मध्य प्रदेश के सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता का कहना है कि राज्य में एंटी-इनकम्बेंसी कारक को देखते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी अपने 70 से 80 मौजूदा विधायकों के टिकट काटने पर विचार कर रही है. एनडीटीवी के मुताबिक इन विधायकों में कुछ मंत्री भी शामिल हैं जिनके प्रति राज्य के लोगों में काफी नाराजगी है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन विधायकों के प्रति लोगों की नाराजगी के बारे में राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के दौरान जानकारी मिली थी.

इसके अलावा ताजा ओपीनियन पोल के नतीजों में कांग्रेस का 15 साल बाद मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी करने के अनुमान को भी इस भाजपा की इस सोच की एक वजह माना जा रहा है. हालांकि इस बारे में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमा) के एक पदाधिकारी का कहना है कि लोगों में पार्टी के कुछ विधायकों को लेकर नाराजगी जरूर है, लेकिन राज्य में शिवराज सिंह की लोकप्रियता अब भी पहले की ही तरह कायम है. उनका यह भी कहना है कि अगर पार्टी इस चुनाव में कुछ नए चेहरों को उतारती है तो भाजपा के लिए राज्य की सत्ता में वापसी की राह आसान बन सकती है.

मध्य प्रदेश में अगले महीने की 28 तारीख को विधानसभा के चुनाव होने हैं जबकि 11 दिसंबर को मतगणना के बाद नतीजों की घोषणा की जानी है. इससे पहले 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने 25 फीसदी नए चेहरों को शामिल करते हुए 75 प्रतिशत तत्कालीन विधायकों पर ही दांव खेला था. तब 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा को 165 सीटें हासिल करने में सफलता मिली थी. कांग्रेस उस चुनाव में 58 जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) चार सीटें जीतने में सफल हुई थी. एक सीट निर्दलीय विधायक के खाते में भी गई थी.