जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में नक्सलवाद तेजी से फैल सकता है. यह दावा स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (सीपरी) की सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया गया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में जलवायु परिवर्तन के हिंसक परिणाम सामने आ सकते हैं. ऐसे में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और अफगानिस्तान में हिंसावादी ताकतें इसका फायदा उठा सकती हैं. भारत में नक्सलवादी गुटों का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट कहती है कि इन विषम परिस्थितियों में नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में हथियारबंद विद्रोह को बढ़ावा मिल सकता है.

सीपरी से जुड़े शोधकर्ताओं पेर्निला नॉर्दक्विस्ट और फ्लोरियन क्राम्पे ने मिलकर इस रिपोर्ट को तैयार किया है. इनके शोध के अनुसार संसाधनों की कमी के चलते इन सभी इलाकों में विषम परिस्थितियां बनेंगी. यह रिपोर्ट कहती है कि जलवायु परिवर्तन इसी गति से होता रहा तो एक समय के बाद संसाधन इतने सीमित हो जाएंगे कि उन संसाधनों पर वर्चस्व और उनके बंटवारे के लिए हिंसा शुरू होगी. ऐसे में कई विकासशील देशों में स्थापित विद्रोही ताकतें इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेंगी. और इसकी आशंका खासतौर पर उन देशों में ज्यादा है जहां अधिकतर लोगों का जीवन कृषि या मछली पालन पर निर्भर करता है.

इस रिपोर्ट के सह लेखक फ्लोरियन क्रांपे ने इंडियास्पेंड से बात करते हुए बताया कि विद्रोही गुट ऐसे समय में हिंसा का सहारा लेकर किसानों को उनके खेतों से बेदखल कर सकते हैं ताकि वे अपने लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें. ऐसा होने की सबसे अधिक आशंका सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में है जहां तक पुलिस-प्रशासन की पहुंच नहीं है. और वहां के लोगों को सुरक्षा के लिए इन्हीं विद्रोही गुटों पर निर्भर रहना पड़ता है. रिपोर्ट के अनुसार ऐसी स्थिति में इन गुटों के लिए लड़ाकों को भर्ती करना और भी आसान हो जाता है.

इसके अलावा रिपोर्ट कहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में हालत बदतर होने की सूरत में लोग शहरों की तरफ पलायन करेंगे. इसके चलते शहरों में भी भीड़ बढ़ेगी और वहां भी संसाधनों में कमी आएगी. यह स्थिति शहरों में सामाजिक असमानता को बढ़ावा देगी. यहां धनी लोग लोग संसाधनों और अपने से निचले तबके के लोगों का बेजा दोहन करेंगे. ऐसे में वे शहर जहां सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता कम है, वहां लोगों के बीच विद्रोहियों का समर्थन बढ़ेगा. यह रिपोर्ट त्रिपुरा में हुए हालिया दंगों के हवाले से यह बात कहती है.

पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्था इंटरगवर्मेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) ने एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें बताया गया था कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण 2030 तक सामान्य तापमान में डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है. इसके चलते ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगे और तटीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक संसाधनों की मारामारी शुरू हो जाएगी. इस रिपोर्ट में भी जलवायु परिवर्तन के चलते सामाजिक अस्थिरता बढ़ने को लेकर आशंका जताई गई है.