एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई के अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई ने ख़ुद माना था कि सबरीमला स्थित भगवना अयप्पा के मंदिर में विरोध प्रदर्शन की योजना उन्हीं लोगों ने बनाई थी. ख़बरों के अनुसार भाजपा व उसकी मातृ संस्था- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) यह सब मंदिर से जुड़ी परंपराओं की रक्षा के लिए कर रहा है. लेकिन अब द टाइम्स ऑफ इंडिया की मानें तो आरएसएस-भाजपा के कार्यकर्ताा ही सबरीमला मंदिर की एक अहम परंपरा तोड़ते पाए गए हैं.

ख़बर के मुताबिक अयप्पा मंदिर मंगलवार को फिर लगभग 24 घंटे तक खुला रहने के बाद बंद हो गया. इससे पहले मंगलवार की सुबह ही यह अफ़वाह फैली कि 50 साल से कम उम्र की कुछ महिलाएं मंदिर की तरफ बढ़ रही हैं. लिहाज़ा उन्हें रोकने को आरएसएस-भाजपा के कार्यकर्ता मंदिर की उन 18 सीढ़ियाें पर चढ़ गए जिन्हें परंपरा में बेहद पवित्र माना जाता है. इन सीढ़ियाें पर भगवान अयप्पा के भक्त को सिर पर गुंडी (इसे इरुमुडी) रखे बिना चढ़ने की इजाज़त नहीं होती. लेकिन विरोध करने वाले सभी कार्यकर्ता उसके बिना ही सीढ़ियों पर तैनात थे.

आरएसएस के पदाधिकारी वलसन तिलंकेरे तो पुलिस के माइक का इस्तेमाल करते हुए यहीं से कार्यकर्ताओं को निर्देश भी दे रहे थे. यहां तक कि त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के सदस्य शंकर दास भी मंदिर की सीढ़ियों पर बिना इरुमुडी के खड़े दिखाई दिए. जबकि ये सभी कार्यकर्ता मंदिर की उस परंपरा की कथित तौर पर रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं जिसके तहत 10 से 50 साल की महिलाअों को भगवान अयप्पा के दर्शन-पूजा की इजाज़त नहीं होती. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह इजाज़त दे दी है लेकिन प्रदर्शनकारी इस आदेश को लागू नहीं होने दे रहे हैं.

दिलचस्प बात है कि केरल भाजपा के अध्यक्ष पिल्लई यह मान भी चुके हैं कि यह विरोध-प्रदर्शन योजनाबद्ध है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उनका एक ऑडियो टेप सामने आया था. इसमें वे यह कहते हुए सुने जा सकते हैं, ‘विरोध प्रदर्शन की योजना करीब-करीब आरएसएस-भाजपा की ही थी. बाद में एक-एक कर सभी ने उसका अनुसरण ही किया. सब उसी एजेंडे पर चले.’ इस ख़ुलासे के बाद राज्य की सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव के बालाकृष्णन ने इस मामले की ‘उच्च स्तरीय जांच की मांग’ कर दी है.