सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या पूरी योजना के साथ की गई थी. इस बात का प्रमाण इससे मिलता है कि उनके शव को ठिकाने लगाने के लिए सऊदी अरब की ओर से विशेषज्ञाें की एक टीम भी तुर्की की राजधानी इस्तांबुल भेजी गई थी. इसमें कैमिस्ट (रसायनशास्त्री) और टॉक्सिकोलॉजी (जहरीले पदार्थों के निस्तारण आदि का शास्त्र) के विशेषज्ञ थे.

तुर्की के एक अख़बार ने सोमवार को दावा किया कि खशोगी की हत्या के जुड़े सबूत मिटाने के मक़सद से विशेषज्ञों की यह टीम तुर्की राजधानी इस्तांबुल भेजी गई थी. इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास में ही जब खशोगी अपनी मंगेतर से संबंधित कागज़ात लेने गए थे तभी उन्हें भीतर ही मार दिया गया था. बताया जाता है कि उनकी हत्या सऊदी शाही परिवार के निकटस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी के इशारे पर की गई थी. हत्या के बाद उनके शव के कई टुकड़े कर उसे निपटाने की कोशिश की गई थी. वही अधिकारी इस हत्या का मुख्य साज़िशकर्ता था.

ग़ौरतलब यह भी है कि दुनियाभर की आलोचनाओं के बावज़ूद शुरू-शुरू में सऊदी अरब ने यह माना ही नहीं था कि खशोगी की हत्या की गई है. और बाद में जब माना भी तो उस घटना का पूरा विवरण देने से इंकार कर दिया. खशोगी अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट के लिए काम करते थे. उनकी दो अक्टूबर को हत्या की गई थी. तुर्की के अख़बार ‘सबाह’ दैनिक के मुताबिक खशोगी की हत्या के बाद उससे जुड़े सबूत मिटाने के लिए 11 अक्टूबर को सऊदी अरब ने 11 सदस्यों की टीम इस्तांबुल भेजी थी. यह टीम 20 अक्टूबर तक वहीं थी.