कर्नाटक में शनिवार को 18वीं सदी के मैसुरु रियासत के शासक टीपू सुल्तान की जयंती मनाई गई. लेकिन विरोध, निषेध और सुरक्षा की सख़्ती के साथ. इस दौरान कई जगहों पर जयंती समारोह का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं काे ग़िरफ़्तार भी किया गया.

टीूप सुल्तान को ‘धार्मिक रूप से कट्‌टर’ छवि वाला शासक बताते हुए मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी संगठनों ने इस समारोह का विरोध किया. सरकार से मांग की गई कि यह जयंती समारोह न मनाया जाए. इस मांग को न मानने पर विराेध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई. इसे देखते हुए सरकार ने सुरक्षा के चौतरफ़ा सख़्त इंतज़ाम किए थे. ख़ास तौर पर कोडगू (यहां 2015 में इसी मुद्दे पर हिंसक प्रदर्शन हो चुके हैं) और चित्रदुर्ग में, जहां स्थानीय लोग भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहे.

पुलिस प्रशासन ने हुबली और धारवाड़ सहित पूरे इलाके में धारा-144 लगाई हुई थी. जिसमें एक जगह पर चार से अधिक लोगों के इकट्‌ठा होने पर निषेध यानी मनाही होती है. समारोह के विरोध में ‘टीपू जयंती विरोधी होराता समिति’ ने तमाम इलाकों में शनिवार को बंद का आह्वान भी किया था. प्रदर्शन भी हुए. इस दौरान विभिन्न जगहों से कई प्रदर्शनकारियाें को पुलिस ने ग़िरफ़्तार भी किया है.

इस सबके बीच ‘टीपू जयंती समारोह’ भी चलता रहा. यहां बताते चलें कि ‘टीपू सुल्तान की जयंती को समारोहपूर्वक मनाने का सिलसिला 2015 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने शुरू किया था. तब राज्य में कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने दलील दी थी कि ‘टीपू सुल्तान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. वे अंग्रेजों के साथ हुई अपनी चौथी लड़ाई में मारे गए थे.’ इसी आधार पर हर साल टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का फैसला किया गया था. राज्य की मौज़ूदा कांग्रेस-जेडीएस (जनता दल-धर्मनिरपेक्ष) सरकार उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है.