आंध्र प्रदेश के 40 लाख से अधिक मतदाता तेलंगाना में आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों के भाग्य का फैसला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. ये लोग लंबे समय से तेलंगाना के विभिन्न हिस्सों में बसे हुए हैं. इन्हें वहां पर ‘सेटलर्स’ कहा जाता है.

हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए तेलंगाना सेटलर्स फोरम के संयोजक कटरागड्डा प्रसून ने कहा कि सीमांध्र (आंध्र प्रदेश) के लोग तेलंगाना के सभी हिस्सों में फैले हुए हैं. कटरागड्डा प्रसून के मुताबिक राज्य के कुल 2.73 करोड़ मतदाताओं में इन लोगों की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है. कटरागड्डा के मुताबिक वे राज्य की कुल 119 में से कम से कम 48 सीटों के चुनाव परिणाम प्रभावित कर सकते हैं.

मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) और उनकी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) का रुख आंध्र प्रदेश के इन लोगों प्रति हमलावर है. माना जाता है तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के विभाजन से पहले 2014 में हुए विधानसभा चुनावों में ऐसे अधिकांश मतदाताओं ने तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) का समर्थन किया था. टीआरएस का आरोप है कि अगर टीडीपी सत्ता में आई तो वह तेलंगाना का आंध्र प्रदेश के आगे आत्मसमर्पण करवा देगी. हालांकि टीडीपी इसे खारिज करती रही है. तेलंगाना में टीआरएस से मुकाबले के लिए कांग्रेस, टीडीपी और सीपीआई का गठबंधन बना है.