अमेरिका ने चीन को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की क्षमता पर सवाल उठाया है. उसने कहा है कि चीन की अर्थव्यवस्था डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप नहीं है. अमेरिका के मुताबिक यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठन अपने मौजूदा स्वरूप में चीन की औद्योगिक नीति से निपटने में सक्षम नहीं है.

पीटीआई की खबर के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन चाहता है कि चीन को विकासशील देश के रूप में नए सिरे से परिभाषित किया जाए. उसका कहना है कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद चीन अब भी विकासशील देशों की श्रेणी में आता है और इस कारण उसे डब्ल्यूटीओ के अंतर्गत कुछ लाभ हासिल हो जाते हैं. इस मुद्दे पर अमेरिका के उप-व्यापार प्रतिनिधि और डब्ल्यूटीओ में देश के राजदूत डेनिस शीया ने कहा, ‘बहुत से देशों ने डब्ल्यूटीओ में खुद को विकासशील देश बताया है. इससे उन्हें अतिरिक्त लाभ मिल रहे हैं और नियमों से छूट प्राप्त है. (लेकिन) जब आप इनमें से कुछ देशों को देखते हैं तो आपको ताज्जुब होता है कि वे (क्यों) डब्ल्यूटीओ में खुद को विकासशील बताते हैं.’

शीया ने कहा कि अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि बॉब लाइटहाइजर ने दिसंबर में ब्यूनस आयर्स में हुए अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाया था. उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर डब्ल्यूटीओ में वास्तविक बहस हो रही है कि क्या विकासशील देशों के अंतर को अधिक स्पष्ट तरीके से परिभाषित किये जाने की जरूरत है. डेनिस ने अन्य देशों से इन मुद्दों को उठाने का आह्वान करते हुए कहा, ‘हमें यह समझने की जरूरत है कि चीन की अर्थव्यवस्था डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप नहीं है.’