्टी जो अभी बनी ही है, उसके नेता को बंगला आवंटित किया जा रहा है. उन्होंने भाजपा सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है.

उधर, प्रशासन ने इस फैसले का बचाव किया है. हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए एस्टेट ऑफिसर योगेश शुक्ला ने कहा कि शिवपाल वरिष्ठ राजनेता हैं और वे पांच बार विधायक भी रहे हैं. उनका कहना था, ‘वे श्रेणी छह के बंगले के पात्र हैं.’ उन्होंने यह भी बताया कि शिवपाल यादव ने भी सरकार के पास एक आवेदन कर अपने लिए सरकारी आवास की मांग की थी. उनके मुताबिक छह, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग खाली था जो उन्हें दे दिया गया