उत्तर प्रदेश के कानपुर का अरबपति मांस कारोबारी माेइन क़ुरैशी फिर सुर्ख़ियों में है. यह क़ुरैशी ही है जो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मौज़ूदा प्रमुख आलोक वर्मा और उनके बाद एजेंसी के नंबर दो अधिकारी राकेश अस्थाना के बीच सड़क पर आ चुके झगड़े का मुख्य कारण बना है. इसी झगड़े की वज़ह से वर्मा और अस्थाना को जबरन छुट्‌टी पर भेजा गया है. और सूत्रों की मानें तो सिर्फ वर्मा ही नहीं यह मोइन क़ुरैशी इससे पहले सीबीआई के दो और तत्कालीन प्रमुखों की कुर्सी भी हिला चुका है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक वर्मा और अस्थाना दोनों ने सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) को एक-दूसरे के ख़िलाफ़ दी शिकायतों में मोइन क़ुरैशी का ज़िक़्र किया है. अस्थाना ने वर्मा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने क़ुरैशी के ख़िलाफ़ चल रही जांच से उसे बचाने के लिए दो करोड़ रुपए की रिश्वत ली. वहीं वर्मा ने अस्थाना पर ऐसे ही कारण से क़ुरैशी से तीन करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है. हालांकि क़ुरैशी के जाल में फंसे ये दो अधिकारी कोई इक़लौता उदाहरण नहीं हैं.

ख़बर के मुताबिक क़ुरैशी का नाम सबसे पहले 2014 में चर्चा में आया था. तब सीबीआई के तत्कालीन मुखिया रंजीत सिन्हा थे. उस वक़्त ख़बरें आई थीं कि क़ुरैशी ने सिन्हा से उनके घर पर 15 महीने में 70 बार मुलाकात की. इसी बीच एक अन्य मामले में हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अफसरों को बताया कि उसने क़ुरैशी को एक करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी. ताकि वह सिन्हा के मार्फत सीबीआई जांच से जुड़े मामले में उसके (सना के) दोस्त को ज़मानत दिला सके.

सिन्हा हालांकि इन आरोपों को ख़ारिज़ करते रहे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपाें में कुछ आधार पाया इसीलिए सिन्हा को फटकार भी लगाई थी कि उन्होंने एक संदिग्ध व्यक्ति से इस तरह मुलाकातें कीं. फिर 2014 में ही पता चला कि क़ुरैशी के तार सिन्हा से पहले सीबीआई प्रमुख रहे एपी सिंह से भी जुड़े थे. सिंह के साथ फोन पर क़ुरैशी के संदेशों का आदान-प्रदान हुआ था. पिछले साल फरवरी में आयकर विभाग और ईडी ने इन आरोपों के सिलसिले में सिंह के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ कर जांच भी शुरू की थी.

सिंह भी इन आरोपों को ख़ारिज़ करते रहे लेकिन इनके चलते उन्हें संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था. ग़ौरतलब है कि तीन-तीन सीबीआई प्रमुखों की परेशानी बन चुका यही क़ुरैशी 25 साल पहले 1993 में उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक छोटा सा बूचड़खाना चलाया करता था. लेकिन उसने ढाई दशक में ही इतनी तेजी से तरक्क़ी की कि आज वह 25 कंपनियों का मालिक है. ये कंपनियां कंस्ट्रक्शन, फैशन, मांस निर्यात, हवाला जैसे कई कारोबारों में सक्रिय हैं.