देश की तटीय सुरक्षा जांचने के लिए संभवत: पहली बार समग्र परीक्षण की तैयारी की जा रही है. हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि अगले साल की शुरूआत में यह परीक्षण हो सकता है. भारतीय नौसेना इसकी अगुवाई कर सकती है.

अख़बार के मुताबिक आगामी परीक्षण का नाम ‘सी विजिल’ (समुद्री निगरानी) हो सकता है. इसमें भारतीय नौसेना की अगुवाई में समुद्री और तटीय सुरक्षा से जुड़ी नौ एजेंसियां भाग ले सकती हैं. इसके जरिए यह जांचने की कोशिश की जाएगी कि 2008 में मुंबई पर हुए 26/11 जैसे आतंकी हमले या किसी अन्य हमले जैसी परिस्थिति का सामना करने के लिए भारतीय सैन्य और सुरक्षा बल कितने तैयार हैं. रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इस तैयारी की पुष्टि की है.

उन्होंने बताया कि समुद्री और तटीय सुरक्षा में तैनात रक्षा-प्रतिरक्षा बल कितने तैयार हैं, उनके बीच समन्वय कैसा है, वे कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं, किस रफ़्तार से प्रतिआक्रमण करते हैं, ये तमाम बिंदु परीक्षण की कसौटी होंगे. इसमें 46 तटीय रडार स्टेशन, 74 नेशनल ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम चेन स्टेशन, मुंबई-कोच्चि-विज़ाग-पोर्ट ब्लेयर में स्थित चार संयुक्त संचालन केंद्र, गुरुग्राम में मौज़ूद नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर आदि सभी परीक्षण में शामिल रहेंगे.

इनके अलावा व्यावसायिक जहाजों का नियंत्रण करने वाली एजेंसी- डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग, समुद्र में आने-जाने वाले जहाजों का रास्ता प्रशस्त करने वाली एजेंसी- डायरेक्टर जनरल ऑफ लाइटहाउसेस एंड लाइटशिप्स, तटीय राज्यों की मरीन पुलिस, इंडियन कोस्टगार्ड, सभी ख़ुफ़िया एजेंसियां, कस्टम डिपार्टमेंट, संबंधित राज्यों की स्थानीय पुलिस और यहां तक कि मछुआरों को परीक्षण हिस्सा बनाया जाएगा. परीक्षण के दौरान इन सभी भागीदारों को किसी औचक हमले की स्थिति से निपटना होगा. इसके बारे में इन्हें पहले से कोई सूचना तो क्या सुराग भी नहीं या दिया जाएगा. चुनौती किस दिन-तारीख़ को पेश की जाएगी यह भी किसी को पता नहीं होगा.