गुजरात में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों पर हमले इस समय देश के सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर लोग गुजरात की आलोचना कर रहे हैं और उन लोगों की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं जो डर के मारे गुजरात छोड़ कर जा रहे हैं. लेकिन कई वीडियो और तस्वीरें ऐसी हैं जिनका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है. उन्हें केवल हिट्स और लाइक्स पाने के मक़सद से शेयर किया जा रहा है.

हाल में ऐसी कई तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोगों को ट्रेन पकड़ते दिखाया गया है. सोशल मीडिया की फ़र्ज़ी ख़बरों का सच बताने वाली कई वेबसाइटों ने इन्हें फ़र्ज़ी बताया है. हालांकि तस्वीरें इतनी ज़्यादा हैं कि सभी का सच बता पाना संभव नहीं है. फिर भी जहां तक संभव हो लोगों को इन तस्वीरों की असली कहानी बताई जानी चाहिए.

सत्याग्रह को भी गुजरात में यूपी-बिहार के लोगों पर हुए हमलों के मामले से जुड़ी एक तस्वीर मिली है. इसमें कई लोगों को एक मालगाड़ी में जाते दिखाया गया है. दावा है कि ये बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग हैं जो हमले के डर से गुजरात छोड़ कर जा रहे हैं. इस तरह के पोस्टों के कैप्शन में बताया गया है, ‘इस ट्रेन को ग़ौर से देखिए. ये ट्रेन कोई भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आने वाली ट्रेन नहीं है. यह ट्रेन मोदी सरकार के राज्य गुजरात से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व बिहार जा रही है. अगर फिर भी यूपी-एमपी और बिहार के भाजपा-कांग्रेस समर्थक को शर्म नहीं आती तो उसे डूब मरना चाहिए.’

लेकिन क्या सच में इस तस्वीर में दिख रहे लोग गुजरात छोड़ने वाले यूपी-बिहार के लोग हैं. इस बारे में गूगल करने पर अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की एक रिपोर्ट का पता चलता है. उसमें इस तस्वीर को देखा जा सकता है. यह रिपोर्ट फ़रवरी 2011 की है. यानी सात साल पुरानी. सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे को झुठलाने के लिए यह काफ़ी हैं. लेकिन जान लेते हैं कि इस तस्वीर का संबंध किस घटना से हैं.

रिपोर्ट से पता चलता है कि दरअसल यह तस्वीर गुजरात की नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के बलिया की है. फ़रवरी 2011 में वहां भारत-तिब्बत पुलिस बल की भर्ती के लिए कैंप लगे थे. तब देश भर से उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए वहां पहुंच गए थे. उनकी संख्या इतनी ज़्यादा थी कि कई उम्मीदवार ट्रेनों की छतों पर बैठ कर पहुंचे थे. जब ट्रेनें स्टेशन पहुंचीं तो उतरने की जल्दी में वहां अफ़रा-तफ़री मची गई. इसी दौरान दो ट्रेनों की छत से कुछ उम्मीदवार गिर पड़े. रिपोर्ट के मुताबिक़ इस भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी. बाद में तत्कालीन केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा रेलवे प्रबंधन एक दूसरे को दोष देते रहे. वहीं, पीटीआई ने घटना के बाद बरेली रेलवे स्टेशन के हालात की यह तस्वीर ली थी. यानी साफ़ है कि इसका गुजरात से कोई संबंध नहीं है.