सऊदी अरब के चर्चित पत्रकार जमाल खशोगी बीते दो हफ्ते से लापता हैं. खबरों के मुताबिक दो अक्टूबर को तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्यक दूतावास में घुसने के बाद से उन्हें नहीं देखा गया है. तुर्की के अधिकारियों को शक है कि दो अक्टूबर को दूतावास के अंदर ही सऊदी के अधिकारियों ने जमाल की हत्या कर दी थी. हालांकि, सऊदी सरकार ने इन आरोपों का खंडन करते हुए इन्हें झूठा और निराधार बताया है.

59 वर्षीय जमाल खशोगी का जन्म सऊदी के धार्मिक शहर मदीना में हुआ था. अपनी शुरूआती शिक्षा सऊदी में ही पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए थे. 1983 में अमेरिका की इंडिआना विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद खशोगी ने पेशे के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र को चुना. वे पहली बार तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने अफगानिस्तान में सोवियत संघ की सेनाओं और मुजाहिदीनों के बीच हुए संघर्ष की रिपोर्टिंग की थी. उन्हें एक ऐसे पत्रकार के रूप में भी जाना जाता था जिसने उस समय अलकायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन का कई बार साक्षात्कार लिया था जब अमेरिका और यूरोपीय देश उसकी तलाश में थे.

इसके बाद साल 2003 में जमाल खशोगी को सऊदी अरब के सबसे चर्चित अखबार अल-वतन का संपादक चुना गया. लेकिन, अपने क्रांतिकारी रवैय्ये के चलते खशोगी इस पोस्ट पर ज्यादा तक नहीं टिक सके. सऊदी सरकार और वहां के धर्मगुरुओं के तौर-तरीकों की आलोचना करने की वजह से दो महीने बाद ही उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ गया.

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की नीतियों के मुखर आलोचक जमाल खशोगी सऊदी अरब से निर्वासन के बाद बीते करीब एक साल से अमेरिका में रह रहे थे. इस दौरान वे नियमित रूप से चर्चित अखबार ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में कॉलम लिख रहे थे जिसमें वे सऊदी सरकार की नीतियों की आलोचना किया करते थे. उन्होंने पिछले साल बिन सलमान द्वारा राजकुमारों, मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों को जेल में डालने के पीछे की कहानी को दुनिया के सामने उजागर किया था.

जमाल सऊदी अरब द्वारा यमन में छेड़े गए युद्ध और कतर पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ भी लिख रहे थे. उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल में डालने और लेबनान के प्रधानमंत्री के अपहरण को लेकर भी बिन सलमान को कठघरे में खड़ा किया था. वाशिंगटन पोस्ट जैसे अखबार में लिखे उनके लेखों को पूरी दुनिया में पढ़ा जाता था और बताते हैं कि यही बात मोहम्मद बिन सलमान और उनके सिपहसालारों को काफी ज्यादा अखरती थी.

पत्रकार जमाल खशोगी | फोटो : रॉयटर्स
पत्रकार जमाल खशोगी | फोटो : रॉयटर्स

जमाल खशोगी यह बात अच्छे से जानते थे कि उनके लेखन की वजह से उनकी जान को खतरा है, उन्होंने इसे सार्वजनिक रूप से कई बार स्वीकार भी किया था. लापता होने से तीन दिन पहले ही बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने ऐसी आशंका जताते हुए सऊदी अरब वापस न जाने की बात कही थी. उनका कहना था, ‘मैंने सऊदी अरब में अपने एक दोस्त को जेल में डाले जाने की बात सुनी है. इसके बाद से मेरा मानना है कि मुझे वहां नहीं जाना चाहिए...मेरे उस दोस्त ने तो कुछ किया भी नहीं था जबकि, मैं तो खुलेआम बोल रहा हूं.’ उनका आगे कहना था, ‘सऊदी अरब में आजकल यह सब हो रहा है.... जबकि हम इसके आदी नहीं हैं.’

आइये जानते हैं जमाल खशोगी के गायब होने और इसके बाद से अब तक इस मामले में हुई प्रगति के बारे में

मंगलवार दो अक्टूबर

बीती दो अक्टूबर को जमाल खशोगी दिन में एक बजे के करीब इस्तांबुल स्थित सऊदी के वाणिज्यक दूतावास के अंदर गए थे. उनके करीबियों के मुताबिक वे तुर्की में रहने वाली अपनी मंगेतर हैतिस संगीज से शादी करना चाहते थे और इसी से जुड़े कुछ कागजात लेने वे सऊदी दूतावास गए थे. हैतिस के मुताबिक जमाल ने इसके लिए पहले से आवेदन किया था और एक अधिकारी द्वारा बुलाए जाने के बाद ही वे दूतावास गए थे.

हैटिस के मुताबिक वे जमाल का कई घंटे तक दूतावास के बाहर इंतजार करती रहीं लेकिन वे बाहर नहीं आए. जमाल के दोनों मोबाइल भी हैतिस के पास ही थे इस वजह से वे उनसे संपर्क भी नहीं कर पा रहीं थीं. कई घंटे इंतजार करने के बाद हैतिस ने तुर्की पुलिस को फोन किया. तुर्की पुलिस के मुताबिक उसने दूतावास के बाहर लगे कैमरे की फुटेज शाम को साढ़े पांच बजे देखी जिससे साफ़ हो गया कि जमाल खशोगी दूतावास से बाहर नहीं निकले हैं.

बुधवार तीन अक्टूबर

मामला बढ़ने के बाद अगले दिन सुबह सऊदी अरब की सरकार ने एक बयान जारी कर जमाल खशोगी के लापता होने की बात कही. इस बयान में यह भी कहा गया कि खशोगी अपने कागजात लेने के बाद सऊदी के दूतावास से निकल गए थे और इसके बाद ही वे लापता हुए हैं.

सऊदी सरकार के इस बयान का जमाल की मंगेतर हैतिस संगीज और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन की ओर से खंडन किया गया. एर्दोआन के प्रवक्ता का साफ़ कहना था, ‘पत्रकार जमाल खशोगी अभी भी सऊदी दूतावास के अंदर ही हैं. हम दूतावास के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि यह मामला जल्द ही सुलझ जाएगा.’

गुरूवार चार अक्टूबर

चार अक्टूबर को तुर्की की सरकार ने राजधानी अंकारा में सऊदी के राजदूत को इस मामले पर बात करने के लिए तलब किया. इसी दिन वाशिंगटन पोस्ट की ओर से भी जमाल खशोगी के गायब होने पर चिंता व्यक्त की गई. वाशिंगटन पोस्ट के संपादकीय विभाग के प्रमुख फ्रेड हिएट ने एक बयान जारी कर कहा, ‘जमाल के गायब होने के बाद हमने इस मामले को लेकर अमेरिका, तुर्की और सऊदी अरब तीनों देशों के अधिकारियों से बात की है लेकिन अभी तक जमाल का कुछ पता नहीं लगा है.’

शुक्रवार पांच अक्टूबर

पांच अक्टूबर की सुबह यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व के अखबारों में यह खबर प्रमुखता से छपने के बाद सऊदी सरकार पर भारी दबाव बन गया. इसके बाद उसने तुर्की के अधिकारीयों को अपने दूतावास में तलाशी लेने की अनुमति दे दी. एक अखबार को दिए साक्षात्कार में क्राउन प्रिंस बिन सलमान का कहना था, ‘हालांकि, दूतावास हमारा संप्रभु क्षेत्र है. फिर भी हम तुर्की के अधिकारियों को वहां घुसने और तलाशी लेने की इजाजत दे रहे हैं क्योंकि हमारे पास कुछ भी छिपाने को नहीं है.’

शनिवार छह अक्टूबर

छह अक्टूबर को तुर्की के पुलिस अधिकारियों ने दूतावास में छानबीन की. इसके बाद इसी दिन शाम को पुलिस ने एक सनसनीखेज बयान जारी किया. इसमें कहा गया, ‘हमारे पुलिस अधिकारियों का शुरूआती जांच के आधार पर यह मानना है कि पत्रकार जमाल खशोगी को दो अक्टूबर को ही सऊदी वाणिज्यक दूतावास में मार दिया गया था.’ एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर अमेरिकी मीडिया को बताया, ‘हम पूरे विश्वास के साथ कह रहे हैं कि जमाल खशोगी की हत्या पूर्वनियोजित थी. दूतावास में मारने के बाद जमाल के शव को कहीं और ठिकाने लगा दिया गया.’ हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इस बात को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया जा रहा है.

रविवार 14 अक्टूबर

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी. अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीबीएस न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ‘हमने सऊदी के प्रमुख सलमान से इस पर बात की है और उन्होंने आरोपों से इंकार किया है.’ वह आगे कहते हैं, ‘अब इस मामले की गहराई से पूरी जांच की जायेगी और अगर इसमें सऊदी के अधिकारियों का दोष पाया जाता है तो यह मुझे बेहद नाराज करने वाला होगा.’ ट्रंप के मुताबिक जमाल खशोगी की हत्या में सऊदी अरब का हाथ होने की बात साबित होने पर उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे.

सोमवार 15 अक्टूबर

अमेरिका की प्रतिक्रिया आने के बाद सऊदी के क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन से फोन पर बात की. इसके बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय की ओर से घोषणा की गई कि सऊदी के वाणिज्यक दूतावास का गहराई से निरीक्षण किया जाएगा और इस जांच में तुर्की और सऊदी अरब दोनों ही देशों के अधिकारी शामिल होंगे.

मंगलवार 16 अक्टूबर

इस निरीक्षण के अगले दिन इसके बारे में तुर्की के राष्ट्रपति ने देश की संसद में एक बयान दिया. इसमें उनका कहना था, ‘ इस मामले में कई चीजों पर गौर किया जा रहा है. सऊदी वाणिज्यक दूतावास की दीवारों और फर्श पर कोई जहरीला पदार्थ भी था जिसके ऊपर पेंट किया गया है. हमारे जांचकर्ता इस जहरीले पदार्थ का पता लगा रहे हैं. हमें आशा है कि हम जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंच जाएंगे.’

एर्दोआन के इस बयान के बाद तुर्की के अधिकारियों ने सऊदी के वाणिज्यिक दूतावास के प्रमुख मोहम्मद अल-ओताबी के घर की तलाशी लेने का निर्णय किया. इसके कुछ घंटे बाद ही खबर आई कि ओताबी तुर्की छोड़कर चले गए हैं.