‘भारत को एक बड़ी शक्ति बनाने के लिए अगले दस सालों के दौरान देश को एक स्थिर सरकार की जरूरत है.’  

— अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

अजीत डोभाल ने यह बात दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन वाली सरकारें देशहित में कड़े फैसले नहीं कर पातीं. इसके अलावा ऐसी सरकारों के शासन में देशहित के बजाय स्थानीय राजनीति को ज्यादा अहमियत मिलती है. डोभाल के मुताबिक देश को एक बड़ी शक्ति के तौर पर स्थापित करने के लिए स्थायी सरकार के साथ निर्णय कर पाने में सक्षम कुशल नेतृत्व की जरूरत है जो कि किसी एक पार्टी की सरकार से ही संभव हो सकता है.

‘सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा भ्रष्टाचार के खिलाफ अच्छा काम कर रहे थे, उन्हें पद से हटाए जाने के मामले में प्रधानमंत्री को पुनर्विचार करना चाहिए.’  

— सुब्रमण्यम स्वामी, भारतीय जनता पार्टी के नेता

सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरुवार को यह बात अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कही. आलोक वर्मा को एक ईमानदार जबकि राकेश अस्थाना को भ्रष्ट अधिकारी बताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई विवाद से भ्रष्टाचार के प्रति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अभियान कमजोर पड़ रहा है. इसके साथ अपनी ही पार्टी की आलोचना करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने भाजपा में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कई ‘शुभ चिंतक’ होने की बात भी कही. स्वामी के मुताबिक पी चिदंबरम के खिलाफ चल रही जांच से अगर प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राजेश्वर सिंह को हटाया जाता है तो वे भ्रष्टाचार के उन सभी मामलों को वापस ले लेंगे जो उन्होंने कांग्रेसी नेताओं पर लगाए हैं.


‘सीबीआई निदेशक को उनके पद से हटाना संविधान का अपमान है.’  

— राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष

राहुल गांधी ने यह बात एक प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को रफाल घोटाले में पकड़े जाने का डर था इसलिए उन्होंने आलोक वर्मा को रात के दो बजे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक पद से हटा दिया. राहुल गांधी के मुताबिक ऐसा करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रफाल सौदे में हुई अनियमितताओं से जुड़े सबूतों को भी मिटा रहे हैं.


‘वैचारिक छुआछूत में मेरा कोई विश्वास नहीं है.’  

— कैलाश सत्यार्थी, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता

कैलाश सत्यार्थी का यह बयान बीते हफ्ते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर आया है. उनका यह भी कहना है कि भविष्य में भी अगर संघ या फिर इसके सहयोगी संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल होने का उन्हें मौका मिलता है तो वे इनमें जरूर शामिल होंगे. कैलाश सत्यार्थी के मुताबिक आरएसएस एक अत्यंत अनुशासित संगठन है जो बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रभावी काम कर सकता है और इस दिशा में वह अपनी तरफ से प्रयास भी कर रहा है.


‘रफाल सौदे में अनिल अंबानी की कंपनी के साथ समझौते के लिए भारत सरकार ने हम पर कोई दबाव नहीं डाला था.’

— एरिक ट्रैपियर, दसॉ एविऐशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी

एरिक ट्रैपियर ने यह बात न्यूज 18 के साथ रफाल विमान सौदे को लेकर हुई बातचीत में कही है. उनके मुताबिक इस सौदे में सहयोगी बनाने के लिए एचएएल के अलावा रिलायंस के साथ भी उनकी बातचीत चल रही थी और दसॉ एविऐशन ने रिलायंस के साथ पहला समझौता फरवरी 2012 में किया था. एरिक ट्रैपियर का यह भी कहना है कि रिलांयस के पास नागपुर में जमीन थी इसलिए कंपनी ने उनके साथ समझौते को करना मुनासिब समझा था.