साहित्य का प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार इस साल लेखिका एना बर्न्स को मिला है. यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली एना बर्न्स उत्तरी आयरलैंड की पहली लेखिका हैं. एना बर्न्स को यह पुरस्कार उनके तीसरे उपन्यास ‘मिल्कमैन’ के लिए दिया गया है. यह उपन्यास एक 18 वर्षीय युवती पर आधारित है, जिसका एक अधेड़ उम्र का शख्स शारीरिक और मानसिक रूप से शोषण करता है.

इस पुरस्कार के निर्णायक मंडल में शामिल क्वाम एंथोनी एपिया कहती हैं कि उन्होंने ‘पहले कभी ऐसी किताब नहीं पढ़ी. इस किताब में क्रूरता और यौन शोषण को खामोशी व दर्द के साथ पेश किया गया है जो तीखे व्यंग्य के साथ उसका प्रतिरोध भी करती है.’ पुरस्कार मिलने के बाद एक पत्रकार वार्ता में एना बर्न्स ने कहा कि वे हमेशा इंतजार करती हैं कि उनके किरदार खुद उन्हें कहानी सुनाएं. इस दौरान जब उनके पूछा गया कि पुरस्कार के तहत मिलने वाले 50 हजार यूरो (लगभग 42,44,087 रुपए) की राशि का वे क्या करेंगी तो उन्होंने सीधा जवाब दिया, ‘इससे अपना कर्ज चुकाऊंगी. जो बचेगा उससे गुजर-बसर करूंगी.’

मैन बुकर पुरस्कार की शुरुआत साल 1969 में हुई. यह पुरस्कार किसी भी देश के अंग्रेजी के उन लेखकों को दिया जाता है जिनकी किताब यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) और आयरलैंड में प्रकाशित हुई हो. इस साल ‘एवरीथिंग अंडर’ के लिए डेजी जॉनसन, और ‘द लॉन्ग टेक’ के लिए रॉबिन रॉबर्टसन, ‘द मार्स रूम’ के लिए रशेल कुशनेर, ‘द ओवरस्टोरी’ के लिए रिचर्ड पावर और ‘वॉशिंगटन ब्लैक’ के लिए कनाडा के लेखक एसी एडुग्यान को पुरस्कार के लिए नामित किया गया था.