अतंरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा जारी एकदिवसीय क्रिकेट की ताजा रैंकिंग में जसप्रीत बुमराह दुनिया के नंबर एक गेंदबाज बने हुए हैं. उनके 841 रेटिंग प्वांइट्स हैं. एकदिवसीय क्रिकेट में जसप्रीत बुमराह फिलहाल अपनी अब तक की सर्वोच्च रेंटिंग पर हैं. दिलचस्प बात यह है कि पूरे क्रिकेट इतिहास में उनसे अधिक रेंटिंग प्वांइट्स केवल शॉन पोलाक के हैं. दक्षिण अफ्रीका के पूर्व मीडियम पेसर शॉन पोलाक 1996-97 के आस-पास 891 रेटिंग प्वाइंट्स तक पहुंचे थे. तब से अब तक कोई भी उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाया है. लेकिन बुमराह जिस तरह के फार्म में हैं उससे तो यही लगता है कि वे जल्द ही इस शिखर को भी छू लेंगे.

जसप्रीत बुमराह उन कुछ खिलाड़ियों में से हैं जो भारतीय क्रिकेट टीम को आईपीएल देन हैं. वे ‘वन मैच वंडर’ नहीं साबित हुए बल्कि उन्होंने पिछले दो सालों में भारतीय टीम में अपनी अहम जगह बना ली है. आड़े-तिरछे या कहें कि गैरपारंपरिक बॉलिंग एक्शन वाला यह 24 साल का युवा खिलाड़ी आज भारत की पेस ब्रिगेड का अभिन्न हिस्सा है. बुमराह अंतिम ओवरों के विशेषज्ञ गेंदबाज हैं. उनके अधिकांश ओवर आखिरी के 10 से 15 ओवर के बीच ही होते हैं, फिर भी उनका इकॉनॉमी रेट यानी औसत केवल 4.55 ही है.

जसप्रीत बुमराह भारतीय टीम को भले ही आईपीएल से मिले हों, लेकिन उनकी खोज भारत के पूर्व कोच जॉन राइट ने एक घरेलू मैच के दौरान की थी. हालांकि यह खोज भारतीय टीम के लिए नहीं, आईपीएल के लिए ही हुई थी. यह 2013 की बात है. तब जॉन राइट इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में मुंबई इंडियस के कोच थे और अपनी टीम के लिए नये गेंदबाज की तलाश कर रहे थे. यह उन्हें सईद मुश्ताक अली ट्रॉफी- जो एक टी-20 टूर्नामेंट है- तक लेकर आई. उन्होंने यहां बुमराह को खेलते हुए देखा. तब बुमराह केवल 19 साल के थे. किसी जौहरी की तरह जॉन राइट ने बुमराह सरीखे हीरे को परख लिया और फिर उसे मुंबई इंडियंस के ताज में जड़ दिया.

हालांकि जसप्रीत बुमराह को अपने पहले आईपीएल सीजन में केवल दो ही मैच खेलने को मिले, लेकिन उन्होंने बिना किसी को निराश किए उन दो मैचों में तीन बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई. लेकिन अगले दो सीजन यानी आईपीएल 2014 और 2015 में बुमराह का प्रदर्शन काफी औसत दर्जे का रहा. इन दोनों सीजन्स में वे 15 मैचों में केवल आठ विकेट ही ले सके.

लेकिन बड़ी मंजिलें जैसे उनका इंतजार कर रही थीं. अंतिम ओवरों में सधी हुई गेंदबाजी और चोट के कारण मोहम्मद शमी के टीम से बाहर होने की वजह से जसप्रीत बुमराह को 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने को मिला. हालांकि उन्होंने इस श्रृंखला में केवल एक ही मैच खेला लेकिन अपने इस पहले ही मैच में स्टीव स्मिथ और जेम्स फॉक्नर जैसे बड़े खिलाड़ियों को पवेलियन भेजकर उन्होंने अपने चयन के फैसले को सही साबित कर दिया. बुमराह ने अपनी यॉर्कर लेंथ की गेंदों से उस मैच में बल्लेबाजों को खासा परेशान किया. अपने पहले मैच में ही दो बड़े खिलाड़ियों का विकेट झटकने वाले बुमराह को महेंद्र सिंह धोनी ने उस सीरीज की खोज बताया था. इसके बाद साल 2016 के आईपीएल में बुमराह ने धमाकेदार वापसी की और इस सीजन में 15 विकेट अपने नाम किए.

फिर तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पिछले साल अक्टूबर में जसप्रीत बुमराह ने एकदिवसीय मैचों में अपने 50 विकेट पूरे किए. उन्होंने यह कारनामा केवल 28 मैचों में किया. इसके साथ ही वे भारत की ओर से एकदिवसीय मैचों में सबसे तेजी से 50 विकेट लेने वाले दूसरे खिलाड़ी भी बन गए. केवल अजीत अगरकर ही इस मामले में उनसे आगे हैं जिन्होंने 23 एकदिवसीय मैचों में यह कारनामा किया था.

जसप्रीत बुमराह अब तक 39 अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैच खेल चुके हैं और इनमें उन्होंने 4.55 की औसत से 66 विकेट लिए हैं. साल 2016 में भारतीय टीम से जुड़ने के बाद से उनके खेल में काफी निखार आया है. आईपीएल 2017 और 2018 इस बात की पुष्टि करता है. इस दोनों सीजन्स में बुमराह ने कुल मिलाकर 37 विकेट अपने नाम किए. अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मैचों में बुमराह के बेजोड़ प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय टीम में स्थापित कर दिया है.

हालांकि अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बावजूद कुछ समय पहले तक क्रिकेट के पंडित और जानकार जसप्रीत बुमराह को केवल फटाफट या सीमित प्रारूप का ही खिलाड़ी मान रहे थे. लेकिन इस साल बुमराह ने उनका यह भ्रम भी तोड़ दिया. जनवरी में दक्षिण अफ्रीका के खेले तीन टेस्ट मैचों में बुमराह ने 14 विकेट चटकाकर सबको बताया कि खेल के लंबे प्रारूप मे भी वे उतने ही कारगर हैं जितने एकदिवसीय या टी-20 मैचों में. उन्होंने यही कारनामा इस साल इंग्लैंड दौरे पर भी दोहराया. बुमराह ने इंग्लैंड के खिलाफ भी तीन टेस्ट मैचों में 14 विकेट अपने नाम किए. छह टेस्ट मैचों के छोटे से करियर में अबतक वे 28 विकेट अपने नाम कर चुके हैं.

जसप्रीत बुमराह फिलहाल भुवनेश्वर कुमार के साथ मिलकर भारत की पेस ब्रिगेड की कमान संभाले हुए हैं. उन्होंने डेथ ओवर्स (अंतिम ओवर्स) में बल्लेबाजों के सामने जूझती भारतीय गेंदबाजी को वजन दिया है. मौजूदा समय में बुमराह भारतीय टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं. वे विराट कोहली के ‘गो-टू’ मैन हैं. जब भी विरोधी टीम के रनों पर अंकुश लगाना होता है बुमराह को गेंद थमाई जाती है और वे अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते हैं.