छत्तीसगढ़ में सुबह और शाम को बढ़ती ठंडक के बीच सियासी पारा चरम पर है. सूबे के पहले चरण में 18 सीटों पर मतदाता उम्मीदवारों की किस्मत को ईवीएम में लॉक कर चुके हैं. अब मंगलवार को बाकी 72 सीटों का फैसला होना है. प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर 18 साल के इस नौजवान राज्य की कमान किन हाथों में जाएगी, यह 11 दिसंबर को ही पता चल पाएगा. उसी दिन अन्य चार राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ के चुनावी नतीजे भी घोषित होने हैं. फिलहाल अपनी-अपनी तैयारियों के साथ राजनीतिक दल 1.85 करोड़ मतदाताओं के बीच हैं.

तैयारियों की बात करें तो अन्य राजनीतिक दलों के मुकाबले सत्ताधारी भाजपा कहीं आगे दिखती है. सूबे की राजधानी रायपुर सहित तमाम बड़े शहरों में जगह-जगह उसके होर्डिंग और पोस्टर लगे हुए है. इनमें मुख्य चेहरा रमन सिंह को ही बनाया गया है. वहीं, प्रचार वाहनों के जरिए भी मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा पार्टी के स्टार प्रचारक पूरे राज्य में जनसभाएं कर पार्टी को लगातार चौथी बार सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाने की तैयारी में हैं. इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ कई अन्य केंद्रीय मंत्री शामिल हैं. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ भी सूबे के लोगों को भाजपा के साथ लाने की कोशिश में हैं. भाजपा के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी ने यहां तीन बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया है. आम तौर पर एक दिन में उनकी एक ही जनसभा रखी गई थी.

भाजपा का प्रचार अभियान
भाजपा का प्रचार अभियान

दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक दिन में चार जनसभाओं को संबोधित करते हुए दिखे. इसकी बड़ी वजह राज्य में रमन सिंह के मुकाबले कांग्रेस के पास कोई चेहरा न होना है. यहां तक कि अब तक पार्टी की ओर यह भी साफ नहीं किया गया है कि अगर वह जीती तो कमान किसके हाथ जाएगी. इस बात को भाजपा ने चुनाव में लगातार मुद्दा बनाकर रखा. साथ ही, इस वजह से कांग्रेस के चुनावी अभियान का पहिया राहुल गांधी की धुरी पर ही घूमता दिखा.

कांग्रेस के होर्डिंगों और पोस्टरों की बात करें दो तरह के होर्डिंग दिखे. इनमें एक पार्टी की ओर से लगाया गया है जिनमें राहुल गांधी और सोनिया गांधी की तस्वीर के साथ कांग्रेस का कोई एक चुनावी वादा है. इनमें पार्टी के स्थानीय उम्मीदवार कहीं नहीं दिखते. वहीं, कांग्रेसी प्रत्याशियों की ओर से लगाए गए होर्डिंग से पार्टी नेतृत्व गायब है.

बिलासपुर से कांग्रेस प्रत्याशी की हॉर्डिंग | फोटो : हेमंत कुमार पाण्डेय
बिलासपुर से कांग्रेस प्रत्याशी की हॉर्डिंग | फोटो : हेमंत कुमार पाण्डेय

भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी अभियान को लेकर अंतर होर्डिंगों और पोस्टरों को लेकर ही नहीं अन्य मामलों में भी दिखा. नरेंद्र मोदी की जनसभाओं के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की गई. ध्यान रखा गया कि उनकी जनसभाओं में अधिक से अधिक लोग पहुंच पाएं. इसके लिए गांवों तक के स्थानीय पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगाया गया. इनका काम लोगों को वाहनों से जनसभा स्थल तक पहुंचाना और फिर वापस उनके गांव ले जाना था. साथ ही, इन्हें नाश्ता-पानी की भी व्यवस्था करनी होती थी. जनसभा स्थल पर अच्छी-खासी व्यवस्था की गई. लोगों के लिए न केवल पर्याप्त संख्या में कुर्सियां रखी गईं बल्कि उनको धूप से बचाने के लिए पंडाल की भी व्यवस्था रही. लोगों को पार्टी के नाम की टोपियां और अन्य चीजें बांटीं गईं.

नरेंद्र मोदी की जनसभा के बाद पार्टी का झंडा ले जाने की होड़
नरेंद्र मोदी की जनसभा के बाद पार्टी का झंडा ले जाने की होड़

वहीं, बिलासपुर की जनसभा में हमने देखा कि नरेंद्र मोदी और उनकी बातों को करीब डेढ़-दो दर्जन स्क्रीनों के जरिए दूर-दूर बैठे लोगों तक पहुंचाया जा रहा था. उनकी ‘चुनाव की बात’ को पूरे देश के लोगों तक पहुंचाने की भी व्यवस्था भी थी. इन जनसभाओं का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण हुआ. इस काम से जुड़े एक कैमरामैन ने हमें बताया कि उनका काम सारे चैनल्स को लाइव फीड भी देना होता है. जनसभा स्थल तक पहुंचने के लिए लोगों को कड़ी सुरक्षा जांचों का सामना करना पड़ा. कई लोग इस वजह से भी नरेंद्र मोदी को देखने से महरूम रहे कि वे सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते थे.

वहीं, जब हम राहुल गांधी की जांजगीर-चांपा की रैली कवर करने पहुंचे तो जनसभा से एक-दो किलोमीटर पहले कई लोग पैदल जाते हुए दिखे. इनमें से अधिकांश के पीछे कोई पार्टी नेता या कार्यकर्ता नहीं थे. वहीं, दो-चार पहिए के जरिए भी बड़ी संख्या में धीरे-धीरे लोग पहुंच रहे थे. सभा स्थल को कड़ी धूप से बचाने के लिए पंडाल की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी. धूल की वजह से भी लोग काफी परेशान दिखे. यहां नरेंद्र मोदी की जनसभा की तरह कोई पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी. कई बार हमने खुद मंच संचालकों को यह कहते सुना कि उस गेट से सीधे अंदर आ जाइए, कोई सुरक्षा जांच नहीं होगी. जब हम जनसभा स्थल के अंदर पहुंचे तो अपना परिचय देने पर पुलिसकर्मियों द्वारा न तो प्रेस कार्ड मांगा गया और न ही बैग की कोई तलाशी ली गई.

राहुल गांधी की जनसभा के सामने लोगों का जमावड़ा
राहुल गांधी की जनसभा के सामने लोगों का जमावड़ा

राहुल गांधी के जनसभा स्थल में पहुंचने की बात की जाए तो बड़ी संख्या में लोग आस-पास के गांव से खुद जुटे थे. इनमें कई महिलाएं भी थीं जो कड़ी धूप में बच्चों के साथ राहुल गांधी के आने का इंतजार कर रही थीं. इसके अलावा जनसभा स्थल के आस-पास का माहौल गांव के किसी मेले की तरह लग रहा था. वहां खाने-पीने के लिए अस्थाई दुकानें भी लगी हुई थीं. इससे पहले हमने नरेंद्र मोदी की सभा में सरकार की ओर से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर देखा था. वहां मुफ्त में दवाइयां भी बांटी जा रही थीं. उधर, कांग्रेस की इस जनसभा में सरकार की ओर से कोई स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाया गया था. वहीं, पुरुष और महिलाएं अलग-अलग छोटे समूह में बैठे हुए थे.

पार्टी उम्मीदवारों के साथ नरेंद्र मोदी
पार्टी उम्मीदवारों के साथ नरेंद्र मोदी
पार्टी उम्मीदवारों के साथ राहुल गांधी
पार्टी उम्मीदवारों के साथ राहुल गांधी

इन सभी को राहुल गांधी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. जब वे पहुंचे तो उपस्थित लोगों को हेलिकॉप्टर की लैंडिंग की वजह से धूल का भी सामना करना पड़ा. इससे पहले नरेंद्र मोदी की सभा में पहुंचने वालों की ऐसी किसी भी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा था. इसके बाद जब राहुल गांधी मंच पर आए तो काफी जल्दबाजी में दिखे. हालांकि, कई मामलों में वे पहले से कहीं बेहतर लग रहे थे. अपने भाषण में वे भी नरेंद्र मोदी की तरह लोगों से मुद्दों को कनेक्ट करने की कोशिश करते दिखे. उनके पूरे भाषण के दौरान जांजगीर-चांपा क्षेत्र के सभी छह पार्टी प्रत्याशी मंच पर खड़े रहे. इससे एक दिन पहले बिलासपुर की रैली में नरेंद्र मोदी ने भी एक-एक कर सभी पार्टी उम्मीदवारों को अपने साथ- मंच पर कमल के निशान के साथ बुलाया था. लेकिन, इसके तुरंत बाद ही उन्होंने उम्मीदवारों से कहा, ‘विराजिए.’ इसके बाद सभी अपनी-अपनी कुर्सी पर बैठ गए थे.

राहुल गांधी की सभा में हेलिकॉप्टर के लैंडिंग के चलते धूल का गुबार
राहुल गांधी की सभा में हेलिकॉप्टर के लैंडिंग के चलते धूल का गुबार

भाषण की बात की जाए तो नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार से अधिक केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर जोर दिया. इसके लिए उन्होंने केंद्र प्रायोजित योजनाओं का जिक्र किया. साथ ही, गांधी परिवार और पिछली यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर निशाने साधे. 2014 से लेकर अब तक के चुनावी अभियानों में ‘गरीबी’, ‘चाय वाला’ और ‘राज परिवार’ जैसे शब्द उनके भाषण का ‘कीवर्ड’ बने हुए हैं. वहीं किसान और रोजगार जैसे शब्द उनके भाषण में यदा-कदा ही सुनाई दिए.

राहुल गांधी की जनसभा में अव्यवस्था
राहुल गांधी की जनसभा में अव्यवस्था

वहीं, राहुल गांधी भी अनिल अंबानी, नीरव मोदी और विजय माल्या के जरिए मोदी सरकार पर जवाबी हमला करते दिखे. उन्होंने लोगों को यह आश्वासन भी दिया कि अगर उनकी सरकार आई तो चुनावी वादों को पूरा किया जाएगा. उन्होंने जनसभा में मौजूद लोगों को रफाल सौदे में कथित गड़बड़ी को समझाने की कोशिश की लेकिन, यह बात कइयों के सिर के ऊपर से निकलती दिखी. कांग्रेस अध्यक्ष भाषण के दौरान एक मुद्दे से दूसरे पर कूदते भी दिखे. ऐसा लग रहा था कि उनके पास मतदाताओं से कहने के लिए काफी कुछ है लेकिन, वक्त नहीं है. नरेंद्र मोदी के ठहराव के उलट राहुल गांधी के भाषण में हड़बड़ी दिखी.

हालांकि, राहुल गांधी को देखने और सुनने गए लोगों में किसी तरह की हड़बड़ी नजर नहीं आई. उनका भाषण खत्म होने के बाद भीड़ जनसभा स्थल से आराम से निकलती दिखी. लोगों ने न तो वहां लगे पार्टी के झंडे उतारे और न कटआउट. वहीं, नरेंद्र मोदी की सभा के बाद लोगों में बाहर निकलने की काफी हड़बड़ी दिखी. उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे उन्हें कहीं जाने की हड़बड़ी है या फिर उन्हें वहां जबरन रखा रखा गया था.