आदमख़ोर बाघिन ‘अवनि’ को मारे जाने के मामले में केंद्र और महाराष्ट्र के मंत्री आमने-सामने आ गए हैं. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने बाघिन को मारे जाने को ‘वीभत्स हत्या’ क़रार दिया था. मेनका गांधी पर्यावरण और पशु संरक्षण के क्षेत्र में विशेष रुचि रखती हैं. इसी वज़ह से उन्होंने इस मसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी. इसके ज़वाब में महाराष्ट्र के वन मंत्री सुधीर मुनगंतीवार ने कहा है, ‘अगर वे (केंद्रीय मंत्री) चाहती हैं तो इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करा सकती हैं.’

पीटीआई के मुताबिक मुनगंतीवार ने कहा, ‘उन्हें (मेनका गांधी को) मामले की पूरी जानकारी नहीं है. सच ये है कि बाघिन को मारने का आदेश वन एवं पर्यावरण मंत्री होने के बावज़ूद मैं तक सीधे नहीं दे सकता. मेरे विभाग के किसी अधिकारी की ओर से आदेश जारी किए जाने की ताे बात ही क्या है . ऐसे निर्णय राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही जारी किए जाते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘वे पशुओं से प्रेम करती हैं. हालांकि वे महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं. लेकिन मुझे भी तो उन महिलाओं के बारे में सोचना है जिन्हें बाघिन ने मारा है.’

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में सक्रिय आदमख़ोर बाघिन ‘अवनि’ को अभी शुक्रवार को ही मारा गया है. इसे मारने के लिए असगर अली नाम के एक पेशेवर निशानेबाज़ की सेवाएं ली गई थीं. यह बाघिन दो साल में 13 से ज़्यादा लोगाें को मार चुकी थी. लेकिन उसके मारे जाने पर बवाल इसलिए हो गया क्योंकि उसे मारने से पहले तय मानक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. दूसरी बात- उसके दो छोटे-छोटे शावक हैं जो अब अनाथ हो चुके हैं. इसीलिए मेनका गांधी सहित कई पशु संरक्षण कार्यकर्ताओं ने इस कृत्य को ‘आपराधिक’ बताया था.

उत्तर प्रदेश के दुधवा में गुस्साई भीड़ ने बाघिन को पीट-पीटकर मार डाला

इधर उत्तर प्रदेश के दुधवा राष्ट्रीय उद्यान (डीटीआर) में स्थानीय लोगों द्वारा एक बाघिन को पीट-पीटकर मार देने की ख़बर आई है. वन अधिकारियाें के हवाले से द टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया है कि सभी हमलावर चलतुआ गांव के थे. यह डीटीआर के कोर एरिया (जहां जंगली जानवरों की घनी आबादी हाेती है) में स्थित है. बताया जाता है कि इस राष्ट्रीय उद्यान की 10 वर्षीय बाघिन ने एक स्थानीय निवासी पर हमला कर उसे घायल कर दिया था. वह व्यक्ति घने जंगल में उस जगह घुस रहा था जहां बाघों की आवाज़ाही ज़्यादा होती है.

हालांकि वन अधिकारियों के मुताबिक हमलावर बाघिन ने इससे पहले किसी इंसान पर हमला नहीं किया था. फिर भी गुस्साए ग्रामीणों ने पहले तो वन रक्षक को पीटा. फिर ट्रेक्टर लेकर जंगल में अंदर घुस गए और बाघिन को पीट-पीटकर मार दिया. इस बाबत डीटीआर के मैदानी निदेशक (फील्ड डायरेक्टर) रमेश पांडे ने कहा, ‘यह साफ तौर पर बाघिन की हत्या का मामला है. हम मामले की जांच कर रहे हैं. आरोपितों को उनके किए की सज़ा दी जाएगी. वन कर्मचारियों पर हमला करने वालों पर भी हम मामला दर्ज़ कर रहे हैं.’