सबरीमला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर दिए गए अपने ही फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है. एनडीटीवी के मुताबिक इस मामले को लेकर विभिन्न संगठनों की तरफ से शीर्ष अदालत के समक्ष 49 याचिकाएं दाखिल की गई थीं. मंगलवार को इन पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन सभी अर्जियों पर अब ओपन कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई की जाएगी. हालांकि इस दौरान सबरीमला मंदिर में रजस्वला महिलाओं के प्रवेश को लेकर दिए गए अपने पिछले फैसले पर स्टे (रोक) लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया है.

इन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगाई की अगुवाई में जस्टिस आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की खंडपीठ सुनवाई करेगी. इससे पहले इसी साल 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक खंडपीठ ने सबरीमला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश का रास्ता साफ किया था. साथ ही मंदिर में रजस्वला महिलाओं को प्रवेश न दिए जाने को तब दीपक मिश्रा ने ‘लैंगिक भेदभाव’ के समान भी बताया था.

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने से पहले इस मंदिर में 10 से 50 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया था. उधर, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ लगातार विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है.