केंद्र सरकार ने ‘#मी टू’ अभियान के तहत लगाए जा रहे यौन शोषण और उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित किए जाने का ऐलान किया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. शुक्रवार को केंद्रीय ​महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने कहा, ‘इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और कानूनी मामलों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा. यह समिति तमाम आरोपों की जांच करेगी और फिर इन पर सुनवाई भी करेगी.’ इससे पहले बीते सोमवार को उन्होंने कहा था, ‘यौन शोषण की पीड़ित महिलाओं के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है कि वे 10-15 साल पुराने मामलों की शिकायतें भी दर्ज करवा सकती हैं.’

यौन शोषण के मामलों में तमिलनाडु के राज्यपाल का नाम जोड़े जाने पर राजभवन की तीखी प्रतिक्रिया

तमिल पत्रिका नक्कीरन के एक लेख में यौन शोषण के मामलों में तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित का नाम जोड़े जाने पर राजभवन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. दैनिक जागरण के मुताबिक राजभवन ने एक बयान में कहा है कि संवैधानिक पद पर बैठे ‘राज्यपाल जैसे प्रतिष्ठित लोगों का अपमान कर उन्हें डराने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी.’ राजभवन ने यह प्रतिक्रिया मदुरई के कामराज विश्वविद्यालय से जुड़े एक मामले में दी है. ख़बरों में सामने आया था कि विश्वविद्यालय से संबद्ध अरुपुकोट्टई कॉलेज की सहायक प्रोफेसर निर्मला देवी छात्राओं को परीक्षा में अच्छे नंबरों के बदले अधिकारियों से यौन संबंध बनाने के लिए दबाव डालती थीं.

इस ख़ुलासे के बाद निर्मला देवी को ग़िरफ़्तार कर लिया गया. वहीं नक्कीरन पत्रिका ने इसी मामले में राज्यपाल और उनके अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी संदेह के घेरे में खड़ा किया था. वे नौ अक्टूबर को कामराज विश्वविद्यालय के दौरे पर थे. जबकि राजभवन का कहना है कि राज्यपाल का निर्मला देवी के साथ कोई संपर्क नहीं रहा है और विश्वविद्यालय में रुके भी नहीं थे. इस मामले में राजभवन की शिकायत पर तमिलनाडु पुलिस नक्कीरन के संपादक आरआर गोपाल को ग़िरफ़्तार भी कर चुकी है.

इलाज के लिए क्षेत्र के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव स्वीकार नहीं : दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने जीटीबी (गुरु तेग बहादुर) अस्पताल में पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य के लोगों के लिए 80 फीसदी बिस्तर आरक्षित करने संबंधी सर्कुलर को खारिज कर दिया है. इससे दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले दूसरे राज्यों के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. अमर उजाला के मुताबिक अदालत ने कहा है कि इलाज के लिए क्षेत्र के आधार पर लोगों के बीच विभाजन स्वीकार नहीं किया जा सकता. साथ ही, हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार के इस फैसले को भेदभावपूर्ण भी करार दिया. वहीं, दिल्ली सरकार की ओर से वकील राहुल मेहरा ने अदालत को बताया कि दिल्लीवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है. यह सरकार की नीति है. अदालत इसमें दखल नहीं दे सकती. लेकिन अदालत ने ये दलीलें ख़ारिज़ कर दीं. इसके बाद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है.

न्यायपालिका में भी बड़े पैमाने पर महिलाओं के शोषण की घटनाएं हो रही हैं : न्यायाधीश बॉम्बे हाई कोर्ट

बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश गौतम पटेल ने #मी टू अभियान का समर्थन करते हुए न्यायपालिका में भी महिलाओं का शोषण किए जाने की बात कही है. नवभारत टाइम्स के मुताबिक उन्होंने कहा है, ‘न्यायपालिका में भी बड़े पैमाने पर महिलाओं के शोषण की घटनाएं हो रही हैं. हालांकि, पुरुषों के पास ताकत होने की वजह से ये बातें सामने नहीं आ पा रही हैं.’ उन्होंने यह भी कहा कि अत्याचार की शिकायत का वक्त ज़्यादा मायने नहीं रखता. इसके बावज़ूद गंभीर समस्या ये है कि महिलाएं आगे क्यों नहीं आतीं?’

एएमयू के दो छात्रों सहित 40 अन्य पर राजद्रोह का मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के दो छात्रों सहित 40 अन्य पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. इन पर देशविरोधी नारेबाजी करने का आरोप है. हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक आरोपित छात्र वसीम अय्यूब मलिक और अब्दुल हसीद मीर ने कश्मीर में मुठभेड़ में मारे गए एएमयू से निष्कासित छात्र मन्नान वानी के समर्थन में नमाज-ए-जनाजा पढ़ने की कोशिश की. साथ ही, नारेबाजी भी की. बताया जाता है कि शुक्रवार को इसका वीडियो वायरल होने और सुरक्षा एजेंसियों से सूचना मिलने पर प्रशासन को अलर्ट किया गया है. साथ ही, प्रशासनिक अधिकारियों ने विश्वविद्यालय से पूरी घटना का ब्योरा भी तलब किया है.