भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री सरताज सिंह गुरुवार को कांग्रेस में शामिल हो गए. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सरताज सिंह भाजपा की टिकट पर सिवनी मालवा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन 75 साल से अधिक उम्र होने की वजह से पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था. इसी को लेकर नाराज सरताज सिंह ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया और अब वे कांग्रेस की ही टिकट पर होशंगाबाद से चुनाव लड़ेंगे.

78 वर्षीय सरताज सिंह को उनकी उम्र की वजह से ही बीते दिनों शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल से भी हटना पड़ा था. हालांकि उस वक्त भी उन्होंने घोषणा की थी कि अगर आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा उन्हें टिकट नहीं देती तो वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगे. इस बीच कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा है कि भाजपा के लोग अब अगर उनके घर आकर भी उन्हें टिकट देंगे तो यह उन्हें मंजूर नहीं होगा. साथ ही कांग्रेस के टिकट पर वे शुक्रवार को अपना पर्चा दाखिल करेंगे.

इस दौरान ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही थीं ​कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर या उनकी बहू कृष्णा गौर राज्य की ​गोविंदपुरा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर ताल ठोक सकते हैं. साथ ही यह भी कहा जा रहा था कि ऐसी सूरत में कांग्रेस उन्हें अपना समर्थन देगी. हालांकि भाजपा की तरफ से जारी प्रत्याशियों की तीसरी सूची में पार्टी ने गोविंदपुरा विधानसभा सीट से कृष्णा गौर को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है.

उधर, भाजपा के अलावा कांग्रेस को भी मध्य प्रदेश में बगावत का सामना करना पड़ा है. न्यूज 18 के मुताबिक कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता व राज्य के दिग्गज नेताओं में से एक सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन चतुर्वेदी समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए हैं. साथ ही सपा के टिकट पर ही उन्होंने राजनगर सीट से अपना पर्चा भी दाखिल कर दिया है. इससे पहले वे कांग्रेस से इसी सीट के लिए टिकट की मांग कर रहे थे.

कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में राजनगर से अपना पर्चा दाखिल करते हुए
कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में राजनगर से अपना पर्चा दाखिल करते हुए

इस दौरान सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कांग्रेस पर इस विधानसभा चुनाव में भी 15 साल पुरानी गलतियां दोहराने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पार्टी के अन्याय के खिलाफ वे जनता की अदालत में जाएंगे और एक पिता के तौर पर अपने बेटे का हर जरूरी सहयोग भी करेंगे. खबरों के मुताबिक राज्य के ब्राह्मण मतदाताओं में सत्यव्रत चतुर्वेदी की गहरी पकड़ है. ऐसे में सत्यव्रत चतुर्वेदी का अपने बेटे के समर्थन में उतरना कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.