‘कांग्रेस के लोग कुर्सी के लिए आपस में लड़ते हैं. चांपा का विधायक पांच साल में एक बार भी नहीं आया यहां. और यहीं उसका घर है. कोई काम नहीं करता है. यहां का आदमी अपने काम के लिए यहां-वहां भटक रहा है, लेकिन कोई सुन नहीं रहा है. जनता उसके साथ नहीं जाएगी.’

हम छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में हैं. ये बातें किसी भाजपा समर्थक ने नहीं कही हैं. अपनी नाराजगी जाहिर करने वाले ये शख्स 55 साल के गणेशराम लहरे हैं. वे करीब 35 साल से कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं और यहीं एक स्टील फैक्ट्री में काम करते हैं.

गणेशराम लहरे से हमारी मुलाकात मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जनसभा शुरू होने से पहले होती है. वे कहते हैं, ‘कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी में जिसको पसंद नहीं करते उसी को हराने का काम करते हैं.’ इसके बाद वे इससे जुड़ी एक घटना का जिक्र भी करते हैं. हम उनसे पूछते हैं कि क्या इसे रोकने के लिए राहुल गांधी कुछ नहीं करते. गणेशराम का जवाब आता है, ‘राहुल गांधी दिल्ली में बैठे हैं. उनको क्या पता चलेगा. आए, भाषण दिए, चले गए.’

कांग्रेसी कार्यकर्ता गणेशराम केंद्र में पिछली यानी मनमोहन सिंह सरकार की विफलताओं की ही चर्चा नहीं करते, राज्य की रमन सिंह सरकार की तारीफ भी करते हैं. वे कहते हैं, ‘चावल बांटने की वजह से एक भिखारी मोहल्ले में नहीं मिलेगा. पहले भिखारियों का लाइन लगा रहता था. क्या दिक्कत है? सबको चावल मिल रहा है. सबको पेंशन मिल रहा है. यही तो विकास है. नेताओं को महल चाहिए. करोड़ों-अरबों की संपत्ति चाहिए. आम जनता को क्या चाहिए?’

हालांकि धीरे-धीरे वे समस्याओं पर भी आ जाते हैं. खेती-किसानी के बारे में पूछने पर गणेशराम कहते हैं, ‘तीन साल से बारिश सही नहीं हो रहा है. सिंचाई की सुविधा नहीं है. नहर निकला हुआ है, लेकिन खेत में पानी नहीं पटता है. अपनी-अपनी सुविधा से लोग सिंचाई करते हैं. किसानों का आधा फसल बर्बाद हो गया है.’

इन बातों से कड़ी धूप में एक पेड़ की छांव तले बैठी कुछ महिलाएं भी सहमति जताती हैं. हालांकि वे गणेशराम के विकास के दावे को खारिज कर देती हैं. उनके शिकायतों के तार खेती के साथ रोजगार और शराब से भी जुड़ते हैं. किसान परिवार से आने वाली रेणु धमधे गुस्से में कहती हैं, ‘चावल मिलने से क्या होगा! हर चीज महंगा हो गया है. इसके बाद चावल लाने जाओ तो कहते हैं, इसका फोटो (कॉपी) करवा कर लाओ, ये लाओ-वो लाओ. बैंक जाओ तो कहते हैं, ये कागज लाओ-वो कागज लाओ, कल आना, परसों आना. एक ही फोटो कॉपी 15 बार करवाते हैं. इसके बाद भी काम नहीं होता है.’

50 वर्षीय रेणु आगे जोड़ती हैं, ‘सरकार गैस (कनेक्शन) तो फ्री में दे दी है. लेकिन इसे (सिलिंडर) भरवाने में 1,000 से ऊपर खर्च हो जाता है. बड़ा परिवार हो तो एक सिलिंडर 15 दिन भी नहीं चलता है. पेट्रोल का दाम बढ़ता है. हर चीज महंगा हो गया है.’ उनके बगल में बैठी नानवे बंजारे कहती हैं, ‘चावल तो मिल गया है लेकिन, इसे चटनी में थोड़े ही खाया जाएगा.’

इसके आगे वे धान बेचने में होने वाली परेशानी का भी जिक्र करती हैं. नानवे कहती हैं, ‘अमीर आदमी का मंडी है. पर्ची के बिना मंडी में धान नहीं बिकता. पंजीकरण और नवीनीकरण (जमीन के कागजात का) होने पर मंडी में धान बिकता है. व्यापारी लोग गांव-गांव से धान खरीदकर मंडी में बेचते हैं.’ उनके मुताबिक अगर उन्हें धान बेचना होता है तो वे आस-पास की दुकानों पर बेचते हैं जहां ये 1,000 रु प्रति क्विंटल की दर से बिकता है. यहां याद दिला दें कि सामान्य किस्म के धान के लिए भी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,750 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है.

परेशानी यहीं खत्म नहीं होती. जैसा सत्याग्रह की एक रिपोर्ट में जिक्र हुआ है. छत्तीसगढ़ की कमाई शराब में डूब रही है, महिलाएं इसका भी जिक्र करती हैं. यहां तक कि उनके हाव-भाव से यह लगता है कि वे सभी सबसे अधिक शराब को लेकर ही परेशान हैं. 30 वर्षीय ललिता मिरी गृहस्थ हैं और एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं. वे ऊंची आवाज में कहती हैं, ‘सब नौजवान लोग दारू पीकर भटक रहे हैं. वही नशे के हालत में लड़का लोग का एक्सीडेंट हो जाता है. पढ़ाई चला जाता है. सरकार ही खोल दी है तो अब कौन सुनेगा?’ हम उन्हें बताते हैं कि सरकार शराब बंद करने की बात कह रही है. इस पर वे झल्लाकर कहती हैं, ‘वो तो नोट कमाने के लिए ऐसा कर रही है. वह क्यों बंद करेगी? लोग खाने के लिए मजदूरी करते हैं, पैसे से खाना न खाकर दारू पीते हैं.’ इसके बाद सभी महिलाएं जनसभा स्थल की ओर बढ़ जाती हैं.

जनसभा स्थल
जनसभा स्थल

चुनावी जनसभा स्थल को लेकर जिस तरह की तैयारी भाजपा में दिखती है, उसका कांग्रेस में अभाव दिखता है. होर्डिंग और झंडे कम दिखते हैं. वहीं, पार्टी प्रत्याशी के कई कटऑउट तो दिखते हैं लेकिन, राहुल गांधी के नहीं. बड़ी संख्या में कुर्सियां लगाई गई हैं. लेकिन इनमें से कई राहुल गांधी के भाषण के दौरान भी खाली रहती हैं. वहीं, सुरक्षा को लेकर कोई अधिक ताम-झाम नहीं दिखता. लोगों को आसानी से अंदर आने दिया जा रहा है.

इंदिरा गांधी की फोटो के सहारे कड़ी धूप बचने की कोशिश
इंदिरा गांधी की फोटो के सहारे कड़ी धूप बचने की कोशिश

हालांकि, लोगों को कड़ी धूप से बचाने की कोई व्यवस्था नहीं है. मैदान में उड़ने वाली धूल भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है. इस अव्यवस्था के बारे में जब हम एक स्थानीय नेता से पूछते हैं तो उनका जवाब आता है, ‘धूल और धूप को क्यों देख रहे हैं, यह देखिए न कि इन परेशानियों की बाद भी कितनी जनता आई हुई है.’ इसी जनता में धनेश्वरी पंडित भी हैं जो एक महीने के नवजात को गोद में लेकर राहुल गांधी को देखने के लिए आई हैं.

सभा स्थल पर अपने एक महीने के बच्चे के साथ धनेश्वरी पंडित
सभा स्थल पर अपने एक महीने के बच्चे के साथ धनेश्वरी पंडित

मंगलवार को चार चुनावी सभाएं करने वाले राहुल गांधी लोगों की परेशानी को और बढ़ाते हैं. वे तय वक्त से करीब एक घंटे की देरी से सभा स्थल पहुंचते हैं. अपने भाषण की शुरुआत में वे इसके लिए माफी भी मांगते हैं. इस पर तालियों की आवाज भी सुनाई देती है. हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष सूबे के लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों की जगह पहले से तय मुद्दों पर ही बातें करते हैं. वे हमेशा की तरह अनिल अंबानी, नीरव मोदी और विजय माल्या को लेकर मोदी सरकार पर हमले करते हैं. साथ ही, वे पार्टी कार्यकर्ताओं से ‘चौकीदार चोर है’ के नारे भी लगवाते हैं.

राहुल गांधी के भाषण के दौरान खाली कुर्सियां
राहुल गांधी के भाषण के दौरान खाली कुर्सियां

इसके अलावा राहुल गांधी खेती की बात तो करते हैं लेकिन, उनका सारा जोर केवल कर्ज माफी और बोनस पर होता है. वहीं, रोजगार पर वे कहते हैं कि विजय माल्या को दिया गया 10,000 करोड़ रुपये इन्हें (एक कांग्रेसी कार्यकर्ता का नाम लेकर) मिला होता तो कई लोगों को रोजगार मिलता. इसके अलावा वे कथित रफाल घोटाले को भी सरल शब्दों में समझाने की कोशिश करते हैं. लेकिन, यह ज्यादातर लोगों के पल्ले नहीं पड़ता. जनसभा में मौजूद एक महिला सिपाही भी कहती हैं कि उन्हें कुछ समझ नहीं आया.

राहुल गांधी के भाषण के बीच सभा स्थल से जाती महिलाएं
राहुल गांधी के भाषण के बीच सभा स्थल से जाती महिलाएं

इस बीच, राहुल गांधी के भाषण के दौरान ही कई महिलाएं उठकर जाने लगती हैं. इसके बाद जल्दी-जल्दी में राहुल गांधी भी अपना भाषण खत्म करते हैं. शाम का वक्त हो चुका है और उन्हें रायगढ़ में भी एक सभा को संबोधित करना है. हालांकि, वहां मौजूद अधिकांश लोगों को घर जाने की कोई जल्दबाजी नहीं. वे राहुल गांधी के हेलिकॉप्टर को देखने के लिए उसके आंखों से ओझल होने तक अपनी जगह पर टिके रहते हैं. फिर कुछ धीमे और कुछ तेज कदमों से अपने-अपने रास्ते चल पड़ते हैं.