मई 2017 में कन्नड़ फिल्म की ग्लैमरस अभिनेत्री को सीधे राष्ट्रीय दल के प्रचार का काम सौंपा जाना अविश्वसनीय था. दिव्या स्पंदना ने खुद एक टीवी इंटरव्यू में बताया था कि जब राहुल गांधी ने उन्हें कांग्रेस का सोशल मीडिया प्रभारी बनाया तो वे चौंक गईं थीं. सुनी-सुनाई है कि उस वक्त कांग्रेस के कुछ पुराने नेताओं ने राहुल को आगाह किया था. उन्होंने दिव्या को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने से पहले उन्हें सोचने के लिए कहा था.

इन नेताओं की राय थी कि कि सोशल मीडिया का इंचार्ज किसी अनुभवी नेता को बनाया जाए और दिव्या स्पंदना उसके मातहत नंबर दो की हैसियत से काम करें. लेकिन राहुल गांधी का कहना था कि वे सोशल मीडिया में नई सोच देखना चाहते हैं. इसके बाद सभी ने मन-मसोसकर उनकी इस बात को मान लिया. उन्हें यह भी लगता था कि दिव्या जल्द ही फेल हो जाएंगी और वापस अपने घर कर्नाटक वापस लौट जाएंगी.

लेकिन अपने नए रोल में राम्या उर्फ दिव्या स्पंदना सुपरहिट रहीं. उन्होंने राहुल गांधी से लेकर कांग्रेस के पुराने-पुराने नेताओं को ट्विटर पर आने के लिए मनाया. जब दिव्या कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड बनीं थीं उस वक्त भाजपा बहुत आगे थी और इस क्षेत्र में सिर्फ आम आदमी पार्टी ही थी जो भाजपा का कुछ हद तक मुकाबला कर रही थी. दिव्या ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब उन्होंने काम संभाला तो एकदम नई पटकथा की जरूरत थी जिसमें शब्द चुटीले हों और संवाद एकदम साफ. उन्होंने बहुत कम वक्त में सोशल मीडिया के फील्ड में अपनी पार्टी को कामयाबी दिलाई.

दिव्या के टीम के एक सदस्य के मुताबिक ‘राम्या जब हेड बनीं तब 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर एक कमरे, कुछ कुर्सियां और दो-तीन कंप्यूटर के अलावा सोशल मीडिया के नाम पर कांग्रेस में कुछ नहीं था. लेकिन अब पूरी टीम है, लाखों फॉलोअर्स हैं. जो नेता कुछ साल पहले ट्विटर पर आने से हिचकते थे, सोशल मीडिया के नाम से भागते थे, वो अब खुद फोन करते हैं और कहते हैं कि उनकी बात कही जाए, उनके ट्वीट को री-ट्वीट कर दिया जाए’.

लेकिन इसके बाद भी जब राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए अपनी कोर टीम बनाई तो उसमें दिव्या स्पंदना का नाम नहीं था. राहुल की टीम में रणदीप सुरजेवाला हैं, जयराम रमेश हैं, मार्गेट अल्वा के बेटे निखिल अल्वा हैं लेकिन दिव्या नहीं. ऐसा क्या हुआ कि दिव्या स्पंदना को इस तरह किनारे कर दिया गया?

खबर जो उड़ी वह यह है कि दिव्या स्पंदना ने एक वाट्सएप ग्रुप बनाया था जिसमें उन्होंने राहुल गांधी, रनदीप सुरजेवाला, निखिल अल्वा और आनंद शर्मा को शामिल किया था. इस ग्रुप का मकसद राहुल गांधी के सोशल मीडिया अकाउंट पर चर्चा करना था. कहा गया कि इस ग्रुप से राहुल गांधी ने एक्जिट कर लिया. इसके बाद आनंद शर्मा और सुरजेवाला भी इससे बाहर आ गए.

जब इस कथित ग्रुप के बारे में गहराई से बातचीत हुई तो पता चला कि कभी ऐसा ग्रुप बना ही नहीं था जिसके सदस्य खुद राहुल गांधी थे. कांग्रेस के वॉर रूम में काम करने वाले एक सदस्य बताते हैं कि दिव्या स्पंदना इतनी भी बच्ची नहीं हैं कि राहुल गांधी ट्विटर पर क्या लिखेंगे यह बात वाट्सअप ग्रुप में बताया जाएगा. अगर इस ग्रुप का एक स्क्रीन शॉट भी बाहर आ जाएगा तो पूरी दुनिया में वायरल हो जाएगा. इसलिए ऐसा कभी कोई ग्रुप नहीं बना जिसके मेंबर खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हों.

मीडिया में एक और खबर छापी गई - राहुल गांधी के विदेश दौरे की कुछ तस्वीरें कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम ने डाली जो ऐसी थीं कि इन्हें री-ट्वीट कर राहुल का मजाक उड़ाया. लेकिन जब इन तस्वीरों के बारे में दूसरा पक्ष सुनेंगे तो वह भी तर्कसंगत लगता है. सुनी-सुनाई है कि ये तस्वीरें राहुल के साथ गए नेताओं ने ही भेजी थीं और सोशल मीडिया की टीम से कहा गया कि इन्हें ट्विटर और फेसबुक पर डाल दिया जाए. उस वक्त दिव्या दफ्तर में नहीं थीं और उनसे संपर्क भी नहीं हो पा रहा था. आदेश सीधे ऊपर से आया था तो सोशल मीडिया टीम में काम करने वाले सदस्यों ने उन तस्वीरों को पोस्ट कर दिया.

इसके बाद जब वर्धा में राहुल गांधी ने कांग्रेस के बड़े नेताओं की बैठक की तो उसमें दिव्या स्पंदना शामिल नहीं थीं. वहां रणदीप सुरजेवाला ही प्रचार की कमान संभाल रहे थे. दिव्या की सोशल मीडिया टीम को भी इसके बारे में ज्यादा खबर नहीं दी गई. कहा जाता है कि यही बात दिव्या को बुरी लगी और उन्होंने अपनी नाराजगी जगजाहिर कर दी. उन्होंने तीन अक्टूबर को अपने ट्विटर अकाउंट से कांग्रेस के साथ जुड़े होने वाला अपना परिचय हटा दिया.

हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस से अलग होने की खबरों का खंडन किया और वे कांग्रेस का सोशल मीडिया विभाग भी संभाल रही हैं. कुछ पत्रकारों के साथ बातचीत में भी दिव्या का कहना था कि वे कांग्रेस में ही रहेंगी और बहुत मुमकिन है कि कर्नाटक से अगला लोकसभा चुनाव भी लड़ें.

लेकिन क्या जल्द ही उन्हें राहुल की कोर टीम में शामिल किया जा सकता है?

वर्धा से लेकर दिल्ली तक राहुल गांधी की बैठकों में शामिल रहने वाले एक नेता अंदर की बात कुछ इस अंदाज़ में बताते हैं – ‘कांग्रेस की कोर टीम को लगता है कि दिव्या को किसी सीनियर के मार्गदर्शन में काम करना चाहिए. दिव्या की सोच नई है लेकिन कभी-कभी वो कुछ रिस्की फैसले करती हैं. जब तक काग्रेस की सोशल मीडिया विंग कमजोर थी तब तक कोई बात नहीं थी. लेकिन अब चुनाव भी नजदीक हैं. कांग्रेस के एक-एक ट्वीट और राहुल गांधी की एक-एक तस्वीर को भाजपा बहुत ध्यान से पढती और देखती है. पूरी ट्रोल आर्मी की नजर उस पर रहती है.’

राहुल की कोर टीम के एक बड़े नेता कहते हैं, ‘दिव्या में प्रतिभा है ये सब मानते हैं, लेकिन उनका व्यवहार बचकाना है. फिल्मों में ऐसा चल जाता है लेकिन नेतागीरी में आपको हर कदम फूंक-फूंककर रखना पड़ता है. दिव्या नए जमाने की हैं लेकिन कांग्रेस अब भी पुराने स्टाइल की पार्टी है.’

इसलिए फैसला हुआ है कि दिव्या स्पंदना की सोशल मीडिया टीम अब सेंसर बोर्ड के तहत काम करेगी और वहां पूरी तरह से उनकी मनमर्जी नहीं चलेगी. दिव्या यह बात जितनी जल्दी समझ लें उनके लिए अच्छा है और पार्टी के लिए भी. कांग्रेस को दिव्या की जरूरत है और दिव्या को कांग्रेस की.