केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में पहली बार दो शीर्ष अफसरों के बीच छिड़ी लड़ाई गंभीर हो चुकी है. इसमें लगातार अहम मोड़ भी आ रहे हैं. इसी क्रम में बुधवार को उस पूरी टीम को बदल दिया गया है जो पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही थी.

पीटीआई के मुताबिक मंगवार रात ही सीबीआई के अंतरिम निदेशक का कार्यभार संभालने वाले एम नागेश्वर राव ने बुधवार को पहला आदेश यही जारी किया. इसके तहत अस्थाना पर लगे आरोपों की जांच करने वाली टीम के प्रमुख से लेकर सिपाही तक सबको उनकी इस ज़िम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया. अब इस मामले की जांच सीबीआई में तैनात पुलिस अधीक्षक सतीश डागर करेंगे. डागर इससे पहले डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़े मामले की जांच कर चुके हैं.

डागर की टीम पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) तरुण गौबा को रिपोर्ट करेगी, जिन्होंने मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले की जांच की थी. संयुक्त निदेशक स्तर पर आईपीएस वी मुरुगेशन को तैनात किया गया है. वे सीबीआई मुख्यालय में भ्रष्टाचार निरोधक-1 (इकाई) में संयुक्त निदेशक के तौर पर अतिरिक्त ज़िम्मेदारी संभालेंगे. सूत्रों के मुताबिक कोयला घोटाले की जांच के वक़्त सुप्रीम कोर्ट ने भी मुरुगेशन पर भरोसा जताया था.

दूसरी तरफ पुलिस उपाधीक्षक एके बस्सी को तुरंत प्रभाव से पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया है. अब तक बस्सी ही अस्थाना के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे थे. लेकिन अस्थाना ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को दी अपनी शिकायत में कहा था कि बस्सी उनके ख़िलाफ़ एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा के निर्देश पर ‘आवारगी सी जांच’ कर रहे हैं. यानी उन्हें (बस्सी को) पता नहीं है कि जांच किस चीज की और कैसे करनी है. वे सिर्फ वही कर रहे हैं जो वर्मा उन्हें करने के लिए कह रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि सीबीआई निदेशक (फिलहाल पूर्व) वर्मा और उनके बाद एजेंसी के नंबर दो अधिकारी- विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बीते कुछ दिनाें से खुली लड़ाई चल रही है. इस मामले में सीबीआई ने अस्थाना के नज़दीकी डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार भी किया है. इस सब के बाद केंद्र सरकार ने मामले में दख़ल देते हुए मंगलवार देर रात वर्मा के साथ अस्थाना को भी जबरन छुट्‌टी पर भेज दिया था. साथ ही नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बना दिया था. सरकार के इस फैसले को वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इस पर 26 अक्टूबर को सुनवाई होनी है.