रूस में तालिबान के साथ होने वाली शांति वार्ता में भारत के शामिल होने पर बढ़े विवाद को लेकर विदेश मंत्रालय ने सफाई दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेस में कहा कि भारत इस बैठक में गैर-आधिकारिक तौर पर शामिल हो रहा है और वह तालिबान से कोई बातचीत नहीं करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत उन सभी प्रयासों में शामिल होंगा जिनमें अफगानिस्तान शामिल होगा और उसकी बेहतरी की बात होगी.

इससे पहले इस बैठक में भारत के शामिल होने की खबर पर केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री अमर अब्दुल्ला ने एक ट्वीट में कहा था, ‘अगर मोदी सरकार को तालिबान के साथ गैर-आधिकारिक स्तर पर बातचीत मंजूर है तो जम्मू कश्मीर में मुख्य धारा से अलग संगठनों से इस तरह की बातचीत क्यों नहीं हो सकती.’

इससे पहले विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस बात की पुष्टि की थी कि भारत रूस में आयोजित इस बैठक में हिस्सा लेगा. भारत के अतिरिक्त इस बैठक में अमेरिका, चीन और पाकिस्तान भी हिस्सा ले रहे हैं. रूसी मीडिया के अनुसार इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए रूस ने कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान को भी बुलाया है. यह पहली बार है जब भारत आधिकारिक या ग़ैर-आधिकारिक तौर पर तालिबान के साथ कोई मंच साझा करेगा.