‘कल गांव के सरपंच आए थे. उन्होंने कहा कि मोदी जी की रैली है और सभी को चलना है. आज चले आएं. भाजपा के समर्थक नहीं हैं, लेकिन आ गए हैं, मोदी जी को सुनने-देखने के लिए. इस रैली में आधे लोग कांग्रेस के होंगे. ऐसा ही होता है, कांग्रेस की रैली में भी आधे भाजपा के लोग होते हैं. कई लोग इसी बहाने शहर घूमने आ जाते हैं.’

मयूरेंद्र सूर्यवंशी सोमवार को बिलासपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा में शामिल होने आई हजारों की भीड़ को इन शब्दों में गूंथते हैं. बिलासपुर के करीब स्थित सरगांव रहने वाले मयूरेंद्र पेशे से राजमिस्त्री हैं और 350 से 400 रुपये की दिहाड़ी पर काम करते हैं. उनकी मानें तो गांव की महिलाओं को भी गाड़ी में लाया गया है और उन्हें कुछ पैसे भी दिए गए हैं. हालांकि, महिलाओं ने इससे इनकार किया कि उन्हें इसके लिए पैसा मिला है.

छत्तीसगढ़ चुनाव में नरेंद्र मोदी की यह दूसरी रैली थी. इससे पहले बीती नौ तारीख को उन्होंने जगदलपुर में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था. जैसा कि उनकी हर रैली में होता है, इस रैली में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. यहां तक कि बिना पास के पत्रकारों को कैमरे सहित अन्य उपकरणों को लेकर अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था. और वहां मौजूद अधिकारी के मुताबिक यह पास रविवार को ही बांटा जा चुका था.

नरेंद्र मोदी के जाने के बाद जनसभा स्थल
नरेंद्र मोदी के जाने के बाद जनसभा स्थल

वहीं, सभा में आने वाले लोगों के लिए सरकार की ओर से प्रवेश द्वार के करीब निशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया था. इस बारे में पूछने पर वहां मौजूद डॉक्टर ने बताया कि हर जनसभा में इस तरह की सुविधा दी जाती है. तो क्या कांग्रेस की सभा में भी यह शिविर लगाया जाता है? इस पर उनका जवाब था, ‘हां’.

प्रवेश द्वार के करीब सरकार का निशुल्क स्वास्थ्य शिविर
प्रवेश द्वार के करीब सरकार का निशुल्क स्वास्थ्य शिविर

वहीं, जनसभा के लिए बने पंडाल के भीतर लोगों के लिए पर्याप्त कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी. करीब दो दर्जन बड़ी-बड़ी स्क्रीनें लगी थीं ताकि लोगों को उनके और नरेंद्र मोदी के बीच दूरी महसूस न हो. लोगों के बीच भाजपा कार्यकर्ताओं के समूह थे जो उनके भाषण के बीच ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगा रहे थे. नरेंद्र मोदी के भाषण के दौरान कुछ बातें जिनमें अधिकांश चुटीली होती थीं, उन पर कुछ वक्त के लिए तालियां बजतीं और फिर लोग अपनी-अपनी कुर्सी संभाल लेते. हालांकि, प्रधानमंत्री का भाषण शुरू होने के बाद भी कई कुर्सियों को लोगों का इंतजार रहा. जनसभा खत्म होने के बाद सत्याग्रह ने कई लोगों से बात की तो मालूम हुआ कि कई लोग वक्त पर नहीं पहुंच पाए. कई लोग भीड़ और सुरक्षा से जुड़े अन्य कारणों से भी बाहर ही रह गए थे.

जनसभा खत्म होने के बाद होर्डिंग साथ ले जाते लोग
जनसभा खत्म होने के बाद होर्डिंग साथ ले जाते लोग

65 साल के जवाहर सिंह इन्हीं लोगों में से एक थे. उन्होंने बताया कि जब वे यहां पहुंचे तो प्रधानमंत्री का भाषण खत्म हो गया था. बुंदेला के रहने वाले किसान जवाहर सिंह 1985 से खुद को भाजपा का समर्थक बताते हैं. जब हम उनके पास पहुंचे तो वे नरेंद्र मोदी की तस्वीर वालीा होर्डिंग अपने साथ गांव ले जाने की तैयारी कर रहे थे. हमने उनसे पूछा कि क्या इस बार बदलाव होगा. उन्होंने तपाक से कहा, ‘क्यों बदलाव होगा? अच्छा काम तो कर रहे हैं मोदी जी. बहुत काम शुरू हुआ है.’ हालांकि, इसके आगे जवाहर सिंह ने खुद बताया कि इस बार ‘अकाल’ मार दिया है.

इस ‘अकाल’ के बारे में वहां मौजूद कोटा विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले स्नातक के छात्र ईश्वर कुमार बताते हैं, ‘हमारे यहां खेती बारिश के पानी पर ही निर्भर है. इस बार बारिश कम हुई, इसलिए धान की फसल को नुकसान हुआ है. ईश्वर भी किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं. तो क्या सरकार की ओर से किसानों के लिए सिंचाई की व्यवस्था नहीं की गई है? इस सवाल पर उनका जवाब था, ‘नहर से खेतों तक पानी पहुंचाने का काम शुरू ही हुआ है, अभी खेत ऊपर के पानी पर ही निर्भर है.’ इससे पहले रायपुर, बलौदा बाजार और बिलासपुर में लोगों से बातचीत में किसानों को सिंचाई की सुविधा और फसल की सही कीमत न मिलने की बात सामने आई थी.

जनसभा में रमन सिंह और नरेंद्र मोदी के होर्डिंग
जनसभा में रमन सिंह और नरेंद्र मोदी के होर्डिंग

सोमवार की रैली में खुद नरेंद्र मोदी ने करीब 45 मिनट के भाषण में किसानों पर न के बराबर वक्त खर्च किया. हालांकि, उन्होंने बीते चार वर्षों में केंद्र सरकार की कई उपलब्धियों और गांधी परिवार पर हमले करने के लिए काफी शब्द खर्च कर डाले. उन्होंने किसानों को सिर्फ सिंचाई की सुविधा और खेतिहर मजदूरों के साथ छोटे किसानों को 1,000 रुपये की पेंशन देने का वादा किया. वहीं, युवाओं की कमाई की बात तो की, लेकिन इसके लिए उन्हें रोजगार कहां और कैसे मिलेगा, इस बारे में प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा. इस जनसभा में मौजूद कई युवा नौकरी से जुड़े सवाल पूछने पर चुप्पी साधते हुए दिखे. इनमें से कुछ ने बताया कि चुनाव से पहले कुछ ‘वैकेंसी’ निकली थी.

नरेंद्र मोदी के भाषण के दौरान खाली पड़ी कुर्सियां
नरेंद्र मोदी के भाषण के दौरान खाली पड़ी कुर्सियां

हर रैली की तरह इस जनसभा में भी नरेंद्र मोदी ने उज्ज्वला योजना की चर्चा की. उन्होंने कहा, ‘गैस कनेक्शन के लिए कितनी मुश्किलें होती थीं कांग्रेस में. नेताओं के यहां जाकर चप्पल घिसने पड़ते थे तब जाकर एक गैस कनेक्शन मिलता था. हमने अकेले 26 लाख घरों (छत्तीसगढ़ में) को गैस का कनेक्शन पहुंचाया.’

वहीं, जब इस बारे में रैली में शामिल महिलाओं से बात की तो उनका कुछ और ही कहना था. करीब 35 वर्षीय जानकी खांडेकर ने बताया, ‘कुछ पैसे लेकर तो सरकार ने गैस कनेक्शन दे दिया लेकिन अब हजार रुपये देकर सिलिंडर कहां से भरवाएं. ऊपर से खाने-पीने की हर चीज महंगी हो गई है.’ जानकी के साथ ही रैली में आईं लक्ष्मी अहिरवाल ने पानी की समस्या के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा, ‘सप्लाई पानी के लिए 70 रुपया महीना, चाहे कोई गरीब हो या अमीर सभी को देना होता है. कई बार हमने कहा कि हम गरीबों के पानी का पैसा माफ कर दिया जाए, लेकिन नहीं किया गया. और बढ़ा दिया गया. पहले 50 रुपये ही लगता था.’

नरेंद्र मोदी की जनसभा तक न पहुंच सकी महिलाएं
नरेंद्र मोदी की जनसभा तक न पहुंच सकी महिलाएं

उधर, करीब 55 साल की मथुरा सूर्यवंशी का कहना था कि बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) में नाम होने के बाद भी उन्हें कनेक्शन नहीं मिला है और इसके लिए कई बार आवेदन देने के चक्कर में पांच सौ रुपये खर्च हो गए हैं. उन्होंने बताया, ‘अभी 10 रुपये किलो लकड़ी खरीदकर खाना पकाना पड़ता है. चावल भी पहले 35 किलो मिलता था, अब एक आदमी पर सात किलो कर दिया है. अब परिवार में अकेले हैं तो बताइए, इतना में कैसे गुजारा होगा. इससे बढ़िया था कि इसे सरकार बंद ही कर देती. लोगों से मांगकर ही इससे अधिक मिल जाता.’ मथुरा गुस्से में आगे कहती हैं, ‘इस सरकार ने 15 साल बहुत खाई-पी है. अब इसके खतम होने का वक्त आ गया. आज भी हम सब अपना पर्चा (आवेदन) देने के लिए आई थीं लेकिन, उन तक (नरेंद्र मोदी) पहुंच ही नहीं पाईं. हम गरीबों की आवाज ऊपर तक पहुंचती ही नहीं है.’