अमेरिका में रह रहे 59 वर्षीय सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की तुर्की में इस्तांबूल स्थित सऊदी कॉन्सुलेट में हत्या को अब तीन सप्ताह हो गये हैं. सऊदी अरब के शाह सलमान और युवराज मोहम्मद बिन सलमान इस हत्या के छींटों से अपनी छवि को दाग़ लगने से बचाने में व्यस्त हैं, तो तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन मौके का लाभ उठा कर अपनी धूल-धूसरित छवि को चमकाने में. मंगलवार 23 अक्टूबर को, सऊदी के शाह और युवराज ने खशोगी के भाई साहल और पुत्र सालह को राजमहल में बुला कर खशोगी की मृत्यु पर अपना ‘शोक प्रकट किया.’ सऊदी अरब की समाचार एजेंसी ‘एसपीए’ का कहना है कि खशोगी के भाई और पुत्र ने शाही संवेदना के प्रति आभार जताया.

रियाद में इस संवेदना और आभार प्रदर्शन से कुछ ही घंटे पहले, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन ने, अंकारा के संसद भवन में अपनी पार्टी ‘एकेपी’ के सांसदों को संबोधित किया. उन्होंने दावा किया कि तुर्की के पास ऐसे पक्के प्रमाण हैं कि दो अक्टूबर को इस्तांबुल के सऊदी कॉन्सुलेट में पत्रकार जमाल खशोगी की मृत्यु एक सुनियोजित साज़िश थी. एर्दोआन के मुताबिक अब तक की जांच यही दिखाती है कि वह एक पूर्वनियोजित बर्बर हत्या थी. सऊदी अरब पहले तो यह कह रहा था कि खशोगी की हत्या हुई ही नहीं है, वे जीवित हैं. जब इस झूठ को सच सिद्ध करना असंभव हो गया तो उसने यह कहना शुरू कर दिया कि कॉन्सुलेट में गर्मागर्मी और हाथापायी हो जाने से हुई एक दुर्घटना में खशोगी की जान चली गयी.

तुर्की के राष्ट्रपति का दावा

तुर्की के राष्ट्रपति ने दावा किया कि हत्या की योजना ‘कई दिन पहले ही’ बना ली गई थी. उन्होंने और भी कई बातें कहीं. मसलन योजना को साकार करने के लिए छोटे आकार के दो चार्टर्ड जेट विमानों से 15 सदस्यों वाली तीन कमांडो टीमें इस्तांबुल पहुंची हुई थीं. खशोगी की मृत्यु के बाद कमांडो टीम के एक सदस्य को, नकली दाढ़ी के साथ, खशोगी जैसे कपड़े पहने हुए सऊदी अरब की तरफ़ रवाना होते देखा गया था. एर्दोआन ने यह भी कहा कि सऊदी अरब ने इस बीच यह तो मान लिया है कि इस्तांबुल स्थित उसके मिशन में खशोगी की मृत्यु हुई है, लेकिन ‘अब हम यह चाहते हैं कि हत्या के ज़िम्मेदारों को उचित सज़ा भी मिले.’ एर्दोआन के मुताबिक तुर्की उन पर इस्तांबुल में ही मुकदमा चलाना चाहेगा.

अपने बड़बोलेपन के लिए प्रसिद्ध तुर्की के राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते ही कह दिया था कि वे मंगलवार, 23 अक्टूबर को, खशोगी हत्याकांड का सारा कच्चा चिठ्ठा खोल कर दुनिया के सामने रख देंगे. लेकिन, उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही, जो अब तक कही-सुनी न गयी हो. अपने दावों की पुष्टि करने वाले कोई प्रमाण भी उन्होंने पेश नहीं किये. कोई विवरण दिये बिना यही कहते रहे कि तुर्की के सरकारी अभियोजकों ने अपनी जांच में यह पाया है या वह पाया है.

खशोगी का शव अभी तक नहीं मिला

सऊदी अरब से एर्दोआन ने कहा कि वह बताये कि खशोगी की हत्या का किसने आदेश दिया था और उनका शव कहां है? खशोगी का शव अभी तक मिला नहीं है. समझा जाता है कि शव को टुकड़े-टुकड़े कर कहीं छिपा दिया गया है. तुर्की के राष्ट्रपति ने अपनी पार्टी के सांसदों से कहा कि खशोगी की हत्या के एक दिन पहले सऊदी कमांडो के कुछ सदस्य कॉन्सुलेट भवन के पास के ही बेलग्राद वन में गये थे. तुर्की की पुलिस ने पिछले सप्ताह वहां जा कर छानबीन की, पर उसे कोई शव नहीं मिला. इसी तरह, हत्या से ठीक पहले सऊदी कॉन्सुलेट के वीडियो कैमरों की हार्ड डिस्क भी हटा दी गई थी, ताकि उस पर कुछ रिकार्ड न हो सके.

तुर्की की राष्ट्रपति रजब तैय्य्ब एर्दोआन
तुर्की की राष्ट्रपति रजब तैय्य्ब एर्दोआन

राष्ट्रपति एर्दोआन के भाषण से पहले तुर्की के मीडिया में कई बार ऐसी ऑडियो और वीडियो रिकार्डिगों की चर्चा देखने में आई थी, जिनमें कॉन्सुलेट में आने-जाने वाले लोगों या उसके भवन के भीतर से आने वाली आवाज़ों का उल्लेख किया गया होता था. किंतु अपने भाषण में एर्दोआन ने ऐसी जानकारियों का कोई उल्लेख नहीं किया. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब से आये 15 कमांडो के अलावा कॉन्सुलेट के तीन अधिकारियों की भी उन लोगों के तौर पर पहचान की गई है, जो खशोगी की हत्या में शामिल थे. वे इन सभी 18 लोगों पर इस्तांबुल में मुदमा चलते और उन्हें सज़ा पाते देखना चाहते हैं.

युवराज का नाम नहीं लिया

अपने भाषण में एर्दोआन ने सउ़दी युवराज मोहम्मद बिन सलमान का एक बार भी नाम नहीं लिया. जबकि आम तौर पर यही अटकलें लगाई जाती हैं कि अपनी आलोचनाओं से चिढ़े हुए युवराज महोदय ही जमाल खशोगी को रास्ते से हटाना चाहते थे. युवराज का नाम नहीं लेने और अपने आरोपों तथा दावों के बारे में कोई ठोस प्रमाण नहीं देने के पीछे एर्दोआन की कोई कूटनीति होनी चाहिये. अन्यथा तो वे सबसे तू-तड़ाक करने और मुंहफट होने के लिए प्रसिद्ध हैं. हो सकता है कि वे सऊदी शासकों को नीचा दिखाना तो चाहते हैं, पर उनसे खुल कर टकराना नहीं चाहते.

रविवार 21 अक्टूबर को सऊदी अरब के विदेश मंत्री अदेल अल-जुबैर ने अमेरिकी टेलीविज़न चैनल ‘फॉक्स न्यूज़’ से कहा कि उनके देश के नेतृत्व को ऐसी घटिया कार्रवाई का पता नहीं था. उनका कहना था, ‘जिन लोगों ने यह किया, उन्होंने अपने अधिकारक्षेत्र के बाहर जाकर यह सब किया है. निश्चित रूप से यह एक बहुत बड़ी ग़लती थी. उस पर पर्दा डालने की कोशिश तो और भी बड़ी ग़लती थी.’ अल-जुबैर ने यह भी कहा कि उनके देश को नहीं मालूम कि खशोगी का शव कहां है. लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अपना नाम गोपीनीय रखते हुए एक सऊदी अधिकारी ने उसे बताया कि खशोगी के शव को एक गलीचे में लपेट कर उसे ‘ठिकाने लगाने के लिए’ इस्तांबुल के ही एक ‘स्थानीय सहयोगी’ को सौंप दिया गया. उस व्यक्ति का अभी तक पता नहीं लग पाया है.

उंगलियां काट दीं, सिर धड़ से अलग कर दिया

दूसरी ओर, सरकार के नज़दीकी तुर्की के दैनिक अखबार ‘येनी सफ़ाक’ ने इस्तांबुल के सऊदी कॉन्सुलेट से आईं आवाज़ों की एक बहुचर्चित ऑडियो रिकार्डिंग का उल्लेख करते हुए लिखा कि सऊदी अरब से आये कमांडो ने जमाल खशोगी से पूछताछ के समय उनकी उंगलियां काट दीं और बाद में उनका सिर भी धड़ से अलग कर दिया. कॉन्सुल जनरल मोहम्मद अल-ओताबी से यह सब देखा नहीं जा रहा था. उन्होंने कहा, ‘यह सब बाहर कहीं करो, तुम लोग मेरे लिए समस्य़ा खड़ी कर रहे हो.’ अखबार के मुताबिक किसी ने तब उन्हें जवाब दिया, ‘अगर तू ज़िंदा रहना चाहता है, सऊदी अरब वापस जाना चाहता है, तो चुप रह!’

बताया जाता है कि हत्या के बाद कमांडो टीम के मुखिया माहर अब्दुल अज़ीज मुतरेब ने युवराज मोहम्मद बिन सलमान के कार्यालय-प्रमुख बदर अल-असाकर को चार बार फ़ोन किया. कम से कम एक फ़ोन कॉन्सुलेट भवन के भीतर से किया गया. एक फ़ोन युवराज के भाई ख़ालेद बिन सलमान को भी किया गया, जो वाशिंगटन में सऊदी अरब के राजदूत हैं.

सऊदी कॉन्सुलेट की जम कर जासूसी

इससे पता चलता है कि तुर्की भी किस मुस्तैदी से इस्तांबुल के सऊदी कॉन्सुलेट की जम कर जासूसी कर रहा था. जासूसी से प्रप्त जानकारियों को सरकार के नज़दीकी मीडिया के कानों में डाल कर उनका खूब प्रचार भी किया जा रहा था. मध्यपूर्व की एक वेबसाइट ‘मिडल-ईस्ट आई’ ने ऑडियो रिकार्डिंग वाले संभवतः इसी स्रोत के आधार पर लिखा कि खशोगी की मरण-यात्रा सात मिनट तक चली. वे बहुत चीख-कराह रहे थे. वेबसाइट के मुताबिक उन्हें कोई इंजेक्शन दे कर ठंडा कर दिया गया और अंतिम सांस तक सताया गया. हड्डिया काटने की आरी से संभवतः उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े तक कर दिये गये!

कभी सऊदी राजघराने के नज़दीकी रहे जमाल खशोगी के बुरे दिन तब शुरू हुए, जब 2015 में मोहम्मद बिन सलमान को, जिनसे उनकी नहीं पटती थी, सऊदी अरब का युवराज, यानी भावी शाह घोषित किया गया. खशोगी अमेरिका में पढ़ाई कर चुके थे, इसलिए अमेरिका चले गये और ‘वाॉशिंगटन पोस्ट’ के लिए लिखने लगे.

विवाह के चक्कर में जान गयी

जमाल खशोगी इस्तांबुल में रहने वाली अपनी तुर्क मंगेतर हातिज चेन्जिज़ से विवाह करने गये थे. विवाह के सिलसिले में उन्हें सऊदी कॉन्सुलेट से कुछ कागज़-पत्र चाहिए थे, जिन्हें लेने के लिए उन्हें दो अक्टूबर के दिन दोपहर एक बजे कॉन्सुलेट में पहुंचना था. समझा जाता है कि यह दिन और समय उन लोगों को पता था, जिन्हें खशोगी का काम तमाम करना था.

उस दिन जो घटनाक्रम खशोगी की मौत का कारण बना, वीडियो रिकार्डिंगों के अनुसार, वह पौ फटने से बहुत पहले ही, रात में तीन बज कर 28 मिनट पर शुरू हुआ था. इस्तांबुल के अतातुर्क अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर छोटे आकार के दो निजी जेट विमान उतरे थे. उनमें से एक तुर्की के सुरक्षा अधिकारियों की नज़र में चढ़ा. हवाई अड्डे के वाहनों से उसके यात्री प्राइवेट जेट विमानों के टर्मिनल में पहुंचे. सऊदी अरब से आयी कमांडो टीम के आधे सदस्यों को 3:37 पर वहां पहली बार देखा गया.

कमांडो टीम

बताया जाता है कि 4:29 पर वे हवाई अड्डे से बाहर निकले. यानी उन्हें बाहर निकलने में क़रीब एक घंटा लगा. क़रीब 30 मिनट बाद 5:05 पर टीम का एक हिस्सा म्यौएवनपीक नाम के एक होटल पहुंचा. 9:40 पर टीम होटल से बाहर निकलती देखी गयी. 15 मिनट बाद 9:55 पर वे लोग सऊदी कॉन्सुलेट पहुंचे. जो लोग कॉन्सुलट की इमारत के अंदर गये, वे अपने काम की तैयारी में लग गये.

जमाल खशोगी अपनी मंगेतर के साथ तीन घंटे बाद वहां पहुचे. तब दोपहर का 1:13 बजा था. उन्होंने तय किया था कि यदि कोई गड़बड़ होती है, तो मंगेतर अपने मोबाइल फ़ोन के द्वारा तुर्की के सरकारी अधिकारियों से संपर्क करेगी. यही वह क्षण था, जब जमाल खशोगी ने अपनी मंगेतर को अंतिम बार देखा. दोनों को नहीं मालूम था कि वे किस जाल में फंसने जा रहे हैं.

चीख-पुकार की आवाज़ें

कान्सुलेट के अंदर क्या हुआ, इस बारे में सऊदी और तुर्की वर्णन मेल नहीं खाते. तुर्क अधिकारी एक ऐसी भयावह आडियो रिकॉर्डिंग की बात करते हैं, जिस में चीख-पुकार की आवाज़ें हैं. जो कुछ हुआ, उस के बार में 17 दिन बाद सऊदी अरब ने कहा कि युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने वैसा कोई आदेश नहीं दिया था. कहा गया कि खशोगी की मृत्यु एक हाथापाई में हुई. उनकी मंगेतर शाम 5:33 तक बाहर इंतज़ार करती रही, और तब मदद के लिए पुलिस को फ़ोन किया. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

तुर्की की पुलिस और गुप्तचर सेवाएं मानो समय के साथ होड़ लगाने लगीं. एक गुप्तचर हवाई अड्डे की ओर लपका. एक विमान की उसने तलाशी ली. सामान जांचे. रात 7:57 और 8:11 के बीच सऊदी कमांडो टीम के कुछ सदस्य छोटी-छोटी टोलियों में होटल छोड़ते देखे गए. 9:00 पर निजी जेटों में से दूसरा उड़ने के लिए तैयार होने लगा. तब तक क़रीब 18 घंटे बीत चुके थे, जब जमाल खशोगी को लापता घोषित किया गया. लेकिन तब से यदि कुछ लापता है, तो वह है उनका मृत शरीर.

रियाद में विदेशी निवेशकों का सम्मेलन

23 अक्टूबर को जब तुर्की के राष्ट्रपति अपनी पार्टी के सासंदों के समक्ष पत्रकार जमाल खशोगी की नीचतापूर्ण हत्या की निंदा कर रहे थे, ठीक उसी समय सऊदी अरब की राजधानी रियाद में विदेशी निवेशकों का एक तीन दिवसीय आर्थिक सम्मेलन शुरू हो रहा था. हालांकि कम से कम 40 विदेशी निवेशकों ने उसमें भाग लेने से मना कर दिया था, तब भी सऊदी अरब 50 अरब डॉलर मूल्य के बराबर 25 सौदों पर हस्ताक्षर करने-कराने में सफल रहा.

तब भी तुर्की के राष्ट्रपति को इस बात से खुशी ही होगी कि यूरोप सहित पश्चिमी जगत के जो जाने-माने देश कल तक तुर्की में उनकी स्वेच्छाचारिता पर उंगली उठाया करते थे, वे सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को लेकर अब या तो असमंजस में पड़ गये हैं या उसकी निंदा कर रहे हैं.

सऊदी अरब को जर्मन हथियारों की बिक्री रुकी

जर्मनी ने कहा है कि वह सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री फिलहाल रोकने जा रहा है. सऊदी अरब ही जर्मन हथियारों का इस समय दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक है. 30 सितंबर तक जर्मन सरकार उसे 41 करोड़ 64 लाख डॉलर मूल्य के बराबर हथियार बेचने की अनुमति दे चुकी थी. यह स्पष्ट नहीं है कि उसे हथियारों की बिक्री पर रोक की घोषणा इस अनुमति पर भी लागू होगी या केवल भावी सौदों पर.

कनाडा ने भी कहा है कि वह सऊदी अरब के साथ कई अरब डॉलर के रक्षा-सामग्री संमझौते को रद्द करने की सोच रहा है. ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से भी इसी प्रकार के संकेत मिल रहे हैं. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेदरीका मोग़रीनी ने कहा कि यूरोपीय संघ के देश इस बात पर विचार करेंगे कि खशोगी हत्याकांड के बाद सऊदी अरब के प्रति उनकी नीति का स्वरूप क्या होना चाहिये.

एर्दोआन की कुटिल विजय

यह सब सऊदी अरब की किरकिरी से अधिक तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन की तात्कालिक कुटिल विजय है. तुर्की में 15 जुलाई 2016 के दिन उनकी सरकार का तख्ता पलटने के कथित सैनिक प्रयास के बाद से उन्होंने देश-विदेश के डेढ़ सौ से अधिक पत्रकारों को पहले ही जेल में बंद कर रखा है. एक प्रमुख दैनिक ‘जम्हूरियत’ के मुख्य संपादक जान द्युंदार ने भाग कर जर्मनी में शरण ले रखी है. सरकार ने 200 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं प्रकाशन गृहों, समाचार एजेंसियों और रेडियो-टेलीविज़न चैनलों पर रोक लगा रखी है. 50 हज़ार से अधिक शिक्षक, प्रोफ़ेसर, जज, वकील, डॉक्टर और साधारण सरकारी कर्मचारी तक अब भी जेलों में बंद हैं. ऐसे में सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खशोगी की नृशंस हत्या पर पर आंसू बहा कर एर्दोआन दुनिया की आंख में धूल झोंक रहे हैं, न कि किसी सच्ची पीड़ा का परिचय दे रहे हैं.

यही नहीं, एक न एक दिन तुर्की का सुल्तान बनने के सपने देख रहे एर्दोआन उसी प्रकार दुनिया भर के सुन्नी मुसलमानों का ख़लीफ़ा बनने की महत्वाकांक्षा भी रखते हैं, जिस प्रकार प्रथम विश्वयुद्ध के अंत से पहले तक तुर्की का हर सुल्तान मुसलमानों का ख़लीफ़ा भी हुआ करता था. एर्दोआन को लगता है कि खशोगी की हत्या के लिए सऊदी शासकों को अपराधी के कठघरे में खड़ा कर वे दुनिया को दिखा सकते हैं कि इस्लामी जगत का सच्चा नेता या ख़लीफ़ा कहलाने के सबसे सुयोग्य वही हैं.