अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी संसद के निचले सदन यानी ‘हाउस ऑफ़ रिप्रेंज़ेटेटिव्स’ में बहुमत पाने में कामयाब हो गई है. हालांकि, उच्च सदन यानी सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा अभी भी बरकरार है. अमेरिका के इस चुनाव पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुईं थीं. इन चुनावों के नतीजे वहां के राष्ट्रपति के भविष्य और उनके निर्णय लेने की क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं. बतौर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह से अपने मन मुताबिक फैसले ले रहे थे, उसे देखते हुए इस चुनाव का महत्व और बढ़ गया था. ऐसे में अब मध्यावधि चुनाव के नतीजे आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिकी संसद की नई बनी स्थिति किस तरह से ट्रंप की विदेश नीति को प्रभावित करेगी.

अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में सबसे ज्यादा ताकत सीनेट के हाथ में मानी जाती है क्योंकि सीनेट ही वह सदन है जो राष्ट्रपति के द्वारा लिए गए कई फैसलों को पलटने की ताकत रखता है. इसके अलावा किसी बिल को पास करवाने में निर्णायक भूमिका भी सीनेट ही निभाती है. यही वजह है कि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रत्यक्ष रूप से अभी भी डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों में कोई बड़ी बाधा नहीं पहुंचा पाएगी.

हालांकि, कई अमेरिकी जानकारों का कहना है कि निचले सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत होने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप पहले की तरह अपनी मनमर्जी नहीं चला सकेंगे. इनके मुताबिक डेमोकेटिक पार्टी के वर्चस्व वाला ‘हाउस ऑफ़ रिप्रेंज़ेटेटिव्स’ ट्रंप को कई तरह से अपने फैसले बदलने को मजबूर कर सकता है. दरअसल, संसद के इस सदन के पास राष्ट्रपति प्रशासन और किसी भी मंत्रालय द्वारा लिए गए फैसलों की जांच करने का अधिकार होता है. साथ ही जांच के दौरान वह जिस अधिकारी या मंत्री को तलब करेगा, उसे संसद में पेश होना ही पड़ेगा.

अभी तक ‘हाउस ऑफ़ रिप्रेंज़ेटेटिव्स’ की सभी कमेटियों में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा था और यही वजह थी कि कोई भी कमेटी डोनाल्ड ट्रंप के किसी भी निर्णय पर सवाल नहीं उठाती थी. लेकिन, अब मध्यावधि चुनाव के बाद निचले सदन की इन कमेटियों में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा होगा. डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद पहले ही कह चुके हैं कि जीतने की हालत में वे डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लिए गए ज्यादातर फैसलों की नए सिरे से जांच करेंगे. इन मामलों में राष्ट्रपति चुनाव में रूस का दखल, ईरान परमाणु समझौता और डोनाल्ड ट्रंप के वकील माइकल कोहेन द्वारा उनके खिलाफ किए गए खुलासे शामिल हैं. इसके अलावा ट्रंप पर लग रहे टैक्स चोरी के आरोपों और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बिन सलमान के साथ उनके दामाद जेरेड कुशनर के संबंधों की जांच करने की बात भी की जा रही है.

डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद एलियट एल एंजेल, जो निचले सदन की विदेश मामलों की समिति का नेतृत्व करेंगे, अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट वोक्स से कहते हैं, ‘हम विदेश मंत्रालय और अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय विकास से संबंधित एजेंसी की नियमित रूप से निगरानी करने की योजना बना रहे हैं क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने इनकी कार्यप्रणाली को खराब कर दिया गया है. हम डोनाल्ड ट्रंप और उनसे जुड़े हितों के टकराव के मामलों की जांच भी करेंगे.’

एलियट आगे कहते हैं, ‘रूस द्वारा 2016 के राष्ट्रपति के चुनाव में किए गए हस्तक्षेप की जांच को गति देना मेरी प्राथमिकताओं में शामिल है. हम ट्रंप प्रशासन पर दबाव डालेंगे कि वह सऊदी अरब को यमन में छेड़े गए युद्ध के लिए मदद देना बंद करे.’

डेमोक्रेटिक पार्टी के एक और सांसद एडम स्मिथ, जो जल्द ही निचले सदन की ‘आर्म्स सर्विस कमेटी’ के प्रमुख बनने वाले हैं, हाल में एक साक्षात्कार में कहते हैं, ‘हम पेंटागन द्वारा देश से बाहर चलाये गए सभी अभियानों की जांच पड़ताल करेंगे. ट्रंप के प्रशासन में ऐसी संस्थाओं को दिए जाने वाले पैसे का उपयोग किस तरह से किया जा रहा है, इसका भी पता लगाएंगे.’ यह भी बताया जा रहा है कि स्मिथ कमेटी अमेरिकी नेवी प्रमुख को दुनिया भर में नेवी की तैनाती पर स्प्ष्टीकरण देने के लिए भी तलब करेगी.

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद एक और तरह से भी डोनाल्ड ट्रंप की परेशानी बढ़ाने जा रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों कई विदेशी नेताओं से ऐसी बैठकें की हैं जिनके बारे में सरकार की ओर से संसद को न तो कोई जानकारी दी गई और न ही इनमें सही प्रक्रियाओं का पालन किया गया. इन बैठकों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग-उन के साथ हुई बैठकें भी शमिल थीं. यह मुद्दा तब काफी चर्चा रहा था जब खुद राष्ट्रपति प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने मीडिया से कह दिया था कि उन्हें बैठकों में हुई बातचीत की कोई जानकारी नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब डेमोक्रेटिक पार्टी ऐसा प्रावधान करेगी जिसके तहत राष्ट्रपति की हर बैठक के बाद अधिकारियों को इन बैठकों का पूरा ब्यौरा संसद को देना अनिवार्य होगा.

अमेरिकी जानकारों की मानें तो अब डोनाल्ड ट्रंप के लिए विदेश नीति को पहले की तरह अपने मन मुताबिक चलाना आसान नहीं होगा क्योंकि अब निचले सदन में उनके हर फैसले की जांच और समीक्षा की जायेगी. हालांकि, इन जांचों से बतौर राष्ट्रपति ट्रंप की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन, इससे उनकी और रिपब्लिकन पार्टी की साख पर बट्टा लगता रहेगा जिस वजह से वे अपने कई फैसले बदलने को भी मजबूर होंगे.

डोनाल्ड ट्रंप भी मध्यावधि चुनाव के बाद बदली परिस्थितियों को अच्छे से समझते हैं. इसीलिए चुनाव नतीजों के बाद उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में डेमोक्रटिक पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनके खिलाफ जांच करने के लिए डेमोक्रेट्स कोई कदम उठाते हैं तो यह राष्ट्रपति के खिलाफ ‘युद्ध सरीखा रवैया’ दिखाना होगा. ट्रंप का आगे कहना था, ‘रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाली सीनेट इसका पूरी ताकत के साथ जवाब देगी.’