अमेरिका में आज हो रहे चुनाव पर भारत, चीन, रूस और यूरोप सहित पूरी दुनिया की निगाहें लगी हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस मध्यावधि चुनाव के नतीजे बतौर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भविष्य और उनके निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करेंगे. पिछले कई सालों से संसद के दोनों सदनों में बहुमत से दूर रहने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए भी यह चुनाव किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं हैं.

आइये जानते हैं कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव क्या हैं और कैसे ये डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका की वर्तमान राजनीति के चेहरे को बदल सकते हैं.

मध्यावधि चुनाव की प्रक्रिया क्या है?

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में यानी दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद होते हैं, इसी कारण इन्हें मध्यावधि चुनाव कहा जाता है. ये चुनाव अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन यानी हाउस ऑफ़ रिप्रेंज़ेटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) की सभी 435 सीटों के लिए होते हैं. जबकि, 100 सदस्यों वाले उच्च सदन-सीनेट के केवल एक तिहाई सदस्य ही इस चुनाव से चुने जाते हैं. इस बार सीनेट की 35 सीटों के लिए चुनाव होंगे. चुनाव नतीजे छह नवंबर को ही देर रात तक आने की उम्मीद है.

ये चुनाव क्यों मायने रखते हैं?

इस समय मध्यवधि चुनाव के क्या मायने हैं, इसे समझने के लिए अमेरिकी संसद के दोनों सदनों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानना जरूरी है. इस समय प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है. प्रतिनिधि सभा की 435 में से 235 और सीनेट की 100 में से 51 सीटों पर उसका कब्जा है. संसद के दोनों सदनों में अपनी पार्टी का बहुमत होने की वजह से डोनाल्ड का कोई भी फैसला संसद द्वारा रोका नहीं जाता. लेकिन, अगर मध्यावधि चुनाव में यह स्थिति बदलती है, यानी संसद के किसी एक या दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिल जाता है तो डोनाल्ड ट्रंप के लिए बतौर राष्ट्रपति आगे की राह आसान नहीं होने वाली है.

ऐसा होने पर उनके लिए अपने आगे के कार्यकाल में फैसले ले पाना और संसद में अपने मनमुताबिक किसी बिल को पास करवा पाना आसान नहीं होगा. इन सबके अलावा मध्यावधि चुनाव को सीधे तौर पर वर्तमान राष्ट्रपति के काम पर जनता की राय की तरह भी देखा जाता है. ऐसे में साफ़ है कि अगर इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार हुई तो इसका ठीकरा डोनाल्ड ट्रंप के सिर पर फोड़ा जाएगा. माना जा रहा है कि अगर ऐसा हुआ तो ट्रंप इन चुनाव नतीजों के दबाव में अपने काम करने का तरीका बदल भी सकते हैं.

चुनाव नतीजों को लेकर अनुमान

इस बार के मध्यवधि चुनाव के नतीजों को लेकर जो अनुमान लगाए जा रहे हैं उनके मुताबिक संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा के चुनाव में डेमोक्रटिक पार्टी रिपब्लिकन पार्टी पर भारी पड़ेगी. कई विशेषज्ञों का यह तक कहना है कि प्रतिनिधि सभा के नतीजे एकतरफा होंगे और डेमोक्रटिक पार्टी को बहुमत के लिए जरूरी 218 सीटों से कहीं अधिक सीटें हासिल होंगी. अमेरिकी वेबसाइट ‘फाइव थर्टीएट’ द्वारा किए गए एक ओपिनियन पोल के मुताबिक निचले सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत होने की संभावना 80 फीसदी है.

मध्यवधि चुनाव में डेमोक्रटिक पार्टी की लहर जैसे माहौल का अंदाजा अन्य चीजों से भी लगाया जा सकता है. इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को लोगों ने जिस तरह से दिल खोलकर कर चंदा दिया है, उसने सभी को चौंकाया है. इस बार पार्टी को मिला चंदा पिछले मध्यावधि चुनावों में उसे मिले चंदे से कहीं ज्यादा है. इसके अलावा जहां 2016 के चुनाव में युवा वर्ग बड़ी संख्या में डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में था वहीं इस बार वह डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में दिखाई दे रहा है. पिछले दिनों अमेरिका के कई शहरों में छात्रों ने बंदूक संस्कृति पर प्रतिबंध लगाने के मकसद से कई रैलियां की थीं. इनमें छात्र नेताओं का साफ़ कहना था कि अगर वर्तमान सरकार बंदूक संस्कृति को रोकने के लिए कोई कानून नहीं लाती तो वे डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देंगे. अमेरिका में लगभग हर महीने गोलीबारी की बड़ी घटना होने के चलते इस चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा भी बना हुआ है.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रचार की कमान संभाले हुए हैं | फोटो : एएफपी
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रचार की कमान संभाले हुए हैं | फोटो : एएफपी

इस चुनाव में अधिकांश महिलाएं भी डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में ही नजर आ रही हैं. 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद से अब तक एक दर्जन से ज्यादा महिलाएं डोनाल्ड ट्रंप पर यौन शोषण के आरोप लगा चुकी हैं. इसके अलावा चुनाव से कुछ रोज पहले ही यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे ब्रेट कैवेनॉ को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाकर ट्रंप ने महिलाओं की नाराजगी और बढ़ा दी है.

मध्यवधि चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ बने माहौल के चलते ही पिछले दिनों पार्टी के 37 सांसदों ने दोबारा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया. डेमोक्रेटिक पार्टी के मामले में ऐसे सांसदों की संख्या 18 बताई जाती है.

हालांकि, भले ही इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की लहर होने जैसे अनुमान लगाए जा रहे हों, लेकिन इसके बावजूद सीनेट के चुनाव में पार्टी के जीतने की उम्मीद काफी कम ही है. हालांकि, इसकी वजह थोड़ी अलग है. इस समय अमेरिकी सीनेट की 100 में से 51 सीटें रिपब्लिकंस और 49 डेमोक्रेट्स के पास हैं. सीनेट की जो 35 सीटें खाली हो रही हैं, यानी जिन पर मध्यावधि चुनाव होना है, इनमें से 26 सीटें ऐसी हैं जो इस समय डेमोक्रेटिक पार्टी के पास हैं और नौ रिपब्लिकन पार्टी के पास. ऐसे में डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट में बहुमत पाने के लिए अपनी सभी 26 सीटें तो जीतनी ही हैं, साथ ही रिपब्लिकन पार्टी की नौ सीटों पर भी उसे कब्जा करना होगा. इसी वजह से सीनेट की रेस में डेमोक्रटिक पार्टी के पीछे रह जाने की संभावना जताई जा रही है.

प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत हो जाने से डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें कितनी बढ़ेंगी?

अनुमानों के आधार पर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करती दिख रही है. अगर वह ऐसा कर लेती है तो निश्चित ही डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ेंगी. इसका सबसे बड़ा असर ट्रंप प्रशासन द्वारा संसद में लाये गए बिल यानी विधेयकों पर पड़ेगा जो डेमोक्रेटिक पार्टी की मर्जी के बिना निचले सदन से पास नहीं हो सकेंगे.

इसके अलावा प्रतिनिधि सभा की सभी कमेटियों में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा हो जाएगा जिनका पहला मकसद ही राष्ट्रपति के फैसलों की समीक्षा करना होता है. ये समितियां राष्ट्रपति से जुड़े कई मामलों की नए सिरे से जांच के आदेश भी दे सकती हैं. माना जा रहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत के बाद प्रतिनिधि सभा, 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल, ट्रंप के टैक्स चुकाने से जुड़े मामले और डोनाल्ड ट्रंप के वकील माइकल कोहेन द्वारा उनके खिलाफ किए गए खुलासों की जांच के आदेश देगी. हालांकि, इन जांचों से बतौर राष्ट्रपति ट्रंप की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन, इससे उनकी और रिपब्लिकन पार्टी साख पर बट्टा लगता रहेगा.

सीनेट में डोमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत से डोनाल्ड ट्रंप को क्या मुश्किल होगी?

अगर, मध्यावधि चुनाव के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी सीनेट में भी बहुमत पा लेती है तो यह ट्रंप के राजनीतिक जीवन के सबसे बड़े झटके जैसा होगा. ऐसा होने पर डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथ में राष्ट्रपति के कई फैसलों को पलटने की ताकत आ जाएगी. सीनेट में बहुमत होना इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि सीनेट के पास ही राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए गए कैबिनेट मंत्रियों और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति को रद्द करने का अधिकार होता है. अगर प्रतिनिधि सभा के साथ-साथ सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी का वर्चस्व हो जाता है तो डेमोक्रेट्स अपने मनमुताबिक बिल पास करवा सकेंगे. हालांकि, इन कानूनों को रोकने के लिए राष्ट्रपति को वीटो पॉवर दी गई है.

बतौर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भविष्य भी इन चुनावों पर निर्भर है

हाल के महीनों में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनके आधार पर उनके खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता है. महाभियोग का प्रस्ताव निचले सदन से पास होने के बाद सीनेट में भेजा जाता है, जहां इसका दो-तिहाई बहुमत से पास होना जरूरी होता है. डेमोक्रेटिक पार्टी पहले ही कह चुकी है कि वह मध्यावधि चुनाव के बाद संसद में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महभियोग प्रस्ताव लाएगी. लेकिन, जाहिर है कि इस प्रस्ताव की सफलता सीनेट में उसकी स्थिति पर निर्भर करेगी. ऐसे में साफ़ है कि मध्यावधि चुनाव के नतीजे बतौर राष्ट्रपति डोनाल्ड के भविष्य का फैसला भी करने वाले हैं.