‘आगामी आम चुनाव के दौरान राहुल गांधी को विपक्षी दलों के गठबंधन का नेतृत्व करना चाहिए.’  

— एचडी कुमारस्वामी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री

एचडी कुमारस्वामी ने यह बात कर्नाटक के उपचुनाव में जनता दल सेक्यूलर (जेडीएस) व कांग्रेस गठबंधन को मिली सफलता के मौके पर कही. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को ‘निश्छल’ नेता बताते हुए एचडी कुमारस्वामी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘प्रभाव’ अब पहले जैसा नहीं रह गया है. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि बीते कुछ महीनों में हुई मुलाकातों के दौरान राहुल गांधी उन्हें सच्चे और ईमानदार नेता लगे हैं.

‘आरबीआई एक सीट बेल्ट की तरह है, यह सरकार की मर्जी है कि वह इसे पहनना चाहती है या फिर उतारना.’

— रघुराम राजन, रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया के पूर्व गवर्नर

रघुराम राजन का यह बयान केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) के बीच चल रहे टकराव पर आया है. आरबीआई की स्वायत्ता का समर्थन करते हुए उन्होंने यह भी कहा है, ‘मौजूदा परिस्थितियों में आरबीआई की भूमिका राहुल द्रविड़ की तरह गंभीर फैसले करने वाले की होनी चाहिए न कि नवजोत सिंह सिद्धू की तरह बयानबाजी करने वाले की. रघुराम राजन का यह भी कहना है कि चालू खाता घाटा (सीएडी) के समाधान के लिए अल्पकालिक कदम उठाए जाने से समस्याएं खड़ी होंगी और ऐसे में देश को और अधिक खुली अर्थव्यवस्था की जरूरत है. इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और आरबीआई को बातचीत के जरिये आपसी विवाद सुलझाने की सलाह भी दी है.


‘केंद्र सरकार अपनी दबंग नीति से देश की संस्थाओं को बर्बाद कर रही है.’  

— राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष

राहुल गांधी ने यह बात नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट के जरिये कही है. इस ट्वीट में राहुल गांधी ने यह भी लिखा है, ‘प्रधानमंत्री को अपने ‘विलक्षण आर्थिक सिद्धांतों’ की वजह से पैदा हुई अव्यवस्था को ठीक करने के लिए अब रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) से 3.60 लाख करोड़ रुपये की जरूरत पड़ गई है. ऐसे में आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल को नरेंद्र मोदी के सामने डटकर खड़े होने की जरूरत है. इससे पहले केंद्र सरकार ने आरबीआई के पास जमा सरप्लस अमाउंट (अतिरिक्त रकम) में से 3.60 लाख करोड़ रुपये अपने खाते में जमा कराने का प्रस्ताव रखा था.

‘असली दीवाली तब मनेगी जब केंद्र में कुशासन का खात्मा होगा.’  

— चंद्रबाबू नायडू, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री

चंद्रबाबू नायडू ने यह बात दीवाली के मौके पर जनता को दिए अपने संदेश में केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार पर निशाना साधते हुए कही है. दीवाली को दीयों की कतार और रोशनी का पर्याय बताते हुए चंद्रबाबू नायडू ने यह भी कहा है कि जनता की आंखों में चमक देखना ही उनके लिए दीवाली के असली मायने है.