केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के दो शीर्ष अधिकारियाें- निदेशक आलोक वर्मा और नंबर दो अधिकारी राकेश अस्थाना के बीच झगड़ा अब तक निपट नहीं पाया है. नरेंद्र मोदी सरकार ने दोनों अफसरों को इसी वज़ह से जबरन छुट्‌टी पर भेजा हुआ है. इसके बाद मामला अदालत में भी पहुंच चुका है. इस झगड़े के तमाम कारण बताए जा रहे हैं. इनमें एक नया कारण अभी ये सामने आ रहा है कि इस विवाद का कोई ‘बंगाल कनेक्शन’ भी हो सकता है.

द इकॉनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पश्चिम बंगाल से जुड़े 25,000 कराेड़ रुपए ‘चिट फंड घोटाले’ की जांच भी देख रहे थे. इस मामले में वे कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार पर लगातार दबाव बढ़ा रहे थे. उन्हें एक साल के भीतर तीन समन भेजे जा चुके थे. इसका आधार उन्होंने ये बताया कि राजीव कुमार जांच में मदद नहीं कर रहे हैं. जबकि राजीव कुमार ने इसे ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया था क्योंकि इस घोटाले में विपक्ष के कई बड़े नेताओं के नाम हैं.

बताया जाता है कि राजीव कुमार को पहला समन पिछले साल अक्टूबर में भेजा गया. इसका उन्हाेंने ज़वाब भी दिया. इसमें उन्होंने कहा कि वे ई-मेल के ज़रिए सभी सवालों के ज़वाब देने काे तैयार हैं. ज़रूरत पड़ने पर इस बाबत बैठक में भी शामिल हाे सकते हैं. लेकिन अस्थाना चाहते थे कि वे (राजीव) ख़ुद जांच टीम के सामने पेश होकर सवालाें के ज़वाब दें. क्योंकि समन अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-160 के तहत जारी किया गया था, जिसमें बुलाए गए व्यक्ति के लिए ख़ुद पेश होना अनिवार्य माना जाता है.

लिहाज़ा जब पहले समन के बावज़ूद राजीव कुमार पेश नहीं हुए तो सप्ताहभर बाद ही दूसरा जारी कर दिया गया. इसके बाद राजीव कुमार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से शिकायत कर दी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि चार पुराने मामले की जांच के बहाने ‘राजनीति से प्रेरित’ होकर उन्हें परेशान किया जा रहा है. सूत्रों की मानें तो इस पर वर्मा ने अस्थाना से बात भी की पर उन्होंने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया. सात महीने बाद राजीव के साथ-साथ बंगाल के तीन अन्य अफसरों के नाम भी समन जारी कर दिए गए.

सूत्र बताते हैं कि तीसरी बार समन जारी होने से कुछ समय पहले ही अस्थाना कोलकाता होकर आए थे. इस सबसे भी आलोक वर्मा उनसे ख़ासे नाराज़ थे. ख़बर की मानें तो इसी दौरान दोनों अधिकारियों (वर्मा तथा अस्थाना) के बीच दरार और उस वक़्त बढ़ गई जब अस्थाना ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर वर्मा की शिकायत कर दी. इसके बाद यह दरार लगातार चौड़ी ही होती गई.