केंद्र सरकार के साथ चल रहे टकराव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अब डिजिटल लेन-देन से जुड़े मामलों के लिए अलग से लोकपाल स्थापित कर सकता है. द इकॉनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इस तरह की विचार प्रक्रिया से वाक़िफ़ बैंकिंग उद्योग के दो वरिष्ठ सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है.

अख़बार के मुताबिक डिजिटल भुगतान कंपनियों की लगातार बढ़ती संख्या के साथ उनके लेन-देन से जुड़े व्यवहार काे लेकर शिकायतें भी बढ़ रही हैं. इन शिकायतों का निपटारा अभी बैंकिंग लोकपाल द्वारा ही किया जाता है, जिनके पास बैंकिंग उद्योग की शिकायतें निपटाने का काम पहले से ही है. ऐसे में डिजिटल लेन-देन के मामलों के लिए अलग से लोकपाल की ज़रूरत महसूस की जाने लगी है. और सूत्रों की मानें तो यह नियुक्ति अगले साल के शुरू में ही हो सकती है.

सूत्र बताते हैं कि डिजिटल लेन-देन के मामलों के लोकपाल भी बैंकिंग लोकपाल की तरह काम करेंगे. बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 में आई थी. इसके तहत आरबीआई के मुख्य महाप्रबंधक या महाप्रबंधक स्तर के एक अधिकारी को लोकपाल बनाया जाता है. उनके पास उपभोक्ता बैंकों से जुड़े मामलों की शिकायत करते हैं. इन शिकायतों के लिए मापदंड तय हैं, उन्हीं के तहत शिकायतें ली और निपटाई जाती हैं. यही व्यवस्था डिजिटल लेन-देन से जुड़े मामलों के लोकपाल के मामले में भी हो सकती है.

यही नहीं, आरबीआई डिजिटल लेन-देन के बहाने होने वाली धोखाधड़ी की सूचना हासिल करने और उसे रोकने के लिए भी एक ढांचा बनाने की योजना बना रहा है. ताकि इस धोखाधड़ी को रोका जा सके और लोगों का भरोसा डिजिटल लेन-देन पर बढ़े तथा मज़बूत हो. इस बाबत अख़बार से सीधे आरबीआई से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश भी की. लेकिन उसकी ओर से कोई ज़वाब नहीं दिया गया.