नोटबंदी मोदी सरकार का एक ऐसा क़दम था जिसकी चर्चा दो साल से जारी है. नवम्बर के महीने में यह चर्चा थोड़ी ज़्यादा होती है क्योंकि इसी महीने की आठ तारीख़ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए नोटबंदी की घोषणा की थी. तब से सरकार के आलोचक इस क़दम के नुक़सान और समर्थक फ़ायदे गिनाते नहीं थक रहे. वहीं, कई जानकारों के मुताबिक़ चूंकि यह लगभग साफ़ होता जा रहा है कि नोटबंदी अर्थव्यवस्था के लिए सही क़दम नहीं था, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक उनके इस फ़ैसले को ‘साहसिक और ऐतिहासिक’ बताते हुए इसके नकारात्मक पहलुओं को ढकने की कोशिश करते रहे हैं.

इसी के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधुनिक सिंगापुर के संस्थापक व महान नेता ली कुआन यू से तुलना करती एक ख़बर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही है. दावा है कि सिंगापुर के एक अख़बार ने नरेंद्र मोदी की तुलना अपने महान नेता से करते हुए लिखा कि भारत में ‘मोदी के रूप में एक नए ली कुआन ने जन्म लिया’ है. दावे को सही साबित करने के लिए कथित सिंगापुर के अख़बार की ख़बर की हेडिंग और तस्वीर भी दिखाई गई है जिसमें मोदी और कुआन के आधे-आधे चेहरों को मिला कर भारत के प्रधानमंत्री को सिंगापुर के महान नेता के बराबर बताया गया है.

फ़ेसबुक पर तेज़ी से वायरल हो रहे इस दावे में कहा गया है, ‘यह सिंगापुर के अख़बार की हेडिंग है. वे जानते हैं कि यह आदमी कौन है. उम्मीद है आप इस बात को जल्दी समझें. यह एक गर्व का पल है और हम ख़ुशनसीब हैं कि ऐसे समय में पैदा हुए, क्योंकि आज हम अपने देश को बदलते देख रहे हैं. ली कुआन यू वह शख़्सियत हैं जिन्होंने मछली व्यापार करने वाले एक छोटे से शहर सिंगापुर को आर्थिक शक्ति के रूप में बदला. अन्य देश हमारे प्रधानमंत्री के प्रयासों की प्रशंसा कर रहे हैं.’

इस ख़बर को ‘सीरियल न्यूज़फ़ेकर’ कहे जाने वाली वेबसाइट पोस्टकार्ड ने भी शेयर किया है. यह जानकारी इस ख़बर पर पूरी तरह से यक़ीन करने से रोकती है. वहीं, इस बारे में बूमलाइव.इन की रिपोर्ट पढ़ने के बाद साफ़ हो जाता है कि इस ख़बर को भ्रामक तरीक़े से शेयर किया गया है. यह सही है कि एक अख़बार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का ली कुआन यू बताए जाने वाली ख़बर छपी थी. लेकिन वह कोई सिंगापुर का अख़बार नहीं था.

दरअसल भारत के ही जाने-माने मीडिया समूह टाइम्स ऑफ़ इंडिया के एक अंग्रेज़ी अख़बार इकनॉमिक टाइम्स (ईटी) में यह ख़बर (जिसकी हेडिंग बाद में बदल दी गई) प्रकाशित हुई थी. वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक़ ईटी की यह ख़बर नोटबंदी की घोषणा के दो दिन बाद यानी दस नवंबर, 2016 को आई थी. इसकी क्रेडिट लाइन में अख़बार के पत्रकार रवीश तिवारी का भी नाम पढ़ा जा सकता है.

यह तो साफ़ हो गया कि ख़बर सिंगापुर के किसी अख़बार की नहीं थी. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को भारत का ली कुआन किसने बताया. इस सवाल का जवाब देने से पहले बता दें कि वायरल ख़बर को शेयर किए जाने से पहले ईटी की असली ख़बर की हेडिंग के साथ भी छेड़खानी की गई है. अख़बार ने अपनी तरफ़ से मोदी की तुलना कुआन से नहीं की थी, बल्कि मोदी सरकार के नोटबंदी के फ़ैसले को लेकर एक सरकारी सूत्र (या अधिकारी) के बयान को अपनी रिपोर्ट की हेडिंग बनाया था. नीचे असली ख़बर के स्क्रीनशॉट में पूरी हेडिंग और उसके साथ तस्वीर भी देखी जा सकती है.

ईटी की यह रिपोर्ट पढ़ कर पता चल जाता है कि सरकार के सूत्र ने नोटबंदी के क़दम को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की ख़ासी तारीफ़ की थी. इसी के तहत उसने उनकी तुलना सिंगापुर के महान नेता से की थी. कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सिंगापुर में मोदी सरकार के नोटबंदी के फ़ैसले की काफ़ी चर्चा हुई और वहां के लोगों और नेताओं ने इसकी काफ़ी तारीफ़ की. बता दें कि यह जानकारी भी सही नहीं है. बूमलाइव.इन की रिपोर्ट के मुताबिक़ कुछ मीडिया संस्थानों ने इस बारे में अपनी रिपोर्टों में संशोधन किया था. वेबसाइट पर जाकर इस बारे में पूरी जानकारी ली जा सकती है.