31 अक्टूबर, 2018 यानी सरदार पटेल की मूर्ति के अनावरण के दिन से पहले तक चीन में स्थित स्प्रिंग टेंपल बुद्धा में खड़ी गौतम बुद्ध की प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति थी. इसकी ऊंचाई करीब 153 मीटर है और 2002 से यह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति रही है. इसे भी पर्यटन स्थल की ही तरह विकसित करने की कोशिश की गई थी, लेकिन चीन सरकार को इसमें कुछ खास सफलता नहीं मिल पाई. स्प्रिंग टेंपल बुद्धा आज तक इस देश के शीर्ष दस पर्यटन स्थलों में शुमार नहीं हो पाया.

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया इलाके में सरदार वल्लभभाई पटेल की जिस मूर्ति - स्टैच्यू ऑफ यूनिटी - का अनावरण किया है, उसकी ऊंचाई 182 मीटर (592 फीट) है. आज से यह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होगी. भारत और गुजरात सरकार भी इस क्षेत्र को दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति के दम पर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना रही हैं. हालांकि चीन में स्थित गौतम बुद्ध की मूर्ति के मुकाबले स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ‘सबसे ऊंची मूर्ति’ का तमगा जल्दी ही खो देगी.

कौन देगा इसकी ऊंचाई को टक्कर

गुजरात के इस महाकाय निर्माण को कुछ ही सालों में महाराष्ट्र सरकार का एक और निर्माण टक्कर देने वाला है. महाराष्ट्र सरकार भी अरब सागर में शिवाजी महाराज की एक प्रतिमा बना रही है जिसकी ऊंचाई लगभग 210 मीटर होगी. इसका निर्माण भी वही लार्सन एंड टूब्रो कंपनी कर रही है जिसने पटेल की प्रतिमा बनाई है. हालांकि यहां एक दिलचस्प बात यह है कि अरब सागर में इस प्रतिमा को बनाने की लागत स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से कम होगी. कंपनी के अनुसार इस मूर्ति को बनाने में कुल 2500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जबकि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. शिवाजी महाराज की यह मूर्ति 2021 तक बनकर तैयार हो जाएगी और इसके बाद स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से सबसे ऊंची मूर्ति होने का तमगा छिन जाएगा.

हालांकि लगभग तीन साल तक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची इमारत तो रहेगी ही. इस जानकारी के साथ यह भी जान लेते हैं कि इसके बाद फिलहाल ऊंचाई में कौन-सी मूर्तियों का नंबर आता है.

यह चीन के हुनान प्रांत के स्प्रिंग टैंपल बुद्धा में खड़ी 153 मीटर ऊंची बुद्ध भगवान की मूर्ति है, जिसका जिक्र हमने शुरुआत में ही किया है.

तीसरे स्थान पर भी बुद्ध की ही एक प्रतिमा है जिसकी कुल ऊंचाई आधार ढांचे सहित 130 मीटर है. म्यांमार में स्थित सेतक्यार स्टैंडिंग बुद्धा नामक इस स्मारक को 2008 में बनाया गया था.

चौथे स्थान पर है जापान के ऊशीकू में स्थित ऊशीकू दाइबुत्सू. यह भी बुद्ध की ही प्रतिमा है. इसकी ऊंचाई 120 मीटर है. इसका अनावरण 1993 में हुआ था.

पांचवें स्थान पर है चीन के नान्शा प्रांत में स्थित गुआनयिन बोधिसत्व की प्रतिमा. बोधिसत्व को बौद्ध धर्म में दया और त्याग से जोड़कर देखा जाता है. यह प्रतिमा 108 मीटर ऊंची है और इसका निर्माण साल 2005 में पूरा हुआ था.