अगले साल होने जा रहे लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे को एक बार फिर जोर-शोर से उठाया जा रहा है. भाजपा और आरएसएस के नेताओं ने हाल में कई बार कहा कि इस साल अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हर हाल में शुरू हो जाएगा. लेकिन भगवान राम और उनके मंदिर को लेकर अयोध्यवासी क्या सोचते हैं, इस पर पीटीआई की एक रिपोर्ट कुछ और जानकारी देती है. रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या के कई बाशिंदों का कहना है कि विवादित स्थल को नेताओं के लिए अखाड़ा नहीं, बल्कि बच्चों के लिए खेल के मैदान में तब्दील करना चाहिए.

रिपोर्ट कहती है कि अयोध्या के लोग सांप्रदायिकता के साये में रहते हुए थक चुके हैं. विजय सिंह और मोहम्मद आजिम अयोध्यावासी हैं. वे नहीं चाहते कि इस मुद्दे पर अब और राजनीति हो जिससे सौहार्दपूर्ण माहौल बिगड़े. पेशे से डॉक्टर विजय सिंह राम जन्म भूमि के पास ही रहते हैं. वे कहते हैं कि अगर मंदिर बनाए जाने से वहां दो समुदायों के बीच सौहार्द कम होता है, तो वह इसके पक्ष में नहीं हैं.

सिंह ने बताया कि छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा ढहाए जाने के दिन वह अयोध्या में ही थे. उन्होंने कहा कि अयोध्या के लोग सदियों से शांतिपूर्ण ढंग से और सांप्रदायिक सद्भाव के साथ रहे हैं लेकिन, नेताओं ने अपना मकसद पूरा करने के लिए सांप्रदायिक आग लगा दी. उन्होंने कहा कि 1992 में मस्जिद का ढांचा गिराने के लिए कई लोग बाहर से आए थे. डॉक्टर विजय ने कहा कि यह बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है जो आज तक अयोग्ध्या को प्रभावित कर रही है.

शहर के कई लोगों की तरह ही सिंह भी भगवान राम के भक्त हैं और पास के सुग्रीव किले में उनके क्लीनिक के दरवाजे पर ‘जय श्री राम ‘ लिखा हुआ है. राम जन्मभूमि जाने के रास्ते में वह और उनकी पत्नी श्रद्धालुओं की मेडिकल मदद के लिए एक अस्थायी शिविर चलाते हैं. विजय सिंह कहते हैं, ‘यदि राम मंदिर के निर्माण से दो समुदायों के बीच वैमनस्य आता है तो मैं इसके पक्ष में नहीं हूं. इसके बजाय मुझे लगता है कि विवादित स्थल को खेल के मैदान में तब्दील कर देना चाहिए जहां सभी धर्म के बच्चे साथ खेल सकें.’

देश के कई हिस्सों में और विदेश में सॉफ्टवेयर इंजीनियर का काम करने वाले अयोध्यावासी विवेक त्रिपाठी भी कुछ ऐसी ही राय रखते हैं. वे दिवाली मनाने के लिए अपने परिवार के साथ अयोध्या में थे. उन्होंने 1992 के भयावह दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि उस समय वे एक स्कूली बच्चे थे. विवेक के मुताबिक राम मंदिर आंदोलन और मस्जिद गिराए जाने की घटना के व्यापक असर को उन्होंने तब जा कर समझा जब बड़े होने पर उन्होंने इस बारे में पढ़ा. विवेक ने कहा, ‘हम एक ऐसे मुद्दे को पुनर्जीवित करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं जो कुछ अप्रिय स्थिति पैदा करती हो. सांप्रदायिक सौहार्द जरूरी है और हम नहीं चाहते कि वहां कुछ भी बनाया जाए. हम सिर्फ बच्चों के लिए खेल का मैदान चाहते हैं, न कि राजनीति के लिए अखाड़ा.’

शहर के एक और निवासी 46 वर्षीय मोहम्मद आजम ने कहा कि यहां हिंदू और मुसलमान हमेशा से शांति से रहते आए हैं. आजम ने आरोप लगाया कि नेता और बाहरी तत्व राजनीतिक फायदे के लिए दोनों समुदायों के बीच एक दरार पैदा करना चाहते हैं. वहीं, राम जन्म भूमि के पास एक पेड़ के नीचे अपनी दुकान चलाने वाले और पेशे से ज्योतिषी 45 वर्षीय राम लोचन ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि मंदिर बने, लेकिन बच्चों के लिए खेल का मैदान भी बढ़िया रहेगा. आखिरकार, राम लला भगवान राम के बाल अवतार ही तो हैं.’