तेलंगाना सरकार ने जून 2014 से अगस्त 2015 तक मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए राज्यभर में 12,462 चेक जारी करते हुए 86.6 करोड़ रुपये वितरित किए थे, लेकिन उसके पास केवल 182 लाभार्थियों को 1.69 करोड़ रुपये जारी करने के रिकॉर्ड हैं. शेष बचे 98.5 प्रतिशत लाभार्थियों के बारे में सरकार के पास कोई जानकारी नहीं है. न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह दावा हैदराबाद में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता विजय गोपाल ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) से मिली जानकारी के आधार पर किया है.

विजय गोपाल ने बताया है कि उन्होंने 2015 में राज्य के राजस्व विभाग से मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए वितरित किए गए चेकों के बारे में सूचना मांगी थी जिसके जवाब में उन्हें 700 पेजों का जवाब भेजा गया था. आरटीआई से मिले इन दस्तावेजों के मुताबिक सरकार के पास उन लोगों की जानकारी नहीं हैं जिन्हें उसने 84.9 करोड़ रुपये जारी किए हैं.

सरकारी नियमों के मुताबिक, राजस्व विभाग को उन लोगों की जानकारी और पहचान का रिकॉर्ड रखना होता हैं जिन्हें सहायता दी गई हो. विजय गोपाल का कहना है कि सरकार को बताना चाहिए कि रुपये किस आधार पर बांटे गए हैं. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही इसमें कई और गड़बड़ियां भी हैं, जैसे एक जैसे कई नाम इस सूची में शामिल हैं.

इस तरह की गड़बड़ियां मिलने के बाद विजय गोपाल ने लोकपाल में इसकी शिकायत दर्ज करवाई थी और बाद में सीबी-सीआईडी को इसकी जांच का जिम्मा दिया गया था. विजय गोपाल का दावा है कि इस मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने अगले साल की जानकारी के लिए 2016 में एक और आरटीआई दाखिल की थी जिसे सरकार ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मुख्यमंत्री राहत कोष के बारे में जानकारी आरटीआई के दायरे में नहीं आती. विजय गोपाल ने बताया कि वे इस मामले में हुई अनियमित्ताओं की जांच के लिए हैदराबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर कर चुके हैं.