कुछ ग़ैरभाजपाशासित राज्यों के साथ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के टकराव की ख़बरें जब-तब आती रहती हैं. ये सरकारें मोदी सरकार पर अक़्सर उसके कामकाज़ में दख़लंदाज़ी के आरोप लगाती हैं. और इस वक़्त सूत्रों के हवाले से आई ख़बर की मानें तो यह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार की एक कोशिश आरोप-प्रत्यारोप और टकराव का यह सिलसिला बढ़ा सकती है.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार मोदी सरकार सभी राज्यों की राजधानियों में केंद्रीय सचिवालय स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है. इन सचिवालयों में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी बैठेंगे, जो सीधे संबंधित राज्यों में केंद्रीय योजनाओं पर अमल किए जाने की प्रगति पर निगरानी रखेंगे. राज्यों के साथ तालमेल बिठाएंगे. उनकी परेशानियों को दूर करने की कोशिश करेंगे. इन कामों के बाबत सीधे राज्य की जनता के संपर्क में भी रहेंगे.

सूत्रों की मानें तो कई राज्यों में केंद्रीय मंत्रालयों के अफसरों के लिए अभी उपयुक्त जगह नहीं है. राजधानी केंद्रीय सचिवालय स्थापित किए जाने के बाद यह समस्या भी दूर हो जाएगी. राज्यों की राजधानियों में केंद्र के सचिवालय बनने के बाद करीब-करीब सभी केंद्रीय मंत्रालयों से संबंधित प्रतिनिधि अफसरों का ठिकाना यही होगा. अभी राज्यों के अलग-अलग शहराें में ये दफ़्तर स्थित होते हैं, जिससे समय और धन की बर्बादी भी बहुत ज़्यादा होती है.

अख़बार से बातचीत में केंद्रीय लाेकनिर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर इसकी पुष्टि करते हैं. वे कहते हैं, ‘सरकार के स्तर पर चर्चा के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से इस संबंध में प्रस्ताव सीपीडब्ल्यूडी के पास आया है. इसके बाद से हम यह पता लगा रहे हैं कि विभिन्न राज्यों में केंद्र के किन-किन विभागों ने अपने दफ्तरों के लिए जगह की मांग की है. और यह भी कि कुल कितनी जगह की आवश्यकता होगी. राज्यों में इस निर्माण के लिए ज़मीन की उपलब्धता भी देखी जा रही है. एक बार यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण शुरू कर दिया जाएगा.’