दिल्ली में हवा की गुणवत्ता लगातार चिंता का सबब बनी हुई है. वायु गुणवत्ता एवं मौसम पूर्वानुमान और शोध (सफर) की ओर से शनिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 440 दर्ज किया गया जो ‘गंभीर’ की श्रेणी में आता है. सफर के मुताबिक हवा में पीएम 2.5 (सूक्ष्म) कणों की मात्रा 330 दर्ज की गई है. यह स्थिति भी ‘गंभीर’ की श्रेणी में आती है. सफर के मुताबिक आने वाले दिनों में हवा में पीएम 2.5 कणों की मात्रा बढ़ सकती है.

दिल्ली में वायु की गुणवत्ता हवा की गति पर निर्भर करती है जिसमें दीवाली से पहले कुछ सुधार देखने को मिला था. लेकिन फिर से हवा की रफ्तार कम होने और सेटेलाइट से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटों में खेतों में पराली जलाने के मामलों में आई तेजी से दिल्ली में हालात और गंभीर हो सकते हैं. वहीं, एनआई ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि दिल्ली में हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करने में सबसे ज्यादा योगदान वाहनों से निकलने वाले धुएं का है.

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआं क्रमश: 40 प्रतिशत और 48 प्रतिशत बढ़ गया है. वहीं, दिल्ली में प्रदूषण के लिए दोषी ठहराई जानी वाली ‘धूल’ की मात्रा में 2010 के मुकाबले 2018 में 26 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में वाहनों की संख्या एक करोड़ से अधिक है और इसमें हर साल बढ़ोतरी हो रही है. वाहनों से होने वाले प्रदूषण में 40 से 45 प्रतिशत दोपहिया और 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा चार पहिया वाहनों का है.

वायु प्रदूषण को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन उपाय लागू किए हुए हैं. इनके तहत राजधानी में कुछ हफ्तों के लिए निर्माण संबंधी गतिविधियों को रोक दिया गया है. उधर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिनों-दिन गंभीर होती प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली में कृत्रिम बारिश करवाने पर भी विचार कर रहा है.