सबरीमला मंदिर में आज सुबह एक बार फिर नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला. पीटीआई के मुताबिक करीब 200 गुस्साए श्रद्धालुओं ने एक महिला श्रद्धालु को रजस्वला आयु वर्ग की होने के संदेह के चलते घेर लिया और मंदिर में जाने से रोका. इस दौरान वे ‘अयप्पा शरणम’ का मंत्रोच्चारण करते रहे और तालियां बजाते रहे.

खबर के मुताबिक तिरुर से 52 वर्षीय ललिता अपने पोते के ‘चोरुन्नु’ (चावल दान करने का संस्कार) के लिए 19 रिश्तेदारों के साथ मंदिर पहुंची थीं. वह ‘नादापंडाल’ के समीप थीं जब उनके समूह को प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया. यह देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और महिला की उम्र निश्चित करने के बाद प्रदर्शनकारियों को बताया कि वह ‘प्रतिबंधित’ आयु वर्ग की नहीं हैं. इसके बाद पुलिस महिला को वहां से ले गई.

बाद में ललिता ने तबियत ठीक नहीं होने की शिकायत की जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. हालांकि कुछ देर बाद मंदिर लौट कर उन्होंने और उनके परिवार ने भगवान अयप्पा के दर्शन किए. उसके बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने उन्हें परेशान किया. ललिता ने कहा कि उन्होंने ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की थी. वहीं, स्थानीय मीडिया चैनलों के मुताबिक पत्रकारों को भी मंदिर परिसर में जाने से रोका गया. हालांकि पुलिस ने इस तरह की किसी भी घटना से इनकार किया है.

बता दें कि सोमवार को मंदिर के द्वार दो दिन के लिए फिर खोले गए. इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए करीब 2300 सुरक्षाकर्मियों, 20 कमांडो और सौ महिला पुलिसकर्मियों की टीम की तैनाती की गई. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के सभी महिलाओं को सबरीमला मंदिर में प्रवेश देने के फैसले के बाद मंदिर को 17 अक्टूबर को पहली बार छह दिन के लिए खोला गया था. लेकिन हिंसक झड़पों और प्रदर्शनों के चलते इस आयु वर्ग की कोई भी महिला मंदिर के प्रांगण में प्रवेश नहीं कर सकी.