आम तौर पर किसी भी चुनाव में राजनीतिक दलों के अभियान का पहिया जनता से जुड़े मुद्दों की धुरी पर घूमता है. लेकिन, इस बार छत्तीसगढ़ प्रमुख चेहरे भी चुनाव की दशा और दिशा तय करते दिख रहे हैं. सूबे के करीब 1.85 करोड़ मतदाताओं के सामने हैं भाजपा के डॉ. रमन सिंह, राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी और ‘हाथ’ का निशान. ‘हाथ’ का निशान इसलिए कि प्रमुख विपक्षी पार्टी ने अब तक अपनी ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा पेश नहीं किया है. इस बात को लेकर सत्ताधारी भाजपा लगातार कांग्रेस को घेर भी रही है. सत्ता पक्ष का दावा है कि डॉ. रमन सिंह के सामने मुख्य विपक्षी पार्टी के पास कोई चेहरा नहीं है. वहीं, कांग्रेस रमन सिंह सरकार की नाकामयाबियों की बात करके अपना 15 साल लंबा ‘वनवास’ खत्म करने की उम्मीद में दिख रही है. उधर, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रमुख अजीत जोगी सूबे के लोगों को तीसरा विकल्प देने का दावा कर रहे हैं. इस कोशिश में उनके साथ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती भी हैं.

डॉ. रमन सिंह : सूबे में भाजपा की सेहत दुरुस्त रखने वाले डॉक्टर

बीते 15 वर्षों से सूबे में रमन सिंह राज्य में भाजपा के सबसे विश्वसनीय चेहरे साबित हुए हैं. उनकी पार्टी के चुनावी अभियान का केंद्र उनकी सरकार के दौरान किए गए काम ही हैं. 66 वर्षीय रमन सिंह खुद यह बात कहते हैं कि इस विधानसभा चुनाव को केंद्र की मोदी सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह न माना जाए. यानी वे 11 दिसंबर को आने वाले चुनावी नतीजे की जवाबदेही लेने को तैयार दिखते हैं. उनके इस दावे को थोड़ा बल इससे भी मिलता है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान की भाजपा सरकारों के खिलाफ जितनी मजबूत सत्ता विरोधी लहर की बात की जा रही है, उतनी डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ नहीं दिख रही.

राजनीति में आने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर रह चुके रमन सिंह ने पार्टी नेतृत्व का विश्वास अपने ऊपर बनाए रखने में कामयाबी हासिल की है. राज्य में ‘चावल वाले बाबा’ के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले रमन सिंह सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों को अपनी सरकार की उपलब्धियों में शामिल करते हैं. साथ ही, उनका दावा है कि भाजपा सरकार के दौरान सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के मामले में भी काफी काम हुआ है. इसके अलावा भाजपा का दावा है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी विकास के जरिए इस समस्या से निपटने में कामयाबी मिली है. हालांकि, हालिया दिनों में नक्सलियों की हिंसक गतिविधियों की वजह से रमन सिंह एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं.

अजीत जोगी : उम्मीदों के चौराहे पर

छत्तीसगढ़ में अब तक हुए विधानसभा चुनावों में अजीत जोगी कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहे हैं. चेहरा तो वे इस बार के चुनाव में भी हैं लेकिन इस बार उनकी रणनीति खुद को भाजपा और कांग्रेस से अलग तीसरे विकल्प के रूप में पेश करने की है. साल 2014 में कांग्रेस से अलग होने के बाद अजीत जोगी ने अपनी अलग पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का गठन किया. उनकी इस पार्टी के बसपा और सीपीआई के साथ चुनावी गठबंधन ने इस चुनाव को चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है.

माना जा रहा है कि अगर इस बार जनता ‘खिचड़ी जनादेश’ देती है तो सत्ता की चाबी अजीत जोगी के पास जा सकती है. इस चुनाव में उनकी प्रमुख ताकत जातीय समीकरण बताए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि बसपा और सीपीआई के साथ आने की वजह से सूबे की आदिवासी और दलित प्रभुत्व वाली सीटों पर यह गठबंधन कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकता है. हालांकि, चुनावी नतीजों के बाद भाजपा का खेल बिगाड़ने के लिए कांग्रेस अजीत जोगी को आगे बढ़ाने पर मजबूर हो सकती है. पार्टी ने इस साल कर्नाटक में यही चाल चलकर भाजपा को रणनीतिक मात दी थी.

कांग्रेस : ‘स्वयंवर’ के इंतजार में

साल 2013 में एक माओवादी हमले में अपना शीर्ष नेतृत्व खोने वाली कांग्रेस अभी भी इस चुनौती से जूझ रही है. भाजपा के डॉ. रमन सिंह को मुकाबला देने के लिए पार्टी के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं दिखता. हालांकि, पार्टी की मानें तो सूबे की कमान संभालने के लिए उनके पास कई योग्य नेता हैं. बीते अगस्त में विधानसभा में कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने मुख्यमंत्री पद उम्मीदवार को लेकर कहा था कि विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ‘स्वयंवर’ के जरिए इसका चयन करेगी. जानकारों के मुताबिक इस ‘स्वयंवर’ में वे खुद एक उम्मीदवार हैं. साथ ही, उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत भी हैं.

इसके अलावा कांग्रेस नेतृत्व ने अपनी तीसरी और आखिरी सूची में दुर्ग-ग्रामीण सीट से पहले से घोषित उम्मीदवार प्रतिभा चंद्राकर का टिकट काटकर ताम्रध्वज साहू को चुनावी दंगल में उतार दिया है. ताम्रध्वज साहू फिलहाल छत्तीसगढ़ से एकमात्र लोक सभा सांसद हैं. साथ ही, वे पार्टी के राष्ट्रीय ओबीसी सेल के प्रमुख होने के अलावा कांग्रेस कार्यकारिणी में भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि कांग्रेस को यदि जनादेश मिलता है तो ताम्रध्वज साहू मुख्यमंत्री पद के लिए मजबूत उम्मीदवार हो सकते हैं.