पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक भालू शावक (भालू का बच्चा) अपनी मां के पीछे-पीछे बर्फीले पहाड़ पर ऊपर की ओर चढ़ रहा है. पहले तो वह अपनी इस कोशिश में लगातार असफल होता है, लेकिन अंत में वह किसी तरह ऊपर चढ़कर अपनी मां तक पहुंच जाता है. इस वीडियो को विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने के संदेश के साथ सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है. लेकिन सच्चाई यह है कि यह वीडियो इंसानों द्वारा वन्यजीवों के सुरक्षित परिवेश में दखल के कारण उत्पन्न होने वाली भयावह स्थिति को दुनिया के सामने ला रहा है.

न्यूज चैनल अल जज़ीरा ने गुरुवार को अपनी एक फेसबुक पोस्ट के जरिए वीडियो के इसी दूसरे पहलू को उजागर किया है. इस पोस्ट के मुताबिक यह वीडियो के रूस के मगादान (रूस के उत्तर-पूर्व में स्थित साइबेरिया का एक इलाका जो अक्सर बर्फ से ढका रहता है) शहर का है. इस वीडियो पोस्ट में न्यूज चैनल ने ड्रोन पायलटों के हवाले से बताया है कि भालू के बच्चे की जान को खतरे में डालने वाली यह स्थिति किसी ड्रोन पायलट के बेहद गैरजिम्मेदाराना रवैये के कारण उत्पन्न हुई थी.

वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि मादा भालू का चोटी की तरफ भागना अकारण नहीं था. वह ड्रोन को देखकर डर गई थी और किसी अप्रिय घटना की आशंका के चलते वो और उसका शावक वहां से भागने लगे. वहीं मादा भालू के डर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उसने ड्रोन को अचानक नजदीक आते देखा तो पहाड़ की चोटी पर पहुंचने वाले अपने बच्चे को वापस नीचे की ओर धकेल दिया. हालांकि उसका हाथ अपने बच्चे तक नहीं पहुंचा, फिर भी वह फिसलकर काफी नीचे पहुंच गया था. इसके बाद जब ड्रोन पीछे गया और उसका बच्चा फिर से मशक्कत करके ऊपर तक पहुंचा तब कहीं जाकर वे मिले और ड्रोन को दहशतभरी नजरों से देखने के बाद तेजी से जंगल की तरफ दौड़ गए.

वहीं इस वीडियो को अपने ड्रोन कैमरे में कैद करने वाले दिमित्री केद्रोव ने अपनी वीडियो का बचाव करते हुए आलोचनाओं का जवाब दिया है. बीबीसी ने एक रुसी वेबसाइट के हवाले से उनका बयान छापा है. दिमित्री केद्रोव का कहना है कि उन्होंने शूटिंग के दौरान भालू और उसके बच्चे के लिए किसी भी प्रकार की बाधा नहीं उत्पन्न की थी. ड्रोन को जानवरों के काफी करीब ले जाने वाली बात पर भी उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि वह ज़ूम इफेक्ट (जिससे विषय-वस्तु नजदीक और बड़ी दिखती है) के कारण हैं. जो कि एडिटिंग के दौरान वीडियो में डाला गया है.

जीव वैज्ञानिक इन दिनों जानवरों पर शोध करने के लिए व्यापक स्तर पर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. उनके लिए जिस जानवर के पास पहुंचना मुश्किल होता है वे उस तक ड्रोन की मदद से पहुंचते हैं. वहीं दूसरी तरफ जानवर ड्रोन या अन्य हवाई मशीनों से अंजान होने के कारण इनसे डरते हैं. ऐसे में कई बार जानवर पहले से ज्यादा हिंसक और उग्र हो जाते हैं. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार वन्य जीवन में दखल देना उस क्षेत्र के आस-पास रहने वाले लोगों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है.