पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुताबिक किसी भी सूरत में वित्तीय और आर्थिक मामलों पर फैसला लेने के लिए देश के वित्त मंत्री ही सबसे ऊपर होते हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) या उसके गवर्नर वित्त मंत्री के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकते. मनमोहन ख़ुद आरबीआई गवर्नर और केंद्रीय वित्त मंत्री जैसे पदों पर रह चुके हैं.

अपनी बेटी दमन सिंह की लिखी किताब ‘स्ट्रिक्टली पर्सनल : मनमोहन एंड गुरशरण’ में पूर्व प्रधानमंत्री ने आरबीआई गवर्नर के तौर पर अपने अनुभव बताए हैं. यह किताब 2014 में आई थी. उन्होंने कहा, ‘मुझे भी सरकार को भरोसे में लेना पड़ता था. सरकार और आरबीआई के संबंध हमेशा परस्पर लेन-देन पर आधारित होते हैं. आरबीआई गवर्नर वित्त मंत्री से ऊपर नहीं होते. इसीलिए अगर वित्त मंत्री किसी मसले पर जोर देते हैं तो आरबीआई गवर्नर को मानना पड़ता है. आरबीआई गवर्नर पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं तो वे वित्त मंत्री को इंकार नहीं कर सकते.’

ग़ौरतलब है आरबीआई के स्वायत्तता को लेकर मोदी सरकार के साथ इस केंद्रीय बैंक और उसके गवर्नर का टकराव चल रहा है. स्थिति यह है कि आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल का सरकार से संपर्क-संवाद तक काफी समय से लगभग टूट चुका है. इसी टकराव के मद्देनजर मनमोहन सिंह की यह राय अहम हो जाती है. हालांकि इसी मसले पर आरबीआई के एक अन्य पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की राय अलग है. उन्होंने आरबीआई और उर्जित पटेल का समर्थन किया है. उनका कहना है, ‘आरबीआई बोर्ड (इसमें सरकार की ओर से नियुक्त आर्थिक विशेषज्ञ होते हैं जो बैंक को सलाह देने का काम करते हैं) को केंद्रीय बैंक के राेजमर्रा के कामकाज़ में दख़लंदाज़ी नहीं करनी चाहिए.’