विश्व बैंक ने 31 अक्टूबर को अपनी ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट - 2019’ जारी की है. यह एक सालाना रिपोर्ट है जिसमें विश्व बैंक ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार करने की सुगमता के आधार पर देशों को रैंकिंग देता है. इस सूची में कुल 190 देशों को शामिल किया जाता है. ताजा सूची में भारत को 77वां स्थान मिला है और देश ने पिछली बार के मुकाबले 23 पायदान की लंबी छलांग लगाई है. इस सूची के लिहाज से भारत का प्रदर्शन बीते दो सालों में काफी तेजी से सुधरा है. 2017 में वह इस रैंकिंग में 130 से सीधे 100वें स्थान पर पहुंच गया था. भारत ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मामले में इस बार दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ऊपर रहा है.

‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट क्या है?

विश्व बैंक इस रिपोर्ट में प्रमुख रूप से 10 मापदंडों या पैमानों के आधार पर यह आकलन करता है कि किसी देश में कारोबार के लिए माहौल कितना अनुकूल है. सभी 190 देशों को इन पैमानों पर आंकते हुए अंक दिए जाते हैं. फिर उन अंकों को जोड़कर हर देश की एक रैंकिंग निर्धारित होती है.

कौन से हैं वे दस मापदंड?

  1. नये व्यवसाय की शुरुआत : इसके तहत नया व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया, उस प्रक्रिया के दौरान खर्च होने वाली रकम और प्रक्रिया में लगने वाले समय का आकलन किया जाता है.
  2. बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए अनुमति : किसी देश में एक कंपनी को वेयरहाउस या गोदाम के निर्माण के लिए कितनी सहूलियत होती है और उसमें उसकी कितनी लागत आती है.
  3. बिजली की उपलब्धता : बिजली कनेक्शन मिलने में लगने वाला समय और लागत भी इस अध्ययन का हिस्सा होते हैं.
  4. संपत्ति का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) : व्यावसायिक संपत्ति के रजिस्ट्रेशन में लगने वाले समय और खर्च पर भी कारोबार में आसानी निर्भर करती है.
  5. कर अदायगी : संबंधित देश में कर व्यवस्था कैसी है. वहां कितने तरह के कर लिए जाते हैं तथा उन्हें भरने में लगने वाला समय जैसे विषय भी इस अध्ययन में शामिल होते हैं.
  6. ऋण लेने में सहूलियत : इस पैमाने के तहत देखा जाता है कि किसी देश में स्थापित व्यापारियों या नया व्यापार शुरू करने वालों को कर्ज लेने के लिए किन-किन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है और उन्हें किन दरों पर, कितने समय में यह ऋण उपलब्ध करवाया जाता है.
  7. छोटे निवेशकों की सुरक्षा : देश में लघु उद्योग शुरू करने वाले लोगों की पूंजी की कितनी सुरक्षा की जाती है. इसका भी अध्ययन किया जाता है.
  8. आयात-निर्यात की प्रक्रिया : किसी भी देश में एक राज्य से दूसरे में या फिर दूसरे देशों से माल लाने-ले जाने में किन-किन कागजी कार्यवाहियों की जरूरत पड़ती है.
  9. अनुबंध (कॉन्ट्रेक्ट) के नियम : दो कंपनियों व कारोबारियों में होने वाले कॉन्ट्रेक्ट के नियम, उसकी प्रक्रिया और खर्च होने वाली राशि को भी कारोबार में सुगमता के लिए किये जाने वाले अध्ययन में आधार बनाया जाता है.
  10. पारदर्शिता : इसके अलावा व्यापार में तथा उपरोक्त कार्यवाहियों में पारदर्शिता को भी इस अध्ययन का हिस्सा बनाया जाता है.

भारत ने इस साल सबसे अधिक सुधार ‘निर्माण की अनुमति’ वाले पैमाने पर किया है. भारत पिछले साल इस मामले में 181वें पायदान पर था तो वहीं इस साल 129 पायदानों की छलांग के साथ 52वें स्थान पर आ गया है. इसके अलावा तीन अन्य संकेतकों (बिजली की उपलब्धता, जमा धन और छोटे निवेशकों की सुरक्षा) के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 25 देशों में है. साथ ही भारत ने आयात-निर्यात, व्यापार की शुरुआत, ऋण प्राप्ति और अनुबंध की शर्तों जैसे पैमानों पर भी काफी तरक्की की है.

इस सूची में भारत की रैंकिंग अच्छी होने का मतलब है कि देश में व्यापार करने के लिहाज से माहौल सुधरा है जो विदेशी निवेशकों को यहां आने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है.