भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक संगीत सोम का नाम भी अब उन नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो गया है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में शहरों और जिलों के नाम बदले जाने की मांग कर रहे हैं. एएनआई के मुताबिक शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का नाम बदलने की मांग करते हुए उन्होंने कहा है, ‘अभी कई शहरों के नाम बदले जाने हैं. मुजफ्फरपुर का नाम बदलकर लक्ष्मीनगर किए जाने के लिए यहां के लोग पहले से ही मांग कर रहे हैं. मुजफ्फरनगर का नाम एक नवाब मुजफ्फर अली ने दिया था. लोगों की मांग है कि इसका नाम लक्ष्मीनगर किया जाए.’

इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा है, ‘मुगलों ने यहां की संस्कृति को मिटाने का काम किया है. खास तौर से हिंदुत्व को मिटाने का. हम लोग उस संस्कृति को बचाने के लिए काम कर रहे हैं और भाजपा इस दिशा में आगे बढ़ेगी.’

देश में किसी शहर या जिले का नाम बदलने को लेकर यह कोई पहली मांग नहीं है. बीते कई वर्षों से शिव सेना महाराष्ट्र के औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर व उस्मानाबाद का नाम धारशिव करने की मांग कर रही है. हाल में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से इलाहाबाद और फैजाबाद का नाम बदले जाने के मद्देनजर शिव सेना के नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार से सवालिया लहजे में कहा था कि महाराष्ट्र के इन दोनों शहरों का नाम बदलने के लिए वह उत्तर प्रदेश सरकार की तरह कब फैसला करेगी.

इस दौरान गुजरात सरकार भी अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती करने पर विचार कर रही है. वहीं गुरुवार को तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा नेता टी राजा सिंह ने कहा कि अगर राज्य में उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर किया जाएगा. उनका यह भी कहना था कि 16वीं सदी में इस क्षेत्र पर शासन करने वाले कुतुबशाही वंश के शासकों ने भाग्यनगर का नाम बदलकर हैदराबाद कर दिया था.

उधर, विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार विकास के मुद्दे पर पूरी तरह असफल रही है इसलिए अब अपनी असफलता छुपाने के लिए वह शहरों के नाम बदलने के मुद्दे को उछालकर मुख्य समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. इस बीच कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रेणुका चौधरी ने टी राजा सिंह पर तंज कसते हुए कहा है​ कि उन्हें अपना नाम बदलने पर विचार करना चाहिए और उनके ऐसा करने से किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी.